Caste Census report: जाति जनगणना पर कांग्रेस में सच कौन बोल रहा है? कर्नाटक से दिल्ली तक कंफ्यूजन
जाति जनगणना को लेकर विपक्षी दलों के इंडिया ब्लॉक में कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व बहुत ज्यादा सक्रिय है। राहुल गांधी से लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे तक आए दिन इसकी मांग को लेकर कोई न कोई बड़ा बयान दे रहे हैं।
लेकिन, इस मामले में सवालों के घेरे में कर्नाटक में उनकी अपनी ही सरकार आ चुकी है। वहां जातीय जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने को लेकर सरकार और पार्टी के भीतर ही रोजाना अलग-अलग और विरोधाभासी दावे किए जा रहे हैं।

लीडरशिप की हरी झंडी का इंतजार- कर्नाटक के डिप्टी सीएम
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को कहा है कि जैसे ही कांग्रेस लीडरशिप इसको लेकर कोई स्टैंड लेती है, कर्नाटक सरकार राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से हुए व्यापक जातीय जनगणना की रिपोर्ट जारी करने पर फैसला लेगी। पिछले 2 अक्टूबर को बिहार में जारी हुई इसी तरह की जातीय जनगणना रिपोर्ट के बाद कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर भी दबाव बढ़ा हुआ है, जिसके नेता देशव्यापी जातीय जनगणना की मांग करने से नहीं थक रहे हैं।
वर्षों से लटकी हुई है 170 करोड़ की अनुमानित लागत वाली रिपोर्ट
कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की ही पहले की सरकार ने अनुमानित तौर पर करीब 170 करोड़ रुपए खर्च करके जातीय जनगणना करवाई थी। लेकिन, कहते हैं कि इसके आंकड़ों को देखने के बाद कुछ प्रभावशाली समुदायों के भड़कने की आशंका से इसे विभिन्न सरकारों ने अबतक लटकाए रखने में ही भलाई समझी है। क्योंकि, उनके बारे में कहा जा रहा है कि ऐसी जातीयों की जनसंख्या उनकी अनुमानित आबादी से घट सकती है।
उपमुख्यमंत्री ने मानी रिपोर्ट को लेकर मतभेद की बात
अब डिप्टी सीएम शिवकुमार ने कहा है कि कांग्रेस नेतृत्व एक स्टैंड लेगा और राज्य सरकार उसका पालन करेगी। उनका कहना है कि 'जनता के कुछ वर्ग में इसे जारी किए जाने की इच्छा है, जबकि कुछ को इसपर आपत्ति भी है। सरकार जल्द ही एक फैसला लेगी।'
सीएम सिद्दारमैया ने कहा था कि 'रिपोर्ट हमारे पास नहीं है'
गौरतलब है कि दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री सिद्दारमैयान ने कहा था कि 'अगर वे (राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के मौजूदा अध्यक्ष जयप्रकाश हेगड़े) रिपोर्ट दाखिल करते हैं....चलिए देखते हैं......मैंने उनसे एक बार पूछा था, उन्होंने कहा था कि वे जमा करेंगे, लेकिन यह अबतक हमारे पास नहीं आया है।' अब सवाल है कि डिप्टी सीएम शिवकुमार और सीएम सिद्दारमैया में से किनकी बात को सच माना जाए?
'तकीनीकी खामी' दूर करके सौंपी जाएगी रिपोर्ट- हेगड़े
क्योंकि, जहां डीके शिवकुमार रिपोर्ट जारी करने के लिए कांग्रेस आलाकमान की हरी झंडी के इंतजार की बात कह रहे हैं, वहीं सीएम सिद्दारमैया के मुताबिक रिपोर्ट तो उन्हें मिली ही नहीं है। वैसे जयप्रकाश हेगड़े की ओर से मंगलवार को कहा गया था कि, 'एक तकनीकी परेशानी थी, क्योंकि जो रिपोर्ट पहले तैयार की गई थी, उसपर सदस्य-सचिव के हस्ताक्षर नहीं थे......अब ये हमारे पास है, हम इसे आखिरी रूप दे रहे हैं। हम इसे सरकार को सौंपेंगे....अगले महीने तक।'
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने दिल्ली में कहा था, 'हमारे सबसे बड़े नेता राहुल गांधी की यह इच्छा लंबे समय से रही है कि प्रदेश और देश दोनों स्थानों पर जातीय जनगणना हो और उसके आधार पर जनगणना कार्यक्रम बनाया जाए। इसके लिए कंठराज आयोग की जो रिपोर्ट है, उसे सार्वजनिक करना पड़ेगा....।' सिद्दारमैया सरकार ने इस जातीय जनगणना की जिम्मेदारी 2015 में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एच कंठराज की अगुवाई वाली टीम को दी थी।
बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ने फिर से यह बात दोहराई है कि उनकी पार्टी पिछड़े वर्गों की जनगणना कराना चाहती है, ताकि उनकी स्थिति का पता चल सके और उस आधार पर कल्याणकारी योजनाएं शुरू की जा सकें। अब सवाल है कि राहुल भी चाहते हैं, खड़गे भी चाहते हैं, डीके शिवकुमार कहते हैं कि टॉप लीडरशिप जो कहेगा, वही किया जाएगा, मुख्यमंत्री रिपोर्ट नहीं मिलने की बात कहते हैं!
ऐसे में आखिर कर्नाटक की जातीय जनगणना रिपोर्ट की वास्तविक स्थिति क्या है और तकनीकी दिक्कत कितनी बड़ी है कि उसे अबतक दूर नहीं किया जा सका है? और जब कांग्रेस इसके लिए अभी पूरे देश में इतनी उतावली है, तो कर्नाटक में उसकी ओर से उतनी तत्परता क्यों नहीं दिखाई गई? (इनपुट-पीटीआई)












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