आर्मी डे पर हुआ था जन्म, पिता ने कहा सेना के लिए ही दुनिया में आया था बेटा
नई दिल्ली। सिर्फ 23 वर्ष की उम्र इस उम्र के युवाओं में कार, फैंसी स्मार्ट फोन, डिजायनर आउटफिट, दोस्तों के साथ हैंगआउट करने का शौक होता है।
श्रीनगर में शहीद हुए कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल भी इसी तरह के शौक रखते थे लेकिन एक बात जो उन्हें बाकी युवाओं से अलग करती थी, वह थी देश और सेना के लिए उनका जुनून।
श्रीनगर में शहीद हुए कैप्टन पवन और सीआरपीएफ जवान
श्रीनगर में रविवार को कैप्टन पवन आतंकियों से मोर्चा लेते हुए शहीद हो गए। उनकी उम्र सिर्फ 22 वर्ष थी और वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे।
उनकी शहादत के बाद माता-पिता थोड़ा दुखी हैं लेकिन इस दुख में एक गर्व भी झलकता है। उनके पिता ने अपने बेटे की शहादत को सलाम करते हुए कहा है कि कैप्टन का जन्म आर्मी डे पर हुआ था।
देश के लिए जाबांज तैयार करने वाला इंस्टीट्यूट
ऐसे में देश के लिए कुर्बान होना और सेना में शामिल होना उनकी किस्मत में था। जानिए कौन थे कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल और शहादत से पहले उनका फेसबुक पोस्ट क्या था।

आर्मी डे पर होता था जन्म
कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल का जन्म हरियाणा के जींद में 15 जनवरी 1993 में हुआ था। संयोग देखिए जिस दिन आर्मी अपना 'बर्थडे' सेलिब्रेट करती है उसी दिन कैप्टन भी अपना जन्मदिन सेलिब्रेट करते थे।

एनडीए के 123 कोर्स के पासआउट
कैप्टन पवन कुमार नेशनल डिफेंस एकेडमी के 123वें कोर्स से पासआउट थे। उनकी सर्विस को तीन वर्ष हो चुके थे।

अपनी टीम को कर रहे थे लीड
पैराट्रूपर कैप्टन बेनीवाल शनिवार को पुलवामा के पंपोर में अपनी टीम को लीड कर रहे थे तभी आतंकियों की गोली उन्हें लग गई थी। इसके बाद उन्हें श्रीनगर के बादामी बाग स्थित बेस कैंप स्थित आर्मी हास्पिटल लाया गया था। यहां पर रविवार को उनका निधन हो गया।

पिता को बेटे पर नाज
कैप्टन की शहादत को उनके पिता ने भी सलाम किया है। उनके पिता राजबीर सिंह ने कहा कि उनकी सिर्फ एक संतान थी जिसे उन्होंने सेना का समर्पित कर दिया था। आर्मी का हिस्सा बनना वह ऊपर से लिखवाकर कर आया था।

पहले भी दो ऑपरेशंस को कर चुके थे लीड
कैप्टन पवन के पिता ने जानकारी दी कि उनका बेटा इससे पहले भी दो सफल ऑपरेशंस को लीड कर चुका था जहां तीन आतंकियों की मौत हुई थी।

क्या था कैप्टन का आखिर फेसबुक पोस्ट
कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल ने शहीद होने से पहले अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा था, 'किसी को आजादी चाहिए, किसी को आरक्षण। हमें कुछ नहीं चाहिए बस अपनी रजाई।' (फोटो फेसबुक)

पिछले माह ही हुए थे घायल
कैप्टन पवन कुमार बेनीवाल पिछले माह की 20 तारीख यानी अपने बर्थडे के पांच दिन बाद ही आतंकियों के साथ पुलवामा में ही हुई मुठभेड़ में घायल हो गए थे। दो हफ्तों तक उनका इलाज चला और सेना की ओर से उन्हें छुट्टी पर जाने को भी कहा गया था। लेकिन उन्होंने छुट्टी से इंकार कर दिया था।












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