कोरोना वायरस से जंग में कश्मीर की मदद कर सकता है 4जी?
"मैं केंद्र सरकार से ये दरख्वास्त करना चाहता हूँ कि हमारे यहां 3जी और 4जी इंटरनेट सेवाएं शुरू कर दें. ये कहा जा रहा है कि इंटरनेट पर कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जानकारी मौजूद है. लेकिन जब हमारे पास इंटरनेट है ही नहीं तो हम इसका कैसे इस्तेमाल करेंगे?"
ये शब्द अविभाजित जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह के हैं.
अब्दुल्लाह ने बीते मंगलवार लगभग साढ़े सात महीने बाद हिरासत से आज़ाद होकर मीडिया से बात करते हुए इंटरनेट शुरु करने की मांग उठाई.
कोरोना से जंग, 2जी के सहारे
जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जुड़ी ताजी जानकारियां, इससे जुड़े वीडियो आदि देखने के लिए हाई स्पीड इंटरनेट पर निर्भर है तब कश्मीर में लोग धीमी इंटरनेट स्पीड से जूझ रहे हैं.
जम्मू-कश्मीर में अब तक कोरोना वायरस से सात लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है.
घाटी में हर तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगे हुए हैं और लॉकडाउन जारी है.
बीते साल की 5 अगस्त से, जम्मू कश्मीर में हाई स्पीड इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
सरकार ने पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा छीनकर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील कर दिया है.
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद जम्मू-कश्मीर में 2जी इंटरनेट की सेवा बहाल हुई है.
इससे पहले उमर अब्दुल्लाह और राज्य के दो अन्य मुख्यमंत्रियों समेत सैकड़ों नेताओं और उनके समर्थकों को बीती 5 अगस्त को हिरासत में ले लिया गया था.
पत्रकारों की समस्याएं
इसके बाद इंटरनेट की कमी की वजह से जम्मू-कश्मीर में हर किसी का जीवन प्रभावित हुआ है.
एक स्थानीय फ़ोटो जर्नलिस्ट मुख्तियार अहमद बताते हैं, "इन दिनों में हम अपने ऑफिसों तक एक तस्वीर भेजने में संघर्ष कर रहे हैं. क्योंकि हमारे पास हाई स्पीड इंटरनेट नहीं है."
वह कहते हैं, "हर रोज़ हमें अपने दफ़्तर में तस्वीरें भेजनी होती हैं. हर फाइल पांच से छह एमबी की होती है, ऐसे में इन तस्वीरों को भेजने के लिए हाई स्पीड इंटरनेट की ज़रूरत होती है जो कि उपलब्ध नहीं है."
"वीडियो भेजने के साथ भी यही दिक्कत है. सरकार को हाई स्पीड इंटरनेट को रिस्टोर करना चाहिए. प्रशासन की ओर से पत्रकारों के लिए एक मीडिया सेंटर बनाया है. लेकिन कोरोना वायरस के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने की वजह से वहां जाना संभव नहीं हैं. और हम स्वयं भी वहां नहीं जा रहे हैं क्योंकि वो एक काफ़ी भीड़ भरी जगह है. वहां जाकर कोई अपनी लाइफ़ ख़तरे में कैसे डाल सकता है."
एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार हारून रेशी इस मुद्दे पर कहते हैं, "यहां पर इंटरनेट की कमी की वजह से सभी पेशेवर लोग परेशान हैं. अगर हमारे पास हाई स्पीड इंटरनेट होता तो लोग अपने घरों से काम कर लेते. क्योंकि हाई स्पीड इंटरनेट सोशल डिस्टेंसिंग के लिहाज़ से बहुत ज़रूरी है."
कश्मीर का स्वास्थ्य तंत्र भी इंटरनेट की कमी की वजह से परेशान है.
दक्षिणी कश्मीर में काम कर रहे एक डॉक्टर बताते हैं कि इंटरनेट की वजह से उनका काम भी काफ़ी प्रभावित होता है.
वह बताते हैं, "हर रोज़ हमें अपने अधिकारियों को सर्विलेंस रिपोर्ट भेजनी होती है. और इन रिपोर्ट्स को भेजने में एक लंबा समय लग जाता है. और ऐसे माहौल में काम करना काफ़ी तनाव देने वाला होता है जहां हर कोई इंटरनेट की तेज स्पीड के लिए जूझ रहा हो."
2 जी से जूझते डॉक्टर और अस्पताल
कश्मीर डॉक्टर एसोशिएसन के प्रमुख निसार उल हसन कहते हैं कि कोरोना वायरस से जुड़ी जानकारियों को स्थानीय भाषा में प्रसारित किया जाना चाहिए.
इसके साथ ही वीडियो की मदद से ये संदेश प्रसारित किए जाने चाहिए.
हसन कहते हैं, "अगर आपके पास इंटरनेट न हो तब आप लोगों तक जानकारी कैसे पहुंचा सकते हैं. प्रिंट के मुक़ाबले वीडियो बेहतर माध्यम है. लेकिन धीमे इंटरनेट के चलते हम इस माध्यम का उपयोग नहीं कर सकते. दूसरी बात ये है कि हमें बाहरी दुनिया के लोगों से बातचीत करनी होती है. कहीं लाइव सेमिनार तो कहीं विशेषज्ञों की ओर से लाइव चर्चाएं चलती रहती हैं. अगर हमारे पास इंटरनेट होता तो हम ये सब कर पाते. और अब ये मसला वायरस का है और हमें इसके बारे में हर दिन नयी चीज़ सीखनी चाहिए. डॉक्टरों को हर समय तेज इंटरनेट चाहिए. आप हमारा काम फास्ट इंटरनेट के बिना नहीं कर सकते हैं."
घरों में बंद बच्चे और स्कूल टीचर हाई स्पीड इंटरनेट न होने की वजह से घरों से ही अपना काम नहीं कर पा रहे हैं.
फ्रोएबल हाई स्कूल के प्रिंसिपल आर्शिद बाबा कहते हैं, "अगर 4जी इंटरनेट होता तो हम अपना टीचिंग मैटेरियल अपने छात्रों और टीचर्स तक भेज पाते जिससे उनके सीखने और पढ़ाने की आदत बनी रहती."
वे कहते हैं, "सात महीने बाद हमने अपनी कक्षाएं शुरू की थीं. हम इंटरनेट के बिना रह रहे थे. ये समय जो हमने गंवा दिया है, उसकी भरपाई हाई स्पीड इंटरनेट से हो सकती थी. और अब बिलकुल वही बात दोबारा हमारे साथ हो रही है."
छात्रों ने भी हमें हाई स्पीड इंटरनेट न होने की वजह से सामने आने वालीं दुश्वारियों के बारे में बताया.
श्रीनगर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले सैयद फुरकान कहते हैं, "अभी मैं लैब और प्रोग्रामिंग की प्रेक्टिस कर रहा हूँ. ये हाई स्पीड इंटरनेट के बिना संभव नहीं है. हम बीते आठ महीने से मांग कर रहे हैं कि हाई-स्पीड इंटरनेट को बहाल किया जाए, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ है."
बीजेपी की भी मांग नहीं मान रहा गृह मंत्रालय?
बीजेपी समेत अन्य राजनीतिक दलों ने जम्मू-कश्मीर में हाई स्पीड इंटरनेट की तत्काल बहाली की मांग की है.
कश्मीर में बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ़ ठाकुर रहते हैं कि इंटरनेट की कमी के चलते कई सेक्टरों में नुकसान हो रहा है.
उन्होंने कहा, "ये बात सही है कि तेज इंटरनेट के नहीं होने से लोग परेशान हैं. ख़ासकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में इसकी कमी काफ़ी खल रही है. लोगों तक पहुंचने के लिए हाई स्पीड इंटरनेट बहुत ज़रूरी है. सरकार को इंटरनेट शुरू करना चाहिए. मुझे लगता है कि दो तीन दिनों में सरकार हाई स्पीड इंटरनेट शुरू कर सकती है."
नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ फारुख़ अब्दुल्लाह ने कुछ दिनों पहले पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जम्मू-कश्मीर में हाई स्पीड इंटरनेट बहाल करने का आग्रह किया था.
इंटरनेट बहाली पर सरकार ने पहले कहा था कि जम्मू-कश्मीर में हाई-स्पीड इंटरनेट दोबारा शुरू करने का फैसला आगामी 26 मार्च को समीक्षा बैठक के बाद लिया जाएगा.
इंटरनेट को लेकर सरकार ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इंटरनेट पर इस तरह के प्रतिबंधों को जारी रखना "भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने के लिए बेहद ज़रूरी था और इसके साथ ही ये कदम राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा व्यवस्था को चाकचौबंद रखने के उद्देश्य से उठाया गया था."
सरकार ने बीती 5 अगस्त से सोशल मीडिया पर बैन लगाया हुआ था जो कि 4 मार्च 2020 को हटाया गया है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपने हालिया बयान में इंटरनेट प्रतिबंधों की निंदा करते हुए इन्हें दोबारा शुरू करने की मांग उठाई थी.
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