Delhi: दिल्ली शराब नीति में अनियमितताएं, समीक्षा के लिए PAC को भेजी गई CAG रिपोर्ट
Delhi Liquor Policy CAG Report: दिल्ली की शराब नीति पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नीति के क्रियान्वयन में सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ, जिससे कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ मिला।
इस रिपोर्ट को अब दिल्ली विधानसभा की लोक लेखा समिति (PAC) को जांच के लिए सौंप दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि PAC को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। उन्होंने इस घोटाले की गहराई से जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। CAG रिपोर्ट 25 फरवरी को विधानसभा में पेश की गई थी, जिसके बाद इस पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

सरकारी खजाने को हुआ नुकसान
गुप्ता ने कहा कि CAG रिपोर्ट से साफ है कि सरकार को बड़ा वित्तीय नुकसान हुआ है। आरोप है कि इस नीति के कारण कुछ निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ। अब PAC संसदीय प्रक्रिया के तहत इसकी गहराई से जांच करेगी।
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CAG रिपोर्ट को दबाने के आरोप
दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने AAP सरकार पर आरोप लगाया कि वह CAG रिपोर्ट को विधानसभा में पेश होने से रोकने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने कहा कि AAP सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान नहीं करती और जनता की आवाज को दबाने का काम कर रही है।
केजरीवाल सरकार पर BJP का हमला
बीजेपी विधायक ओ.पी. शर्मा ने दावा किया कि शराब घोटाले की रकम 2,000 करोड़ रुपये नहीं बल्कि 20,000 करोड़ रुपये है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोना महामारी के दौरान केजरीवाल सरकार ने इस नीति पर काम किया, जिससे झुग्गी बस्तियों में शराब की उपलब्धता से कई लोगों की जान खतरे में पड़ी।
बीजेपी के हरिश खुराना ने AAP की आबकारी नीति को वित्तीय घोटाला बताया और सवाल किया कि अगर नीति सही थी तो इसे वापस क्यों लिया गया?
AAP ने आरोपों को किया खारिज
AAP विधायक अमानतुल्लाह खान ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उनकी पार्टी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने 2,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले पर सवाल उठाया और कहा कि इसका कोई ठोस आधार नहीं है।
CAG रिपोर्ट में क्या कहा गया?
CAG ऑडिट 2017 से 2021 के बीच की शराब नीति की जांच करता है। रिपोर्ट में सामने आया कि:
- लाइसेंसिंग प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई।
- मूल्य निर्धारण तंत्र में अनियमितताएं थीं।
- नियामक निगरानी कमजोर थी।
- अत्यधिक छूट देने से सरकार को भारी नुकसान हुआ।
PAC करेगी गहन जांच
विधानसभा अध्यक्ष गुप्ता ने आबकारी विभाग को आदेश दिया है कि वे एक महीने के भीतर रिपोर्ट पर अपने जवाब दें।PAC की विस्तृत जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और नेताओं पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
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