किसानों को केंद्र सरकार ने दिया तोहफा, गेहूं की MSP में 150 रुपए की बढ़ोतरी, सरसों-चने के दामों में इजाफा
किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दिवाली पर किसानों को एक बड़ा तोहफा दिया है। जी हां...सरकार ने विपणन सीजन 2024-25 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि को मंजूरी दे दी है।
सरकार ने विपणन सीजन 2024-25 के लिए रबी फसलों के एमएसपी में वृद्धि की है, ताकि किसानों को उनकी उपज के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जा सके। एमएसपी में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दाल (मसूर) के लिए 425 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है।

इसके साथ ही, रेपसीड एवं सरसों के लिए 200 रुपये प्रति क्विंटल की मंजूरी दी गई है। गेहूं और कुसुम में से प्रत्येक के लिए 150 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है। जौ और चने के लिए 115 रुपये और 105 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है।
बता दें, गेहूं के लिए MSP में 150 रुपये प्रति क्विंटल की वृद् होने से नई दर 2,425 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है, जो पिछली 2,275 रुपये थी। इस बढ़ोतरी से विशेष रूप से भारत के उत्तरी क्षेत्रों में गेहूं किसानों को लाभ होने की उम्मीद है, जहां गेहूं मुख्य रूप से उगाया जाता है।
गेहूं के अलावा सरसों और चना के एमएसपी में भी बढ़ोत्तरी की है। कैबिनेट ने सरसों के लिए एमएसपी में 300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बढ़ाया है, जिसके बाद सरसों का एमएसपी 5,950 रुपये हो गया है। सरसों की खेती मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में की जाती है।
इस बढ़ोतरी का उद्देश्य किसानों को बेहतर आय प्रदान करना और सरसों की खेती को बढ़ावा देना है। इसी तरह, चना, जो एक प्रमुख दलहन फसल है, के लिए एमएसपी में 210 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, जिससे यह 5,650 रुपये हो गया है। चना पूरे देश में बड़े पैमाने पर खाया जाता है और यह भारतीय आहार में प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
एमएसपी में इस बढ़ोतरी से दालों के उत्पादन को बढ़ावा मिलने और किसानों को बेहतर वित्तीय लाभ मिलने की उम्मीद है, खासकर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में। इतना ही नहीं, सरकार खाद्य सुरक्षा बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए तिलहन, दलहन और श्रीअन्न/मोटे अनाजों की ऊपज बढ़ाने के क्रम में फसल विविधीकरण को बढ़ावा दे रही है।












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