CAA Rules: लोकसभा चुनावों से पहले एक और 'खेला'! नागरिकता मांगने वालों को मिल सकती है बड़ी राहत
CAA Act in Hindi: लोकसभा चुनावों की तारीखों के एलान से पहले नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर अमल शुरू करने की तैयारी कर ली गई है। सीएए नियम जल्द ही अधिसूचित होने वाले हैं।
नागरिकता संशोधन अधिनियम पर नियमों के अधिसूचित होने का मतलब ये है कि अब इस कानून के दायरे में आने वाले अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता मिलना शुरू हो जाएगा।

- सीएए नियमों को जल्द अधिसूचित करने की तैयारी।
- लोकसभा चुनावों से पहले शुरू हो सकता है नागरिकता देने का काम।
- 31 दिसंबर,2014 का कट-ऑफ डेट भी बढ़ाया जा सकता है।
- पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को मिलेगी नागरिकता।
सीएए के तहत अब नागरिकता देने की बारी
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जैसे ही सरकार यह नियम लागू करेगी एक विशेष पोर्टल के जरिए योग्य दावेदार भारतीय नागरिकता पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन दे सकेंगे। इनका कहना है कि ये नियम लंबे समय से लंबित पड़े हुए हैं, लेकिन अब यह जल्द अमल में लाए जा सकते हैं।
नियम अधिसूचित नहीं होने की वजह से नागरिकता देने की प्रक्रिया नहीं शुरू हुई
नागरिकता संशोधन अधिनियम दिसंबर, 2019 में संसद से पास हो गया था और उसपर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी हो गए थे। अगले ही महीने यानी 10 जनवरी, 2020 को इसे लागू भी कर दिया गया था।
लेकिन, इसके संबंध में नियम अधिसूचित नहीं किए जाने की वजह से तीन देशों से प्रताड़ित होकर भारत आए धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।
सीएए के विरोध में हो चुका है बवाल
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में देश बहुत भयंकर बवाल देख चुका है। इसके विरोध की आग इस कदर भड़की थी कि दिल्ली में सांप्रदायिक दंगे भी शुरू हो गए थे। बाद में कोविड महामारी शुरू हुई और किसी तरह से विरोध-प्रदर्शनों पर लगा।
सीएए के तहत किन्हें मिलेगी भारतीय नागरिकता
नागरिकता संशोधन अधिनियम अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने के लिए बनाया गया है।
कट-ऑफ डेट भी बढ़ाया जा सकता है
अभी जो प्रावधान किया गया है, उसके तहत संबंधित आधार पर भारतीय नागरिकता पाने के लिए 31 दिसंबर, 2014 को कट-ऑफ डेट तय किया गया है।
यानी सिर्फ उन्हीं पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से प्रताड़ित होकर भारत में शरण लेने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता दी जानी है, जो कट-ऑफ डेट से पहले आ चुके हैं।
लेकिन, जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार इस कट-ऑफ डेट को बढ़ा भी सकती है। इसका मतलब होगा कि तीनों देशों से भारत आए कुछ और धार्मिक अल्पसंख्यक भारतीय नागरिकता पाने के हकदार बन जाएंगे।
ऑनलाइन पोर्टल से आवेदन करना होगा आसान
एक अधिकारी के अनुसार, 'ऑनलाइन पोर्टल उन लोगों को बिना किसी बाधा के नागरिकता संशोधन कानून के तहत आवेदन करने में सहायता करेगा और भ्रष्टाचार को मिटाएगा जैसा कि लॉन्ग-टर्म वीजा के कई मामलों में देखा गया है।'
किसी भारतीय नागरिक का कोई भी अधिकार नहीं छीनता सीएए
उस अधिकारी ने यह भी बताया कि 'यह कानून भारतीय नागरिकों पर लागू नहीं होता। यह किसी भी तरह से किसी भी भारतीय नागरिक के अधिकारों को नहीं छीनता है। नागरिकता अधिनियम, 1955 में दी गई किसी भी श्रेणी के किसी भी विदेशी की ओर से भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की मौजूदा कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह जारी है और सीएए इस कानूनी स्थिति में संशोधन या बदलाव नहीं करता है।'












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