Hit And Run Law: नए कानून से क्यों डर गए हैं ट्रक वाले, इसमें कोई खामी है या बात कुछ और है? जानिए
Hit And Run new law: ट्रक वालों की ओर से 'स्टीयरिंग छोड़ो आंदोलन' के एलान से नए साल की शुरुआत में ही एक बड़े संकट की आहट ने देशभर के लोगों को चौकन्ना कर दिया था। मन में पहला सवाल यही उठा कि हिट एंड रन की घटनाओं को रोकने के लिए सख्ती तो जरूरी है, फिर विरोध क्यों?
हालांकि, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) की ओर से दिसंबर के अंत में ही हिट एंड रन दुर्घटनाओं पर नए कानून (भारतीय न्याय संहिता) के कुछ बिंदुओं पर पुनर्विचार के अनुरोध के साथ केंद्र सरकार को एक चिट्ठी भेजी गई थी।

हिट एंड रन में सख्त सजा पर पुनर्विचार की मांग
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने यह चिट्ठी हिट एंड रन दुर्घटनाओं के मामले में अधिकतम 10 साल की सजा और 7 लाख रुपए जुर्माने पर फिर से गौर करने के लिए लिखी थी। हालांकि, एआईएमटीसी ने ट्रक वालों से सरकार के जवाब तक धीरज रखने को कहा था, लेकिन उन्होंने इसे अनसुना करके हड़ताल शुरू कर दी थी।
ट्रक वालों को डर क्यों है?
नए कानून से ट्रक वालों और उनके संगठनों को एक डर इस बात का है कि खासकर हाइवे पर होने वाली ऐसे दुर्घटनाओं के मामले में पुलिस ठीक से जांच करती है। वह बहुत आसानी से सारा दोष ट्रक ड्राइवरों पर डाल देती है।
ऐसी घटनाओं की जांच के लिए किसी खास प्रक्रिया (SOP) का भी अभाव है। उन्हें यह भी डर है कि अगर ड्राइवर घटना की रिपोर्ट करने के लिए वहां रुकेंगे तो स्थानीय गुस्साई भीड़ उनपर हमला कर सकती है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि नया कानून यह नहीं कहता है कि दुर्घनास्थल से ही रिपोर्ट करना जरूरी है। वह दूसरी जगह से भी हादसे की जानकारी दर्ज करवा सकते हैं।
ट्रांसपोर्ट संगठनों को इस बात का भी डर सता रहा है कि 10 साल की सजा का मतलब है कि लोग इस सेक्टर में आने से और भी हिचकिचाने लगेंगे। क्योंकि, जानकारी के मुताबिक इस क्षेत्र में पहले से ही ड्राइवरों की 27% किल्लत है।
क्या हिट एंड रन कानून में खामियां हैं?
ट्रक वालों की सारी चिंताएं बेवजह नहीं हैं, लेकिन हिट एंड रन दुर्घटनाओं के खिलाफ आए सख्त कानून को दोष नहीं दिया जा सकता। देश को ऐसे कानून की बहुत ही सख्त आवश्यकता थी। सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें भारत में ही होती हैं।
साल 2022 में देश में सिर्फ हिट एंड रन दुर्घटनाओं में करीब 59,000 लोगों की जान चली गई। सड़क हादसों में उस साल हुई कुल मौतों का यह 30% है। उस साल महाराष्ट्र में ही हर घंटे एक व्यक्ति की मौत हाइवे हादसों में हुई। 2021 के मुकाबले इसमें 14% की बढ़ोतरी हो गई।
भारत में लापरवाही से ड्राइविंग बहुत बड़ी महामारी बन चुकी है। कम उम्र के लोगों की ड्राइविंग और रॉन्ग साइड ड्राइविंग तो नासूर बन चुका है, जिसपर लगाम नहीं लग पा रहा है।
इनकी वजह से आए दिन हादसे होते रहते हैं, लेकिन ना तो प्रशासन इन्हें पूरी तरह से रोकने में सफल हो पाया है और ना ही लोगों में ही उस स्तर की समझदारी और जागरूकता पैदा हो पा रही है।
सड़क दुर्घटनाओं के कुछ और भी हैं वजहें
अगर ट्रक वालों को यह डर सता रहा है कि वह दूसरों की लापरवाहियों की वजह से फंस सकते हैं तो पुलिस के रवैए पर उठने वाले सवाल भी पूरी तरह से खारिज नहीं किए जा सकते। लेकिन, तथ्य ये है कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए कुछ और वजहें भी जिम्मेदार माने जा सकते हैं।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कुछ वर्ष पहले टीओआई को दिए एक इंटरव्यू में सड़क दुर्घटनाओं और उसमें होने वाली मौतों के लिए सड़क निर्माण में इंजनीयरिंग की खामी, डीपीआर में गड़बड़ी, सड़क जंक्शनों की डिजाइनिंग में झोल, संकेतकों और सड़क चिन्हों की अपर्याप्तता को प्रमुख कारण बताया था।
हालांकि, भारत सरकार के दखल के बाद ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल वापस ले ली गई है। सरकार ने फिलहाल यह भरोसा दिया है कि नया कानून लागू करने से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा की जाएगी।












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