CAA: प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार छात्रों की रिहाई के लिए याचिका दायर
नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जिस तरह से दिल्ली के कई इलाकों में उग्र प्रदर्शन हुआ, उसके बाद पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमे मांग की गई है कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि पुलिस ने जिन छात्रों और स्थानीय लोगों को गिरफ्तार किया है उन्हें रिहा किया जाए। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स ने लोगों के बीच हिंसा को भड़काया। लिहाजा इस हिंसा के दौरान जो लोग घायल हुए हैं उन्हें मुफ्त में मेडिकल सेवा और मुआवजा मुहैया कराया जाए।

उग्र प्रदर्शन
बता दें कि नागरिकता कानून के खिलाफ दिल्ली के जामिया इलाके में काफी उग्र प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया गया। यही नहीं आज एक बार फिर से दिल्ली के जाफराबाद और सीलमपुर इलाके में नागरिकता कानून के खिलाफ हिंसा भड़क गई, जिसमे कई पुलिसवालें चोटिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। उपद्रवियों ने डीटीसी की 3 बसों में तोड़फोड़ की, वहीं पुलिस की एक मोटरसाइकिल में आग लगा दी है। जवाब में पुलिस ने भीड़ को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े हैं।
पुलिसबल तैनात
इलाके में भारी संख्या में पुलिसबल की तैनाती कर दी गई है। वहीं सीलमपुर में हिंसा पर दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर आलोक कुमार ने कहा कि 'एक भी गोली नहीं छोड़ी गई है। केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया है। स्थिति काबू में है, कुछ पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। 2 सार्वजनिक परिवहन की बसें, 1 रैपिड ऐक्शन फोर्स की बस और कुछ बाइकों को नुकसान पहुंचाया गया है।
संसद में पास हुआ बिल
गौरतलब है कि पूर्वोत्तर राज्यों व असम में नागरिकता संशोधन एक्ट के पास होने के बाद प्रदर्शन काफी उग्र हो गया है। इस बिल को संसद में पास करने के बाद राष्ट्रपति ने 12 दिसंबर को इसे अपनी मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद से यह कानून बन गया था। गौरतलब है कि इस एक्ट में हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी धर्म के उन लोगों को नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है जोकि अफगानिस्तान, पाकिस्तान या बांग्लादेश के नागरिक हैं और इनका इनके देश में धर्म के आधार पर उत्पीड़न हुआ है।












Click it and Unblock the Notifications