Budget 2025 Income Tax: केंद्रीय बजट में आयकर छूट सीमा क्या होने की उम्मीद? करदाताओं की कितनी राहत?
Budget 2025 Income Tax: केंद्रीय बजट 2025 की घोषणा से पहले देशभर में आयकर सुधारों को लेकर चर्चा जोरों पर है। करदाताओं को इस बजट से ऐतिहासिक राहत मिलने की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना आठवां बजट पेश करेंगी, जो मोदी 3.0 सरकार का दूसरा पूर्ण बजट होगा।
आयकर स्लैब में बदलाव की संभावना
सरकार 1961 के आयकर अधिनियम की जगह नया आयकर विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इस कदम का उद्देश्य कर कानूनों को सरल और सुलभ बनाना है। करदाताओं के लिए नई कर प्रणाली के तहत छूट सीमा बढ़ाने और विभिन्न कर छूटों में संशोधन की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
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आयकर छूट सीमा
- वर्तमान ₹2.5 लाख की छूट सीमा को बढ़ाकर ₹3 लाख किया जा सकता है।
- विशेषज्ञों के अनुसार, इससे लगभग 6 करोड़ करदाताओं को फायदा होगा।
धारा 80C में वृद्धि
- निवेश पर कर छूट की सीमा को ₹2.5 लाख तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।
- इससे करदाताओं को ₹25,000 करोड़ की बचत का लाभ मिल सकता है।
धारा 24(b) के तहत आवास ऋण
- ब्याज छूट की सीमा ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹3 लाख करने पर विचार किया जा रहा है।
- रियल एस्टेट क्षेत्र ने इसे ₹5 लाख तक बढ़ाने की मांग की है।
छोटे व्यवसायों और प्रोफेशनल्स के लिए राहत
छोटे व्यवसायों और प्रोफेशनल्स को ध्यान में रखते हुए धारा 44AD और 44ADA के तहत अनुमानित कराधान की टर्नओवर सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव है। यह MSME क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन देगा।
महंगाई के अनुसार कर समायोजन
- पूर्व केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) अध्यक्ष जे.बी. मोहपात्रा ने सुझाव दिया है कि महंगाई को ध्यान में रखते हुए आयकर छूट सीमा समायोजित की जाए।
- बैंक जमा पर कर में कटौती की जाए।
- उद्योग जगत की उम्मीदें
कॉरपोरेट कर राहत
उद्योग जगत ने व्यक्तिगत आयकर में कमी और कॉरपोरेट कर भार न बढ़ाने की मांग की है।
रियल एस्टेट क्षेत्र
- प्रोत्साहन उपायों से उपभोक्ता क्रय शक्ति में वृद्धि की उम्मीद है।
- बजट में उच्च विकास दर और उपभोक्ता खर्च बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है।
निर्मला सीतारमण का आठवां बजट भाषण
यह बजट सीतारमण के लिए खास है क्योंकि यह उनके द्वारा पेश किया जाने वाला आठवां बजट है। इससे पहले उन्होंने 6 वार्षिक और 2 अंतरिम बजट प्रस्तुत किए हैं।
आम जनता और उद्योगों के लिए संभावित लाभ
- करदाताओं की बचत: नए कर प्रस्तावों से करदाताओं को सालाना ₹25,000 करोड़ की बचत होगी।
- MSME सेक्टर को राहत: ₹5,000 करोड़ की अतिरिक्त बचत की संभावना।
- उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी: प्रस्तावित उपायों से उपभोक्ता खर्च और निवेश में तेजी आएगी।
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