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Lok Sabha Election 2024: कांग्रेस के लिए क्यों जी का जंजाल बन सकता है 'श्वेत पत्र'?

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ऐसी तैयारी में जुटी है, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। गुरुवार को बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2014 में मोदी सरकार बनने से पहले देश की अर्थव्यवस्था के हालात पर संसद में श्वेत पत्र रखने की बात कही है।

वित्त मंत्री के मुताबिक, 'सिर्फ उन वर्षों के कुप्रबंधन से सबक लेने के मकसद से अब ये देखना उचित है कि हम 2014 से पहले कहां थे और अब कहां हैं...।' मोदी सरकार ऐसे समय में उस दौर की वास्तविकता सामने रखने की बात कह रही, जिसे वह देश के लिए 'अमृतकाल' कह रही है।

white paper on economy

वित्त वर्ष 2025 के लिए जीडीपी विकास दर 7.3% अनुमानित
मोदी सरकार के मुताबिक देश उस दौर (यूपीए के कार्यकाल) के संकट से अब उबर चुका है। देश की अर्थव्यवस्था अब सर्वांगीण विकास के साथ उच्च सतत विकास के पथ पर मजबूती के साथ स्थापित हो चुकी है। वित्त वर्ष 2025 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी विकास दर अब 7.3% अनुमानित है।

2014 में सरकार बनने के बाद से ही 'श्वेत पत्र' लाने का था दबाव
दरअसल, जब 2014 में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में देश में एनडीए की सरकार बनी थी, तभी उसपर पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में श्वेत पत्र लाने का दवाब बन रहा था। लेकिन, तब मोदी सरकार ने इन मागों को दरकिनार कर दिया था।

इस वजह से तब 'श्वेत पत्र' लाने से बचती रही सरकार
तब सरकार ने देश की खराब वित्तीय स्थिति और बैड लोन के बोझ से दबे सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों की चिंता की वजह से ऐसा नहीं किया। तब शायद सरकार को लगा कि इस स्थिति का सार्वजनिक होना, देश की अंतरराष्ट्रीय छवि के लिए सही नहीं होगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर और भी विपरीत असर पड़ने की आशंका थी।

तब मोदी सरकार के समर्थकों में उसके इस फैसले से नाखुशी की भावना पैदा हुई कि कांग्रेस को उसकी गलितियां उजागर होने से बचा लिया गया है। अलबत्ता स्वाभाविक तौर पर कांग्रेस यह मानने के लिए तैयार नहीं थी कि उसकी सरकार ने अर्थव्यवस्था को कथित तौर पर चौपट करके छोड़ा था।

चुनाव से पहले 'श्वेत पत्र' लाना सरकार के लिए हो सकता है फायदेमंद
लेकिन, लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के आत्मविश्वास के साथ आम चुनावों के लिए तैयार मोदी सरकार के लिए अब 10 साल पहले यूपीए सरकार के दौरान देश की अर्थव्यवस्था और मौजूदा अर्थव्यस्था की तुलना करना ज्यादा फायदेमंद लग रहा है।

लोकसभा चुनावों से पहले लाया जा सकता है 'श्वेत पत्र'
हालांकि, वित्त मंत्री ने 2014 से पहले अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन पर संसद में श्वेत पत्र पेश करने की बात तो कही है, लेकिन इसके लिए कोई टाइमलाइन नहीं रखी है। लेकिन, माना जा रहा है कि यह लोकसभा चुनावों से पहले ही पेश किया जा सकता है।

10 साल पहले की तुलना में कहीं बेहतर स्थिति में है अर्थव्यवस्था
इसमें किसी तरह की दुविधा की बात नहीं हो सकती कि देश की अर्थव्यवस्था एक दशक पहले जहां थी और अभी जहां है, उसमें आकाश और पाताल का अंतर है। बैंकों की सेहत सुधारने के लिए मोदी सरकार ने कई तरह के सुधार किए हैं। आज अर्थव्यवस्था पटरी पर है और निवेशकों का इसमें विश्वास कायम हुआ है।

बजट के ढांचे में भी हुआ है बदलाव
बीते 10 वर्षों में बजट को सही और घाटे को कम दिखाने के लिए सीमा से नीचे सब्सिडी की परंपरा को खत्म करने के कोशिशें की गई हैं। मोदी सरकार ने विकास को बढ़ावा देने के लिए यूपीए सरकार की तुलना में बुनियादी ढांचे पर खर्च और पूंजीगत व्यय बढ़ा दिया है और राजकोषीय एकीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।

सबसे तेजी से विकसित हो रही विशाल अर्थव्यवस्था है भारत
तथ्य ये है कि आज भारतीय अर्थव्यवस्था 'नाजुक पांच' से निकलकर दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रही बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुकी है। पूरे देश के बुनियादी ढांचे में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। सामाजिक क्षेत्र की बात करें तो करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकल चुके हैं।

एक समय में देश में डिजिटल लेन-जेन असंभव लगता है और आज दुनिया भारत से सीखने को मजबूर हुई है। टेक्नोलॉजी ने गांव-गांव तक को एक सूत्र में पिरोने का काम किया है।

2030 तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य
आज दुनिया की कई विकसित अर्थव्यवस्था का भी आर्थिक विकास पिछड़ता नजर आ रहा है, जबकि भारत के लिए अनुमान है कि इसकी अर्थव्यवस्था अगले कुछ वर्षों तक 7% से अधिक की रफ्तार से बढ़ने वाली है। देश 2030 तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है।

'श्वेत पत्र' या कांग्रेस का 'संकट'काल?
ऐसे में अगर मोदी सरकार ने देश की मौजूदा अर्थव्यवस्था के सामने यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान की अर्थव्यस्था का वास्तविक लेखा-जोखा 'श्वेत पत्र' के रूप में सामने रखा तो कांग्रेस के लिए चुनाव से पहले एक नया 'संकट'काल पैदा हो सकता है।

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