बीआरएस विधायक कविता ने निकाय चुनाव से पहले जातिगत जनगणना की मांग की

बीआरएस विधायक कविता ने मांग की है कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले प्रदेश में जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि पिछड़े वर्ग को 42 फीसदी का आरक्षण मिलना चाहिए। कविता ने कहा कि कांग्रेस सरकार को जातिगत जनगणना को छह महीने के भीतर कराना चाहिए, जैसा कि चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया गया था।

बिहार में जातिगत जनगणना हो चुकी है, लेकिन कानूनी वजह से इसे लागू नहीं किया जा सका, लिहाजा राज्य सरकार को स्पेशल प्लान के साथ इस जनगणना को कराना चाहिए। कांग्रेस सरकार को दो महीने हो चुके हैं लेकिन बावजूद इसके जातिगत जनगणना की शुरुआत नहीं हुई।

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कविता ने कांग्रेस को याद दिलाया कि अगर स्थानीय निकाय चुनावों में 42 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाता है, तो लगभग 24000 नए बीसी एमपीटीसी, सरपंच, पार्षद, नगरसेवक और जेडपीटीसी बन जाएंगे। लिहाजा इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्य सरकार को इसके लिए प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

बीआरएस विधायक ने कहा कि सरकार ने 2024-25 के बजट में बीसी के कल्याण के लिए 20000 करोड़ रुपये आवंटित करे और बीसी उप-योजना को वैधता प्रदान करे। उन्होंने सरकार से एमबीसी के लिए एक अलग मंत्रालय स्थापित करने और जनगांव जिले का नाम सरदार सरवई पपन्ना गौड़ जिला रखने की भी मांग की।

कविता ने कहा कि सरकार को 11 अप्रैल से पहले विधानसभा परिसर में महात्मा ज्योति राव फुले की प्रतिमा की मांग पर घोषणा करनी चाहिए।

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