इंसानी दिमाग को पढ़ने वाली एक खास Brain Chip, जो इन लोगों की जिंदगी बदल देगी
नई दिल्ली। कंप्यूटर और मोबाइल जैसे डिवाइस के डाटा को हमें याद करने की जरूरत नहीं पड़ती है, क्योंकि इन्हें सेव करने के लिए हमारे डिवाइस में व्यवस्था होती है। इसी तरह इंसान के दिमाग में भी पुरानी और नई कई तरह की मेमोरी होती है। आम भाषा में कहें तो हमारे दिमाग में ऐसी बहुत सी जानकारी होती है, जो नई के साथ साथ पुरानी भी होती है। इनमें कई अच्छी और बुरी यादें शामिल होती हैं। लेकिन इनमें से हम कुछ ही बातें जीवनभर याद रख पाते हैं, वहीं कई बातें या फिर कहें जानकारी ऐसी होती हैं, जो वक्त के साथ साथ हमारे मस्तिष्क से ओझल हो जाती हैं। हालांकि भविष्य में अब इसे लेकर भी उम्मीद की कुछ किरण नजर आ रही है।

इंसानी दिमाग को पढ़ने वाली चिप
विकसित होती तकनीक में दिमाग की मेमोरी को सेव करने पर भी काम चल रहा है। इसका मतलब ये हुआ कि भविष्य में हम अपने दिमाग की जानकारी को भी बिल्कुल वैसे ही सेव कर सकते हैं, जैसे कंप्यूटर या मोबाइल में मौजूद डाटा को सेव कर सकते हैं। इसके लिए खास तरह की चिप पर काम चल रहा है। दरअसल स्पेसएक्स और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक बीते कुछ वर्षों से इंसानी दिमाग को पढ़ने वाली चिप पर काम कर रही है। अभी कंपनी ने इस चिप का इस्तेमाल सूअरों के दिमाग में किया है। कंपनी ने सिक्के के आकार की चिप को तीन सूअरों के दिमाग में लगाया है। जिससे पता लगाया जा रहा है कि चिप में कितनी सफलता मिली है।

सेव हो पाएगी दिमाग की मेमोरी
एलन मस्क का कहना है कि उन्हें इस बात की उम्मीद है कि भविष्य में लोग ब्रेन चिप की सहायता से अपनी मेमोरी को ना केवल सेव कर पाएंगे बल्कि उसे रिप्ले भी कर पाएंगे। उनका कहना है कि यह ब्लैक मिरर एपिसोड की तरह होगा। न्यूरालिंक नामक इस कंपनी की स्थापना करीब चार साल पहले साल 2016 में हुई थी। जिसका उद्देश्य इंसान के दिमाग को पढ़ना है। वो भी बिना किसी वायर की जरूरत के। चिप का लाभ उन लोगों को होगा जो अल्जाइमर जैसी बीमारी से पीड़ित हैं।

कई परेशानियां होंगी हल
एलन मस्क ने इस बारे में कहा है कि 'इस तरह का प्रत्यारोपित डिवाइस असल में मेमोरी लॉस, अवसाद, अनिद्रा और सुनने की क्षमता में कमी जैसी परेशानियों को हल कर सकता है।' इसके साथ ही उनका ये भी मानना है कि इस चिप के प्रत्यारोपित करने से जो लोग पैरलाइज्ड हैं, वो भी तकनीक का इस्तेमाल कर पाएंगे, जैसे स्मार्टफोन आदि। इसके लिए बस उन्हें सोचने-विचारने की जरूरत होगी। फिलहाल चिप को तीन सूअरों पर करीब दो माह पहले लगाया गया था, जिसकी सफलता दर 87 फीसदी रही है।

विज्ञान और सुरक्षा महत्वपूर्ण
इंसानों के लिए चिप तैयार होने के बाद ऐसा हो सकता है कि इसे कान के पीछे लगाया जाए और ये दूसरे डिवाइस से कनेक्ट हो जाए। जिससे इंसान अपने दिमाग की जानकारी सीधा अपने स्मार्टफोन पर पा सकेंगे। अगर ये आने वाले कुछ वर्षों में संभव हो पाता है तो बहुत से लोगों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं होगा। एक चिप कई तरह की समस्याओं का निदान कर पाएगी। कंपनी का कहना है कि इस डिवाइस में विज्ञान के साथ साथ सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।












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