ब्रह्मोस मिसाइल का लाइफ एक्सटेंशन टेक्नोलॉजी के साथ सफल परीक्षण, डीआरडीओ के हिस्से आई एक उपलब्धि
सोमवार को भारत ने ओडिशा के तट पर भारत-रूस के ज्वाइॅन्ट वेंचर के तहत बनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल को इस बार कुछ नए फीचर्स के साथ टेस्ट किया गया है।
भुवनेश्वर। सोमवार को भारत ने ओडिशा के तट पर भारत-रूस के ज्वाइॅन्ट वेंचर के तहत बनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल को इस बार कुछ नए फीचर्स के साथ टेस्ट किया गया है। मिसाइल सोमवार को बालासोर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) के लॉन्च पैड 3 से सुबह 10 बजकर 40 मिनट पर फायर की गई थी, डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) की ओर से इस बात की जानकारी दी गई।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई
डीआरडीओ के एक अधिकारी की ओर से जानकारी दी गई है कि इस ट्रायल को मिसाइल की लाइफ एक्सटेंशन टेक्नोलॉजी का परखने के लिए अंजाम दिया गया। भारत में डीआरडीओ और ब्रह्मोस की टीम की ओर से पहली बार इस टेक्नोलॉजी को डेवलप किया गया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और ब्रह्मोस की टीम को बधाई दी है। ब्रह्मोस मिसाइल का यह सफल टेस्ट सेनाओं में मिसाइल रिप्लेसमेंट में आने वाली एक बड़ी लागत को बचाएगा। यह टू-स्टेज मिसाइल है जिसमें पहला सॉलिड और दूसरा रैमजेट लिक्विड प्रॉपेलैंट वाला है। इस मिसाइल को पहले ही इंडियन आर्मी और नेवी में शामिल किया जा चुका है। जबकि एयरफोर्स के लिए इसके वर्जन का सफल टेस्ट हो चुका है।
हर परीक्षण में सफल ब्रह्मोस
ब्रह्मोस मिसाइल को जमीन, हवा और समंदर के अलावा समंदर के नीचे से भी लॉन्च किया जा सकता है। भारत ने दुनिया की इस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को सबसे तेज फाइटर जेट सुखोई-30 एमकेआई के साथ भी टेस्ट किया है। इस टेस्ट में नवंबर 2017 में बंगाल की खाड़ी में सुखोई के साथ ब्रह्मोस मिसाइल ने अपने टारगेट को सफलतापूर्वक भेदा था।मिसाइल के जमीन और समंदर वाले संस्करण पहले ही प्रयोग में हैं। जबकि सुखोई-30 की कम से कम दो स्क्वाड्रन को इन मिसाइलों से लैस करने की योजना बनाई गई है। एक स्क्वाड्रन के 20 जेट्स को इस मिसाइल से लैस किया जाएगा। ब्रह्मोस का जो संस्करण एयरफोर्स के लिए है वह बाकी के दोनों संस्करणों से 500 ग्राम हल्का है।












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