सर्वे: तो अब पढ़ने में पिछड़े ब्राह्मण स्टुडेंट्स
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) क्या अब पढ़ने-लिखने में पिछड़ने लगे हैं ब्राह्मण? कहने वाले तो कह रहे हैं। वे अपने अनौपचारिक सर्वे से इस दावे को साबित भी कर रहे हैं। उनका मानना है कि अब गैर-ब्राह्मण जातियों के बच्चे स्कूलों में बेहतर अंक ले रहे हैं।
नोएडा का स्कूल
जनसत्ता के पूर्व स्थानीय संपादक शंभूनाथ शुक्ल ने बताया कि वे पिछले दिनों नोएडा के एक पब्लिक स्कूल में गए। उसके बाद स्कूल का नोटिस बोर्ड देखने लगे जिस पर इस साल 12वीं की परीक्षा में 90 से ऊपर मार्क्स पाए छात्रों का अभिनन्दन करते हुए उनके नाम दर्ज़ थे। [जानिये वो बातें जो हर टीचर अपनी क्लास में कहता है]
कहां गई मेधा
उन्हें हैरानी हुई कि अपने ज्ञान और मेधा पर इतराने वाले ब्राह्मणों के किसी बच्चे का नाम नहीं था उक्त सूची में। जिन 40 बच्चों के नाम थे उनमें से 10 अग्रवाल, सिंघल, मित्तल, गोयल आदि थे। पांच साउथ इंडियन थे। पांच ही नार्थ इंडियनऔर इतने ही क्रिश्चियन। 8 पंजाबी, दो मुस्लिम, एक यादव, दो धीमान तथा एक बंगाली व एक महाराष्ट्रियन था।
बंद करो विरोध
ब्राह्मण किस बिना पर आरक्षण का विरोध करते हुए कहते हैं कि आरक्षण से मेधा नष्ट हो रही है। कुछ नाराज होते हुए शुक्ल कहते हैं कि अरे मूर्खो तुम्हारे अंदर मेधा या प्रतिभा है कहाँ! तुम्हें तो चिल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।
कल्पित सरनेम
हो सकता है ब्राह्मण अपनी जाति न लिख कर भारती, विश्वास जैसे कल्पित सरनेम लगा ले। पर वह कभी दूसरी जाति का सरनेम नहीं लगाता। नोटिस बोर्ड में सरे 40 बच्चों के सरनेम लिखे थे और किसी के नाम के आगे शुक्ल,मिश्र, वाजपेयी, शर्मा या तिवारी अदि नहीं लिखा था।
ब्राह्मणत्व की हो बात
उधर, हिन्दी के वरिष्ठ लेखक प्रताप सहगल को लगता है की ब्राह्मण की जगह ब्राह्मणत्व की बात हो तो अच्छा है। जो व्यक्ति इन गुणों से पूर्ण हो वही ब्राह्मण कहलाने का सही अधिकारी है।हर जाति हर समाज में मेधावी लोग हैं।नजरिये का फर्क है बस।
उधर, राजधानी के सेंट लारेंस स्कूल के चेयरमेन गिरिश मित्तल कहते हैं कि अब सभी धर्मों और जातियों के स्टुडेंट्स जमकर पढ़ रहे हैं। सब बेहतर करने की ख्वाहिश रखते हैं। अब कम से कम मेट्रो शहरों में तो जाति लुप्त हो रही है।













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