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Brahmaputra River Twin Tunnel: ब्रह्मपुत्र नदी में बन रही भारत की पहली रोड और रेल टनल, कितनी है लागत?

Brahmaputra River Twin Tunnel: पूर्वोत्तर के राज्यों का मुखद्वार असम भारत की भविष्य की महत्वाकांक्षाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से प्रदेश की कनेक्टिविटी और इन्फ्रास्ट्रक्चर दोनों ही अहम है। इसे देखते हुए कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसी कड़ी में गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली भारत की पहली ट्विन-ट्यूब रोड-कम-रेल सुरंग को जनवरी 2026 में औपचारिक मंजूरी मिल गई है।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना आम यात्रियों के साथ ही सेना के लिए भी सफर करने के लिहाज से समय बचाने वाला रूट साबित होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है। इस परियोजना के तहत ब्रह्मपुत्र के सबसे गहरे तल से लगभग 32 मीटर नीचे एक ट्विन-ट्यूब सुरंग बनाई जाएगी।

Brahmaputra River Twin Tunnel

Brahmaputra River Twin Tunnel: जबरदस्त है इस रोड-रेल टनल की क्षमता

- ब्रह्मपुत्र के सबसे गहरे तल से लगभग 32 मीटर नीचे एक ट्विन-ट्यूब सुरंग का निर्माण रणनीतिक और सामरिक क्षमता के अलावा आम यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

- इसमें एक ट्यूब में दो लेन की सड़क होगी, जबकि दूसरी ट्यूब में एकल रेल ट्रैक (इलेक्ट्रिफाइड बैलास्टलेस ट्रैक) बिछाया जाएगा।

- सुरंग की मुख्य लंबाई करीब 15.8 किलोमीटर होगी, जबकि एप्रोच रोड और रेलवे लाइन सहित पूरी परियोजना की कुल लंबाई 33.7 किलोमीटर तक पहुंचेगी।

Brahmaputra River Tunnel Project: मेगा प्रोजेक्ट की कीमत 20,000 करोड़

रेलवे लिंक को शामिल करने के बाद इस मेगा प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹18,600 करोड़ से ₹20,000 करोड़ के बीच बताई जा रही है। इसकी फंडिंग सड़क परिवहन मंत्रालय, रेलवे मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय संयुक्त रूप से करेंगे। सरकार का मानना है कि यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत में कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई देगी। इस सुरंग के बनने से गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच की दूरी, जो अभी लगभग 240 किलोमीटर है। इसे तय करने में 6-7 घंटे लगते हैं, घटकर सिर्फ 34 किलोमीटर रह जाएगी। इससे यात्रा समय घटकर महज़ 30 मिनट रह जाएगा, जिससे व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।

Brahmaputra River Tunnel: सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण

रणनीतिक दृष्टि से यह सुरंग बेहद अहम है, क्योंकि यह अरुणाचल प्रदेश और चीन सीमा के करीब स्थित है। युद्ध या आपात स्थिति में सेना और भारी गोला-बारूद की त्वरित आवाजाही के लिए यह मार्ग एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। डिजाइन के अनुसार, जब सुरंग के भीतर ट्रेन चलेगी, तब सुरक्षा कारणों से उस ट्यूब में वाहनों की आवाजाही रोक दी जाएगी।

जनवरी 2026 की शुरुआत में व्यय सचिव की अध्यक्षता वाली अंतर-मंत्रालयी समिति ने इसे 'इन-प्रिंसिपल अप्रूवल' दे दी है। अब कैबिनेट से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इसके निर्माण में लगभग पांच वर्ष लगने का अनुमान है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत के विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

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