यूपी पुलिस के फर्जी एनकाउंटर के शिकार बॉडी बिल्डर जितेंद्र यादव आठ माह से बिस्तर पर
यूपी पुलिस के फर्जी एनकाउंटर के शिकार बॉडी बिल्डर जितेंद्र यादव, हस माह से बिस्तर पर
नई दिल्ली। लखनऊ में विवेक तिवारी हत्याकांड को लेकर कई गंभीर आरोप उत्तर प्रदेश पुलिस पर लग रहे हैं। बीते कुछ समय में ये पहला मौका नहीं है जब यूपी पुलिस पर अपनी ताकत का नाजायज इस्तेमाल करने का आरोप लगा है। इस साल फरवरी में नोएडा के परथला गांव के रहने वाले बॉडी बिल्डर जितेंद्र यादव भी पुलिस की गोली का शिकार हुए थे, इसे एनकाउंटर का नाम दिया गया था, जो बाद में फर्जी निकला। 26 साल के यादव की जान तो बच गई लेकिन उनके शरीर के पेट से नीचे का हिस्सा पूरी तरह बेकार हो चुका है।
मिस्टर उत्तराखंड रह चुके हैं यादव
द प्रिंट ने जितेंद्र यादव से बात की है और जाना है कि आठ महीने पहले क्या हुआ था। चार फरवरी की रात को जितेंद्र एक शादी से अपने घर लौट रहे थे कि सब-इंस्पेक्टर विजय दर्शन शर्मा ने उन पर कथित तौर पर प्रमोशन और वाहवाही के लिए गोली चलाकर इसे एनकाउंटर का नाम दे दिया। बाद में शर्मा की गिरफ्तारी हुई। यादव ने बताया है कि वो अब अपनी टांग नहीं उठा पाते हैं। वो बताते हैं कि उनके लिए ये बहुत मुश्किल वक्त है क्योंकि उन्होंने बॉडी बिल्डिंग में कई इनाम जीते हैं, वो मिस्टर उत्तराखंड भी रह चुके हैं।

आर्थिक तंगी का कर रहे सामना
यादव ने बताया कि इस हादसे के बाद से वो बेड पर हैं, उनका वजन 20 किलो घट चुका है। उनके दो बच्चे हैं। बीवी बच्चों के खर्च के साथ-साथ उनके इलाज में हर महीने 70 हजार रुपए खर्च होते हैं जबकि आमदनी का जरिया बंद हो चुका है, ऐसे में आर्थिक तौर पर भी उनके सामने बड़ी चुनौती खड़ी है।

क्या हुआ था उस रात
यादव कहते हैं, मुझे याद है जब मुझे गोली लगी, मेरी गर्दन के पास मैंने कीन देखा। हाथ से खून रोकने की कोशिश की लेकिन खून नहीं रुका और फिर मैं बेहोश हो गया। वो बताते हैं कि कि वो दोस्तों के साथ शादी से लौट रहे थे। वो कार के पास खड़े थे, जब पुलिसवालों ने आकर कुछ देर उनके रात में बाहर होने को लेकर बहस के बाद जितेंद्र की गर्दन पर गोली मार दी थी।












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