बंगाल में हर योजना की 'कट मनी' फिक्स, अंतिम संस्कार में भी कमीशन लेते हैं टीएमसी नेता

नई दिल्ली। सरकार समाज के गरीब वर्ग को ध्यान में रखते हुए तमाम योजनाओं की शुरुआत करती है, जिससे कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सके। लेकिन पश्चिम बंगाल में सरकारी योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुंचाने के लिए टीएमसी के नेताओं ने दलाली की रेट लिस्ट जारी कर दी है। हर योजना का लाभ गरीबों को तभी मिल सकता है जब वह टीएमसी के नेताओं को उनका कमीशन मिले। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार लोगों से उज्जवला स्कीम के तहत मुफ्त गैस सुविधा देने, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनवाने के लिए दी जाने वाली राशि यहां तक कि अंतिम संस्कार के लिए सरकार की ओर से दी जाने वाली राशि में भी टीएमसी के नेता गरीबों से कमीशन लेते हैं।

लोगों का विरोध

लोगों का विरोध

टीएमसी नेताओं की इस कमीशनखोरी के खिलाफ अब स्थानीय ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। पश्चिम बंगाल की पूर्बा बर्धमान, बीरभूम, हुगली, मालदा, मुर्शीदाबाद, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर में लोगों ने कमीशनखोरी के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी है और टीएमसी नेताओं द्वारा ली गई कमीशन की राशि को वापस दिए जाने की मांग कर रहे हैं। बंगाल के तकरीबन 12 गांवों के लोगों ने इस कमीशनखोरी के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी है। शर्मनाक बात यह है कि यहां हर योजना की कमीशन राशि को फिक्स कर दिया है, यानि तय कमीशन की राशि दिए बगैर आप योजना का लाभ नहीं ले सकते हैं।

एलपीजी कनेक्शन के लिए 550 रुपए लिए

एलपीजी कनेक्शन के लिए 550 रुपए लिए

हुगली की निवासी ममोनी सरदार बताती हैं कि उन्होंने एलपीजी कनेक्शन के लिए 550 रुपए टीएमसी नेता को दिया था। लेकिन बाद में मुझे पता चला कि यह मुफ्त में मिलती है, इसके लिए कोई पैसा नहीं देना होता है, मैं अपना पैसा वापस चाहती हूं। ममोनी के अलावा तमाम महिलाएं अब नुनियाडंगा गांव में टीएमसी नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं और अपने पैसे वापस दिए जाने की बात कह रही हैं। वहीं जिन दो टीएमसी नेताओं सुभाष बिस्वास और शिखा मजूमदार पर कमीशनखोरी का आरोप है, वो लापता हैं।

अंतिम संस्कार की राशि का भी कट रेट

अंतिम संस्कार की राशि का भी कट रेट

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन परिवारों में किसी की मौत हो जाती है उनके अंतिम संस्कार के लिए सरकार 2000 रुपए की राशि देती है, लेकिन ये कमीशनखोर लोग इन लोगों को भी नहीं छोड़ते हैं और उनसे 200 रुपए का कमीशन लेते हैं, जिसे कट मनी कहा जाता है। स्थानीय लोगों के साथ कुछ टीएमसी के नेता भी इस बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं कि कैसे हर योजना के लिए कट राशि को निर्धारित किया गया है। आईए डालतें हैं एक नजर

हर स्कीम का कट फिक्स

हर स्कीम का कट फिक्स

  • उज्जवाल स्कीम के लिए 500-600 रुपए कट राशि देनी होती है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 10000 से 25000 रुपए की कट राशि देनी होती है ,जिसके बाद ही 1.20 से 1.35 लाख रुपए की सहायता मिलती है।
  • स्वच्छ भारत मिशन, ग्रामीण के तहत 12000 रुपए केंद्र सरकार देती है, लेकिन इसे लेने के लिए 900-2000 रुपए की कट राशि देनी होती है।
  • मनरेगा के तहत हर रोज मजदूरों को अपनी दिहाड़ी से 20-40 रुपए कट राशि के तौर पर देना होता है।
  • राजनीतिक नूराकुश्ती

    राजनीतिक नूराकुश्ती

    वहीं इस पूरे मामले पर टीएमसी का कहना है कि सिर्फ 0.1 फीसदी लोग ही इसमे लिप्त थे, जिनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। साथ ही एक टीम भी बनाई गई है जोकि लोगों की शिकायतों को सुनेगी। टीएमसी नेता स्वपन देबनाथ का कहना है कि भाजपा नेता इस मसले का इस्तेमाल लोगों को भड़काने के लिए कर रहे हैं, ये लोग ईमानदार नेताओं के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं, हम इन लोगों से राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगे। वहीं हुगली के स्थानीय अधिकारी का कहना है कि हर योजना का रेट फिक्स है, स्थानीय नेताओं और पंचायत के सदस्यों का पूरा तंत्र इसमे शामिल है। यह तंत्र लेफ्ट की सरकार में भी था लेकिन अब टीएमसी की सरकार में यह पूरी तरह से फलफूल रहा है।

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