दिल्ली निगम चुनाव के पैटर्न पर गुजरात में टिकट बांटेगी BJP

नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव में किसका टिकट कटेगा और किसको टिकट मिलेगा, ये सवाल जोरों पर छाया हुआ है। गुजरात से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में टिकट बरकरार रखने या फिर टिकट पाने के लिए राज्य के नेता दिन-रात एक किए हैं। एक तरफ राज्य की इकाई में अपनी पैरवी के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है तो दिल्ली में भी राष्ट्रीय नेताओं तक पहुंच बनाने के हर संभव उपाय तलाशे जा रहे हैं।

एंटी इनकम्बेंसी के मद्देनजर बीजेपी की मुश्किल ज्यादा

एंटी इनकम्बेंसी के मद्देनजर बीजेपी की मुश्किल ज्यादा

सबसे पहले बात करते हैं बीजेपी की, इस बार के विधानसभा चुनाव में पिछले बार की तुलना में ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है। हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश के बलबूते पर कांग्रेस उत्साहित नजर आ रही है और राहुल गांधी के इस चुनाव में जो तेवर बदले हैं, उससे भी पार्टी में नई आशा का संचार का संचार हुआ है। इस पर बीजेपी की पूरी नजर है और टिकट बांटने में फूंक फूंक कर कदम उठाने की रणनीति बनाई जा रही है। इसमें कोई शक नहीं कि एंटी इनकम्बेंसी के मद्देनजर बीजेपी की मुश्किल ज्यादा है और इसीलिए बड़ी संख्या में पुराने विधायकों के टिकट काटने की तैयारी है।

दिल्ली पैटर्न पर मिलेगी टिकट

दिल्ली पैटर्न पर मिलेगी टिकट

कम से कम 35-40 विधायकों के नाम तो लगभग फाइनल है जिन्हें पहली सूची में रखा गया है कि इन्हें टिकट मिलना ही नहीं है और इसके बाद लगभग इतने ही दूसरी सूची में शामिल हैं जिन्हें मौजूदा हालात, जातिगत समीकरण और दूसरे दल के उम्मीदवार के आधार पर तय किया जाएगा कि उसे फिर से मैदान में उतारा जाए या फिर नहीं। गुजरात में बीजेपी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि दिल्ली नगर निगम चुनाव का पैटर्न गुजरात में भी अपनाने की तैयारी है जिसमें बीजेपी को बड़ा फायदा मिला। दिल्ली में ज्यादातर नए चेहरे उतारे गए, जो सालों से पार्टी के पार्षद थे और जनता में उनका विरोध बढ़ता जा रहा था, उनका टिकट कितने भी दवाब के बाद काट दिया गया और पार्टी की ये रणनीति जोरदार साबित हुई। इसके अलावा सौराष्ट्र और कच्छ में टिकट बांटने पर ज्यादा सतर्कता बरतने की तैयारी है क्योंकि यही वह इलाका है जहां कांग्रेस अपने को मजबूत मान रही है।

कांग्रेस नौजवानों को टिकट देकर पार्टी यूथ लहर बनाना चाहती है

कांग्रेस नौजवानों को टिकट देकर पार्टी यूथ लहर बनाना चाहती है

अब बात करते हैं कांग्रेस की, तो उसकी रणनीति बीजेपी से बिलकुल उलट है। कांग्रेस ये मानकर चल रही है कि उसके सभी मौजूदा विधायक ही पार्टी के मजबूत स्तंभ हैं जो न केवल बीजेपी की लहर में भी जीते बल्कि अहमद पटेल के राज्यसभा चुनाव के पहले जिस तरह बीजेपी ने कांग्रेस को ध्वस्त करने की योजना बनाई थी, उस आंधी में ये विधायक बीजेपी के साथ नहीं गए। जो गए, उनके बारे में पार्टी ही नहीं सभी जानते हैं और शंकर सिंह बाघेला ने बीजेपी के साथ जो गेम प्लान बनाया, वो उतना कारगर नहीं हो पाया, जितना वो सोच रहे थे। इसलिए इन विधायकों में से ज्यादातर को टिकट देने की तैयारी है और बाकी सीटों पर होमवर्क चल रहा है जहां ताजा समीकरणों को ध्यान में रखा जा रहा है। कांग्रेस के इन विधायकों के अलावा बाकी जो विधानसभा क्षेत्र हैं, उनमें हार्दिक, अल्पेश और जिग्नेश का प्रभाव दिखेगा। पार्टी इनकी सहमति का पूरा ध्यान रख रही है ताकि जातिगत समीकरणों को मजबूत किया जा सके। इसके अलावा युवा उम्मीदवारों को ज्यादा टिकट देने का भी विचार है। राहुल गांधी की अगुवाई में नौजवानों को टिकट देकर पार्टी यूथ लहर बनाना चाहती है। इन नौजवानों को अलग अलग क्षेत्र के हिसाब से उन समाजों से लिया जाएगा जिनका रुख कांग्रेस अपनी तरफ देख रही है। इसके अलावा पार्टी उन सीटों पर भी चौंकाने वाले फैसले करने के प्लान में है जहां बीजेपी के मंत्री, वरिष्ठ नेता मैदान में उतरते हैं या फिर उतरने की तैयारी में है। ऐसे टिकट आखिरी वक्त में ही फाइनल होंगे। कुल मिलाकर दोनों दलों की ओर से टिकट वितरण में काफी सरप्राइज मिलने वाली है।

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