तेलंगाना में भाजपा की बढ़ी मुश्किल, वरिष्‍ठ नेताओं को विधानसभा चुनाव लड़ने में नहीं है दिलचस्‍पी

तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने चार दिन पहले अपने उम्‍मीदवारों की पहली लिस्‍ट जारी कर दी थी। इस सूची में भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ तीन सांसदों के भी नाम शामिल हैं लेकिन राज्‍य के प्रमुख भाजपा नेता कथित तौर पर चुनाव लड़ने के लिए इच्‍छुक नहीं है। जिस कारण भाजपा नेतृत्‍व ने उन्‍हें जो निर्वाचन क्षेत्र दिए हैं उसके लिए नए उम्‍मीदवार जुटाने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।

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भाजपा के सूत्रों के अनुसार सांसद एपी जितेंद्र रेड्डी, कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी, जी विवेक वेंकटस्वामी और पूर्व मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डीके अरुणा विधानसभा चुनाव लड़ना नहीं चाहते थे ये सभी 2024 में लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्‍छुक थे। वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार भी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, उन्‍हें करीमनगर से भाजपा ने टिकट देकर उम्‍मीदवार बनाया है।

इन वरिष्‍ठ नेताओं की चुनाव के प्रति अनिच्‍छा के कारण गडवाल, महबूबनगर, तंदूर और चेन्नूर विधानसभा क्षेत्रों के लिए टिकटों के आवंटन पर सस्पेंस पैदा हो गया है।

वहीं तेलंगाना भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जी किशन रेड्डी और राज्यसभा सदस्य के लक्ष्मण, जो क्रमश: अंबरपेट और मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं उन्‍हें विधानसभा चुनाव नहीं लड़वाया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार तेलंगाना चुनाव में किशन रेड्डी अपनी पत्नी काव्या रेड्डी को अंबरपेट से मैदान में उतारना चाहते हैं और इसके बारे में उन्‍होंने पार्टी नेतृत्‍व को सूचित कर दिया है।

इसके अलावा मुशीराबाद सीट से पांच दावेदार थे जिसमें उस क्षेत्र के भाजपा जीएचएमसी पार्षद भी शामिल हैं और पवनी विनय कुमार को सबसे आगे माना जा रहा है। वहीं ये भी चर्चा है कि मुशीराबा से हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की बेटी विजया लक्ष्मी को विधायकी का लड़ने के लिए टिकट दिया जा सकता है।

वहीं डीके अरुणा चाहती हैं कि पार्टी उनके प्रतिनिधित्व वाले गडवाल विधानसभा क्षेत्र से किसी बीसी नेता को मैदान में उतारे।

इसके अलाव जितेंद्र रेड्डी ओर विश्वेश्‍वर रेड्डी चाहत है कि भाजपा उनके कुछ करीबी लोगों को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारे। ये सभी कारण है जो तेलंगाना में भाजपा के वरिष्‍ठ नेता विधानसभा चुनाव लड़ना नहीं चाहते हैं क्‍योकि उन्‍हें अंदाजा है कि अगर वो चुनाव जीत भी जाते हैं तो भाजपा तेलंगाना में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं होगी। इसलिए भाजपा के वरिष्‍ठ नेता तेलंगाना चुनाव तेलंगाना विधानसभा चुनाव से दूर रहना चाहते हैं और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर अपना पूरा फोकस रखना चाहते हैं।

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