उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव, पीएम मोदी का सीक्रेट प्लान तैयार! सांसदों संग महामंथन जारी
Vice President Election 2025: उपराष्ट्रपति चुनाव में अब सिर्फ कुछ ही हफ्ते बचे हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले अपने सहयोगियों के साथ एक मेगा शक्ति प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। अगले हफ्ते पार्टी के सभी सांसदों और एनडीए (NDA) के नेताओं की बड़ी बैठक बुलाई गई है। संसद के मानसून सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत के साथ ही मंगलवार (19 अगस्त) को भाजपा संसदीय दल की बैठक होगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसदों को संबोधित करेंगे।
यह बैठक 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से बेहद अहम है। माना जा रहा है कि यह बैठक उनके उम्मीदवार पर अंतिम चर्चा का मंच साबित हो सकती है। उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन प्रक्रिया 21 अगस्त तक चलेगी। जगदीप धनखड़ ने पिछले महीने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, बाद में पार्टी नेतृत्व से मतभेद को उनकी अचानक इस्तीफे की बड़ी वजह माना गया।

नामांकन के दिन एनडीए का शक्ति प्रदर्शन
एनडीए की ओर से नामांकन दाखिल करने के दिन सभी केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री मौजूद रहेंगे। बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के नेताओं को नामांकन पत्रों में प्रस्तावक और समर्थक बनाया जाएगा, ताकि गठबंधन की एकजुटता का संदेश पूरे देश में जाए।
भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में तय होगा नाम
भाजपा की संसदीय बोर्ड की बैठक रविवार (17 अगस्त) को नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में शुरू हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पार्टी बैठक में शामिल हुए। इसी बैठक में उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए भाजपा-एनडीए के उम्मीदवार का नाम फाइनल किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उपराष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार पर चर्चा होने की संभावना है। एक वरिष्ठ पार्टी सूत्र ने बताया, "बैठक में एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर चर्चा हो सकती है।"
7 अगस्त को हुई एक बैठक में पहले ही पीएम मोदी और जेपी नड्डा को उम्मीदवार चुनने का अधिकार मिल चुका है। इसके बाद से लगातार कई दौर की चर्चाएँ चल रही हैं।
RSS विचारधारा से जुड़े चेहरे पर दांव
सूत्रों के मुताबिक, इस बार उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार सीधे बीजेपी से होगा और वह आरएसएस और पार्टी की विचारधारा से गहराई से जुड़ा हुआ चेहरा होगा। माना जा रहा है कि उम्मीदवार ऐसा होगा जो न सिर्फ संगठन के लिए स्वीकार्य हो, बल्कि क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन का संदेश भी दे सके।
MPs को मिल रही चुनावी ट्रेनिंग
एनडीए सांसदों को उपराष्ट्रपति चुनाव में वोटिंग की प्रक्रिया समझाने के लिए संसद भवन में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा भाजपा रणनीतिकार विपक्षी दलों से भी संपर्क करेंगे, हालांकि विपक्ष ने साफ कर दिया है कि वह अपना उम्मीदवार उतारेगा। इसे पीएम मोदी का सीक्रेट प्लान भी कहा जा रहा है।
भाजपा ने अपने सभी सांसदों को 6 से 9 सितंबर तक दिल्ली में रहने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान पार्टी मुख्यालय में एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें उपराष्ट्रपति चुनाव और अन्य महत्वपूर्ण संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा होगी।
गठबंधन पर बढ़ी निर्भरता
तीसरी बार सत्ता में आई मोदी सरकार के लिए यह उपराष्ट्रपति चुनाव अपनी ताकत दिखाने का पहला बड़ा मौका है। हालांकि, इस बार भाजपा की संख्या अपने सहयोगी दलों -तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) - पर ज्यादा निर्भर है। ओडिशा में सत्ता गंवाने के बाद बीजेडी (BJD) के समर्थन की संभावना बेहद कम हो गई है।
21 अगस्त को दाखिल होगा एनडीए उम्मीदवार का नामांकन
भाजपा द्वारा नामित एनडीए के सर्वसम्मत उम्मीदवार से उम्मीद है कि वह 21 अगस्त को नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी समेत एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी न सिर्फ उपराष्ट्रपति चुनाव पर बल्कि एनडीए के विधायी एजेंडे और उम्मीदवार की रणनीति पर भी चर्चा करेंगे। सूत्रों का कहना है कि उम्मीदवार के चयन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का प्रभाव भी दिख सकता है, खासकर तब जब हाल ही में पीएम मोदी ने लाल किले से अपने संबोधन में संघ की खुलकर प्रशंसा की थी।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद चुनाव
पिछले महीने जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद यह चुनाव होना अनिवार्य हो गया है।
एनडीए इस चुनाव को अपनी शक्ति-प्रदर्शन की तरह पेश करने जा रहा है। नामांकन के दिन केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और सांसदों के साथ लगभग सभी शीर्ष नेता मौजूद रहेंगे। यह कांग्रेस नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक को एक सशक्त राजनीतिक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा होगा।
विपक्ष भी उतारेगा उम्मीदवार
हालांकि विपक्षी दलों के पास पर्याप्त संख्या नहीं है, फिर भी वे उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। विपक्ष इस चुनाव को सिर्फ संख्याबल का नहीं बल्कि विचारधारा की लड़ाई के रूप में देख रहा है।
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