BJP का नया National President इन 8 चेहरों में से कौन होगा? RSS ने 100 दिग्गजों से की गुप्त चर्चा, समझें गणित

BJP New National President Name: भारतीय जनता पार्टी (BJP) में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया जोरों पर है। बिहार, पश्चिम बंगाल, और दक्षिणी राज्यों जैसे तमिलनाडु और केरल में आगामी चुनावों को देखते हुए यह फैसला बेहद अहम है। जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2020 में शुरू हुआ था, और दो बार के विस्तार (2024 लोकसभा चुनाव और संगठनात्मक कार्यों के लिए) के बाद अब पार्टी नए चेहरे को कमान सौंपने की तैयारी में है।

सूत्रों के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नए नेतृत्व के साथ मैदान में उतरना चाहती है। लेकिन कई कारणों से इस प्रक्रिया में देरी हो रही है। एनडीटीवी से बातचीत में सूत्रों ने खुलासा किया कि पार्टी और उसके वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने नए अध्यक्ष के लिए 100 से ज्यादा वरिष्ठ नेताओं से सलाह-मशविरा किया है। आखिर कौन बनेगा BJP का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष? आइए जानते हैं इस सियासी मंथन की पूरी कहानी....

BJP New National President Name

देरी के पीछे क्या कारण?

BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में देरी के कई कारण हैं: -

  • विस्तृत विचार-विमर्श: BJP और RSS ने नए अध्यक्ष के लिए करीब 100 शीर्ष नेताओं से राय ली है। इसमें पूर्व पार्टी अध्यक्ष, केंद्रीय मंत्री, और संवैधानिक पदों पर बैठे BJP-RSS से जुड़े नेता शामिल हैं।
  • उपराष्ट्रपति चुनाव: 9 सितंबर 2025 को होने वाला उपराष्ट्रपति चुनाव भी एक बड़ा कारण है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद BJP अपने उम्मीदवार, महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन, की जीत सुनिश्चित करने में जुटी है।
  • राज्य इकाइयों के चुनाव: BJP का गणि कहता है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने से पहले कम से कम 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठनात्मक चुनाव पूरे होने चाहिए। पिछले महीने तक 28 राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, लेकिन उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, दिल्ली, झारखंड, पंजाब और मणिपुर जैसे अहम राज्यों में अभी अध्यक्षों का चयन बाकी है। पंजाब में कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति हो चुकी है।

जेपी नड्डा का कार्यकाल और विस्तार

वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को जनवरी 2020 में चुना गया था। उनके तीन साल के कार्यकाल के बाद उन्हें दो बार विस्तार मिला-पहला 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए और दूसरा संगठनात्मक कार्यों को पूरा करने के लिए। लेकिन अब पार्टी नए चेहरे को कमान सौंपने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, नया अध्यक्ष जुलाई-अगस्त 2025 तक चुना जा सकता है।

चर्चा में शामिल प्रमुख दावेदार और RSS की पसंद क्यों?

Shivraj Singh Chouhan-शिवराज सिंह चौहान (किरार, OBC)

  • खासियत: पूर्व मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री। 13 साल की उम्र से RSS से जुड़े। OBC समुदाय से होने के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में जातिगत समीकरणों के लिए मजबूत दावेदार। जमीनी स्तर पर जबरदस्त पकड़ और प्रशासनिक अनुभव।
  • RSS की नजर में: RSS को शिवराज का समावेशी और कार्यकर्ता-केंद्रित नेतृत्व पसंद है। लेकिन उनकी उम्र (66) और केंद्रीय मंत्री के रूप में व्यस्तता एक चुनौती हो सकती है।
  • कमजोरी: कुछ सूत्रों के मुताबिक, मोदी-शाह उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल से हटाने के पक्ष में नहीं हैं।

Dharmendra Pradhan-धर्मेंद्र प्रधान (कुर्मी, OBC)

  • खासियत: केंद्रीय शिक्षा मंत्री, 55 साल की उम्र, और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से लंबा अनुभव। उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में चुनाव प्रभारी के तौर पर कामयाबी। OBC समुदाय से होने के कारण जातिगत संतुलन में फिट।
  • RSS की नजर में: युवा, ऊर्जावान, और संगठनात्मक अनुभव के कारण RSS की पसंद। उनकी उम्र और क्षेत्रीय पकड़ (ओडिशा) उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।
  • कमजोरी: दक्षिण भारत से न होने के कारण क्षेत्रीय संतुलन में थोड़ा कमजोर।

Bhupendra Yadav- भूपेंद्र यादव (यादव, OBC)

  • खासियत: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, 55 साल की उम्र, और राजस्थान से होने के कारण क्षेत्रीय संतुलन में योगदान। OBC समुदाय से और कई चुनावों में रणनीतिकार की भूमिका।
  • RSS की नजर में: RSS उनकी प्रशासनिक क्षमता और संगठनात्मक अनुभव की सराहना करता है। राजस्थान से होने के कारण उत्तर भारत में संतुलन बनाए रखने में मददगार।
  • कमजोरी: दक्षिण भारत से नहीं होने के कारण दक्षिणी राज्यों में BJP की पैठ बढ़ाने के लिए कम प्रभावी हो सकते हैं।

Daggubati Purandeswari-दग्गुबती पुरंदेश्वरी (कम्मा)

  • खासियत: आंध्र प्रदेश BJP अध्यक्ष और लोकसभा सांसद। उन्हें 'सुषमा स्वराज ऑफ साउथ' कहा जाता है। आंध्र के पूर्व CM एनटी रामा राव की बेटी और NDA गठबंधन के अहम सहयोगी चंद्रबाबू नायडू की भाभी। दक्षिण भारत से होने के कारण क्षेत्रीय संतुलन में मजबूत।
  • RSS की नजर में: RSS दक्षिण भारत में BJP की पैठ बढ़ाना चाहता है, और पुरंदेश्वरी का अनुभव (2014 में कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल) और महिला नेतृत्व उन्हें खास बनाता है।
  • कमजोरी: हिंदी में कमजोर पकड़ और दक्षिण के बाहर सीमित पहचान।

Vanathi Srinivasan-वनाथी श्रीनिवासन (ब्राह्मण)

  • खासियत: BJP महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और कोयंबटूर (तमिलनाडु) से विधायक। 2021 में कमल हासन को हराकर चर्चा में आईं। दक्षिण भारत से होने के कारण क्षेत्रीय संतुलन में योगदान। कई सफल आउटरीच प्रोग्राम्स की अगुवाई।
  • RSS की नजर में: RSS उनकी ऊर्जा और महिला नेतृत्व को पसंद करता है। तमिलनाडु जैसे अहम दक्षिणी राज्य में उनकी जीत उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।
  • कमजोरी: हिंदी में कमजोर पकड़, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए जरूरी मानी जाती है।

Annamalai Kuppusamy-अन्नामलाई कुप्पुसामी (गौंडर, OBC)

  • खासियत: तमिलनाडु BJP अध्यक्ष और पूर्व IPS अधिकारी। OBC समुदाय से होने के कारण जातिगत संतुलन में फिट। युवा (40 साल) और आक्रामक नेतृत्व के लिए जाने जाते हैं। तमिलनाडु में BJP की मौजूदगी बढ़ाने में अहम भूमिका।
  • RSS की नजर में: RSS उनकी जमीनी सक्रियता और दक्षिण भारत में पार्टी को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना करता है। लेकिन उनकी कम उम्र और सीमित संगठनात्मक अनुभव (BJP में 15 साल की सदस्यता जरूरी) एक चुनौती है।
  • कमजोरी: राष्ट्रीय स्तर पर कम अनुभव और हिंदी भाषी राज्यों में सीमित पहचान।

Manohar Lal Khattar-मनोहर लाल खट्टर (खत्री)

  • खासियत: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री। RSS के पुराने प्रचारक और मोदी के करीबी। सादगी और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं।
  • RSS की नजर में: RSS उनकी लंबी संगठनात्मक पृष्ठभूमि और समर्पण को महत्व देता है।
  • कमजोरी: 71 साल की उम्र RSS के 50-70 साल के मापदंड से बाहर है।

Vinod Tawde-विनोद तावड़े (मराठा)

  • खासियत: राष्ट्रीय महासचिव और ABVP से लंबा अनुभव। बिहार जैसे अहम राज्यों में संगठन प्रभारी। मोदी-शाह के करीबी और महाराष्ट्र में मजबूत पकड़।
  • RSS की नजर में: RSS उनकी संगठनात्मक क्षमता को पसंद करता है, लेकिन वह मोदी-शाह की पसंद माने जाते हैं, जो RSS के स्वतंत्र नेतृत्व के मापदंड से टकरा सकता है।
  • कमजोरी: OBC या दक्षिण भारत से न होने के कारण क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन में कमजोर।

RSS और BJP का टकराव?

सूत्रों के मुताबिक, RSS एक स्वतंत्र और समावेशी नेता चाहता है, जो मोदी-शाह के केंद्रीकृत नेतृत्व से अलग कार्यकर्ताओं को जोड़ सके। 2024 के लोकसभा चुनाव में BJP के 240 सीटों पर सिमटने के बाद RSS ने अपनी अहमियत फिर साबित की, क्योंकि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में RSS कार्यकर्ताओं की कम सक्रियता को हार का कारण माना गया। RSS इस बार ऐसा अध्यक्ष चाहता है जो उनकी विचारधारा को मजबूत करे और 2029 के लोकसभा चुनाव में 272+ सीटों का लक्ष्य हासिल करे।

RSS की नजर में क्या है जरूरी?

RSS, जो BJP का वैचारिक मार्गदर्शक है, नए अध्यक्ष के लिए कुछ खास मापदंड चाहता है: -

  • जमीनी स्तर से जुड़ाव: ऐसा नेता जो कार्यकर्ताओं और संगठन के बीच सेतु बन सके।
  • समावेशी और सुलभ: केंद्रीकृत नेतृत्व के बजाय ऐसा व्यक्ति जो फीडबैक ले और सभी को साथ ले।
  • उम्र और अनुभव: 50-70 साल की उम्र और कम से कम 15 साल की संगठनात्मक अनुभव।
  • क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन: खासकर OBC और दक्षिण भारत से प्रतिनिधित्व को बढ़ावा, ताकि कांग्रेस की जाति जनगणना रणनीति का मुकाबला किया जा सके और दक्षिणी राज्यों में पैठ बढ़े।

सूत्रों का कहना है कि BJP क्षेत्रीय संतुलन, जातिगत समीकरण और संगठनात्मक अनुभव को ध्यान में रखकर फैसला लेगी। खास तौर पर OBC समुदाय से किसी नेता को चुनने की चर्चा है, ताकि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में कांग्रेस की जाति जनगणना की रणनीति को जवाब दिया जा सके।

युवा नेतृत्व पर जोर

BJP ने मंडल अध्यक्षों के लिए उम्र सीमा 40 साल से कम रखी है, ताकि अगली पीढ़ी के नेताओं को मौका मिले। वहीं, जिला और प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कम से कम 10 साल की सक्रिय BJP सदस्यता अनिवार्य की गई है। यह कदम उन कार्यकर्ताओं के असंतोष को दूर करने के लिए उठाया गया है, जो बाहरी नेताओं को संगठन में बड़े पद मिलने से नाराज थे।

आगे क्या?

BJP का लक्ष्य बिहार चुनाव से पहले नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनना है, ताकि नया नेतृत्व 2026 के विधानसभा चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए रणनीति तैयार कर सके। लेकिन उपराष्ट्रपति चुनाव और बाकी राज्यों में संगठनात्मक चुनावों की प्रक्रिया ने इस फैसले को कुछ हफ्तों के लिए टाल दिया है। क्या BJP दक्षिण भारत से पहली बार महिला अध्यक्ष चुनेगी, या OBC चेहरे को मौका देगी? यह सवाल सियासी गलियारों में गूंज रहा है। फिलहाल, सभी की नजरें पार्टी मुख्यालय और RSS के साथ होने वाली बैठकों पर टिकी हैं।

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