मुसलमान वोट नहीं देंगे तो क्या करेगी बीजेपी? सुवेंदु अधिकारी की मांग पर क्या है पार्टी का 'आदर्श' प्लान?

लोकसभा चुनावों के बाद से बीजेपी कई तरह की उलझनों में है। बंगाल बीजेपी के नेता सुवेंदु अधिकारी ओर से पार्टी का अल्पसंख्यक मोर्चा भंग करने और 'सबका साथ, सबका विकास' वाले विचार को त्यागने के आह्वान से यह चुनौती और बढ़ी हुई है। लेकिन, इसके जवाब में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने अपना इरादा साफ कर दिया है।

बीजेपी एक ओर यूपी सरकार की ओर से कांवड़ यात्रा में दुकानदारों को अपने नाम सार्वजनिक करने को लेकर विपक्ष और कुछ सहयोगियों के निशाने पर है। वहीं बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के बयान की वजह से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदर्शों के लिए चुनौती खड़ी हो रही है।

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बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा का और विस्तार करेंगे- जमाल सिद्दीकी
बंगाल में नंदीग्राम सीट पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराने वाले बीजेपी के विधायक और नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा भंग करने की मांग वाले बयान पर इसकी माइनोरिटी सेल के राष्ट्रीय अध्यक्ष का बयान आया है, जिन्होंने मोर्चे की और विस्तार की बात कह दी है।

भाजपा का आदर्श वोट नहीं, लोगों की सेवा है- अल्पसंख्यक मोर्चा
बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने शनिवार को कोलकाता में पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि मोर्चे का और विस्तार करेंगे। उन्होंने कहा, 'बीजेपी सबका साथ, सबका विकास में विश्वास करती है। पीएम मोदी ने इसे अक्षरशः लागू करने की कोशिश की है।'

उन्होंने ये भी कहा, 'बीजेपी का गठन सिर्फ वोट लेने के लिए नहीं हुआ है। इसका आदर्श लोगों की सेवा है। यह पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के दर्शन पर आधारित है। इसका अर्थ यह है कि हम लोगों के साथ हैं, चाहे वे हमें वोट दें या नहीं।'

'सुवेंदु को बीजेपी के दर्शन को सीखना होगा'
इससे पहले सिद्दीकी अधिकारी के बारे में ये भी कह चुके हैं कि 'वे नए आए हैं(पार्टी में) और बीजेपी के दर्शन को अच्छी तरह से नहीं समझ पाए हैं। उन्हें बीजेपी के दर्शन को सीखना होगा। वे शायद भावना में बह गए होंगे। उन्हें अल्पसंख्यक मोर्चा भंग करने का अधिकार नहीं है।'

चुनाव के बाद की हिंसा में कई अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं की गई जान- बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा
अधिकारी की सोच को दरकिनार करते हुए बंगाल प्रदेश भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष चार्ल्स नंदी ने कहा, 'चुनाव के बाद हुई हिंसा में भाजपा के जिन कार्यकर्ताओं ने अपनी जानें गंवाई हैं, उनमें से कई अल्पसंख्यक समुदाय के थे।'

क्या है 'सबका साथ, सबका विकास'?
भारत सरकार के पोर्टल मायगॉव डॉट इन के मुताबिक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' के आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

इसके अनुसार सरकार विभिन्न कार्यक्रमों और योजना के माध्यम से देश के सभी नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि समाज के गरीब और हाशिए पर पड़े वर्गों का समग्र कल्याण सुनिश्चित हो सके।

विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने भाजपा नेता को किया निराश
दरअसल, बंगाल में 10 जुलाई को हुए विधानसभा उपचुनाव में चारों सीटों पर टीएमसी की जीत के बाद एक कार्यक्रम में सुवेंदु अधिकारी ने 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे पर ही सवाल उठा दिया था और पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रदेश इकाई को भंग करने की मांग कर दी थी।

इन चार सीटों में से तीन बीजेपी के पास थी और लोकसभा चुनावों में भी पार्टी ने वहां बड़ी बढ़त हासिल की थी। लेकिन, उपचुनाव के परिणामों से आहत अधिकारी के बयानों से लगा कि वह यह कहना चाह रहे हैं कि बंगाल के मुसलमानों ने बीजेपी को वोट नहीं दिया, इसलिए उनपर धयान देने की आवश्यकता नहीं है।

जो हमारे साथ हम उनके साथ-सुवेंदु अधिकारी
उन्होंने कहा, 'हम हिंदुओं को बचाएंगे और संविधान की रक्षा करेंगे। मैंने पहले राष्ट्रवादी मुसलमानों के बारे में बात की थी। आपने सबका साथ, सबका विकास का नारा दिया। लेकिन, अबसे यह नहीं कहें। मैं कहूंगा जो हमारे साथ हम उनके साथ। सबका साथ,सबका विकास बंद (कहना बंद करें)। अल्पसंख्यक मोर्चा की कोई आवश्यकता नहीं है।'

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