BJP President: हो गया लगभग फाइनल! भाजपा को कब मिलेगा नया राष्ट्रीय अध्यक्ष! रेस में ये नाम टॉप पर
BJP President Update News: भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संगठनात्मक चुनाव लगभग पूरे हो चुके हैं और अब पार्टी अपने नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम का ऐलान जल्द ही कर सकती है। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 9 या 10 जुलाई को विदेश यात्रा से वापसी के बाद इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए 5 से 6 नामों पर चर्चा है लेकिन मनोहर लाल खट्टर और भूपेंद्र यादव का नाम सबसे टॉप पर बताया जा रहा है।
भाजपा ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है। बिहार, सिक्किम, गोवा और असम जैसे अहम राज्यों में पहले ही नए संगठन प्रमुखों की तैनाती हो चुकी है। अब उत्तर प्रदेश सहित कुछ बचे हुए राज्यों में भी जल्द यह प्रक्रिया पूरी होने जा रही है।

🔴 BJP के नए चीफ पर 10 से 19 जुलाई के बीच हो सकता है फैसला
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हनाले से कहा है कि पार्टी ने 5 नामों को शॉर्टलिस्ट किया है और अंतिम चयन 10 से 19 जुलाई के बीच किया जाएगा। यह फैसला संसद के मानसून सत्र, जो 21 जुलाई से शुरू होने वाला है, इससे पहले लिया जाना तय माना जा रहा है।
🔴 सबसे आगे कौन? ये हैं 5 प्रमुख दावेदार
🔴 1. भूपेंद्र यादव
मौजूदा केंद्रीय मंत्री और OBC समुदाय से आने वाले भूपेंद्र यादव को इस दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। वे पार्टी के कुशल चुनाव रणनीतिकार माने जाते हैं और महाराष्ट्र (2024), उत्तर प्रदेश (2017) और बिहार (2020) चुनावों में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
एक बिहार बीजेपी नेता ने कहा, "अगर भूपेंद्र यादव को अध्यक्ष बनाया जाता है तो यह बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यादव समुदाय को साधने के लिए अहम संदेश होगा।"
🔴 2. मनोहर लाल खट्टर
70 वर्षीय मनोहर लाल खट्टरप्रधानमंत्री मोदी के भरोसेमंद पुराने सहयोगी और साफ-सुथरी छवि वाले नेता हैं। वे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और फिलहाल केंद्र में मंत्री पद पर कार्यरत हैं।
RSS से 1977 में जुड़े और 1994 में बीजेपी का हिस्सा बने खट्टर का मोदी से नाता 1990 के दशक से है। संगठनात्मक समझ और अनुशासित कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले खट्टर को पीएम मोदी और संघ नेतृत्व की पसंद माना जाता है।
हाल ही में हरियाणा की सत्ता से हटाए जाने के बाद अब उनकी संगठन में नई भूमिका की चर्चा जोरों पर है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में उनके प्रति स्थानीय नाराजगी भी देखी गई है।
🔴 3. धर्मेंद्र प्रधान
संगठन और RSS से मजबूत रिश्तों के चलते धर्मेंद्र प्रधान को भी प्रबल दावेदार माना जा रहे हैं। 55 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान संगठन के 'साइलेंट वॉरियर' माने जाने वाले नेता हैं, जिनकी स्वीकार्यता पार्टी के हर वर्ग में है। ओडिशा से ताल्लुक रखने वाले प्रधान फिलहाल केंद्रीय शिक्षा मंत्री हैं और इससे पहले कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
उन्होंने 1983 में ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और 2010 में बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बने।
प्रधान संगठन और सरकार दोनों में अपनी दक्षता और संतुलित कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत की रणनीति तैयार करने में उन्होंने केंद्रीय भूमिका निभाई थी।
किसी भी गुट से विरोध नहीं और कम बोलकर प्रभावशाली काम करने की उनकी पहचान उन्हें पार्टी में एक मजबूत और भरोसेमंद चेहरा बनाती है।
🔴 4. प्रह्लाद जोशी
दक्षिण भारत से ताल्लुक रखने वाले जोशी को BJP के 'मिशन साउथ' का चेहरा बनाया जा सकता है। वे संगठन और रणनीति में दक्ष माने जाते हैं।
🔴 5. निर्मला सीतारमण / वानति श्रीनिवासन
महिला नेताओं में भी नाम चर्चा में हैं। BJP महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में केंद्रीय मंत्री सीतारमण का नाम संभावित महिला उम्मीदवारों में शामिल है। उसके अलावा वानति श्रीनिवासन भी रेस में शुमार हैं। सूत्रों के हवाले से यह भी खबर आई थी कि भाजपा को पहली बार महिला अध्यक्ष मिल सकती है।
🔴 इन नामों की भी हो रही है चर्चा
अरुण सिंह, तरुण चुग और डॉ. सुधा यादव
दोनों राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ नेताओं के नाम भी सामने आए हैं। डॉ. सुधा यादव को प्रधानमंत्री मोदी और RSS दोनों का भरोसेमंद माना जाता है।
जैसे-जैसे 2025 के अंत में बिहार चुनाव और 2027 में उत्तर प्रदेश चुनाव नजदीक आ रहे हैं, BJP की यह अध्यक्ष पद की नियुक्ति संगठन के आगामी राजनीतिक एजेंडे को दर्शाएगी।
🔴 उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर भी बढ़ी हलचल, कौन होगा यूपी भाजपा का हेड?
राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ ही अब सभी की नजरें उत्तर प्रदेश में होने वाली संगठनात्मक बदलावों पर टिकी हैं। खासकर प्रदेश अध्यक्ष की नई नियुक्ति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। उत्तर प्रदेश में साल 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं और माना जा रहा है कि ये चुनाव नए प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में ही लड़े जाएंगे। ऐसे में यह जिम्मेदारी बेहद अहम मानी जा रही है।
फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में देरी देखी जा रही है, लेकिन पार्टी सूत्रों का मानना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष की घोषणा के बाद यूपी अध्यक्ष का नाम भी जल्द सामने आ सकता है।
बीजेपी की चिंता का एक बड़ा कारण ओबीसी वोट बैंक का खिसकना भी है। पार्टी चाहती है कि नए प्रदेश अध्यक्ष का चयन ऐसा हो, जो न केवल संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बैठा सके, बल्कि जातीय समीकरणों को भी साध सके। इस बार प्रदेश अध्यक्ष के चयन में सामाजिक संतुलन, संगठन अनुभव और आगामी चुनावी रणनीति जैसे सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर फैसला लिया जाएगा।












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