कांग्रेस का मणिपुर में 'रिवर्स ऑपरेशन कमल', सरकार के साथ-साथ राज्यसभा सीट गंवा सकती है BJP

नई दिल्ली। मणिपुर में सत्ताधारी बीजेपी को उसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है जो उसने अपने प्रमुख प्रतिद्धंदी कांग्रेस के साथ कर्नाटक, मध्य प्रदेश और गुजरात में किया था। कांग्रेस के रिवर्स ऑपरेशन कमल ने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बुधवार को हुए घटनाक्रम के चलते बीजेपी को मणिपुर की सत्ता गंवाने के साथ-साथ शुक्रवार को राज्यसभा सीट पर होने वाले चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ सकता है।

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    एन बीरेन सिंह सरकार पर अनिश्चितता के बदल मंडरा रहे हैं

    एन बीरेन सिंह सरकार पर अनिश्चितता के बदल मंडरा रहे हैं

    मणिपुर में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार से उप मुख्यमंत्री वाई जॉय कुमार सिंह सहित कुल 9 विधायकों ने नाता तोड़ लिया है। एन बीरेन सिंह सरकार पर अनिश्चितता के बदल मंडरा रहे हैं। हालांकि कुछ समय के लिए राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला बीजेपी के लिए ढाल का काम कर सकती हैं, लेकिन वह भी इस स्थिति को ज्यादा देर तक होल्ड नहीं कर सकती हैं। 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में वर्तमान में 59 विधायक हैं। कांग्रेस के एक विधायक, श्यामकुमार सिंह अयोग्य घोषित किए गए हैं। 2017 के राज्य चुनाव के तुरंत बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था। राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान 19 जून यानि कल होगा। कांग्रेस गुजरात में एक सीट हार रही है, जिसकी भरपाई वह मणिपुर से करने की कोशिश करेगी।

    मणिपुर का सियासी समीकरण

    मणिपुर का सियासी समीकरण

    मणिपुर में 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 28 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई थी लेकिन 21 सीटें जीतने वाली बीजेपी सहयोगी दलों के समर्थन से राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाने में सफल रही थी। उसे नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी), नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) ने समर्थन किया था। एनपीपी और एनपीएफ के पास 4-4 विधायत है जबकि एक विधायक एलजेपी के पास है। एन निर्दलीय विधायक और एक टीएमसी विधायक ने भी मणिपुर में बीजेपी सरकार का समर्थन किया था।

    कांग्रेस ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाने का दावा पेश करेगी

    कांग्रेस ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाने का दावा पेश करेगी

    भाजपा को कांग्रेस के सात विधायकों का भी समर्थन मिला, जो अभी भी पार्टी के सदस्य हैं, लेकिन उनकी अयोग्यता का मामला अदालत में लंबित है। फैसला सुनाए जाने तक वे मतदान नहीं कर सकते। मणिपुर उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह ही उन्हें विधानसभा में प्रवेश करने से रोक लगा दी थी। अब, एनपीपी, टीएमसी और निर्दलीय विधायक ने बीरेन सिंह सरकार को समर्थन वापस ले लिया है। जिससे उनकी सरकार अल्पमत में आ गई है। राज्य के राजनीतिक हालातों को देखकर कांग्रेस आज सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती है। माना जा रहा है कि कांग्रेस ओकराम इबोबी सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाने का दावा पेश करेगी।

    बीजेपी हार सकती है राज्यसभा चुनाव

    बीजेपी हार सकती है राज्यसभा चुनाव

    कांग्रेस ने कहा है कि उसे 20 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। अगर वह सात बागी विधायकों की अनदेखी कर दे तो जिन्होंने भाजपा को समर्थन देने का वादा किया है, लेकिन संभावित अयोग्यता का सामना कर रहे है। इस तरह के मणिपुर विधानसभा 52 सदस्यों की रह जाती है। भाजपा के पास अपने 18 विधायकों और एनपीएफ और लोजपा के पांच विधायकों का समर्थन है। सात कांग्रेसी विधायक उनका समर्थन कर रहे हैं लेकिन उनकी मदद नहीं कर सकते हैं। तीस विधायकों के समर्थन से चल रही बीरेन सिंह सरकार पर अब खतरे में हैं। मणिपुर में भाजपा को सरकार बचाने के साथ-साथ राज्यसभा सीट बचाने के लिए भी जूझना पड़ रहा है।

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