'भारत को बचाना है कि बंगाल जीतना जरूरी है', BJP महामंत्री बीएल संतोष ने दिया बड़ा बयान
BL Santhosh on Bengal Election: पश्चिम बंगाल में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ममता बनर्जी सरकार को सत्ता से बेदखल कर बंगाल में भगवा झंडा लहराने की पुरजोर काेशिश कर रही है। इस सबके बीच राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने पश्चिम बंगाल को लेकर बड़ा बयान दिया है। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बीएम सतोष का ये वीडियो 'पाञ्चजन्य के गोवा सागर मंथन' मंच का है।

बीएल संतोष ने इस कार्यक्रम में कहा, "बंगाल की चुनावी लड़ाई केवल सत्ता हासिल करने का जरिया नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत युद्ध है। इस साक्षात्कार से राजनीतिक गलियारों में खासी हलचल मची है, जहाँ उन्होंने कई संवेदनशील मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखी।
'भारत को बचाना है कि बंगाल जीतना जरूरी है'
बीएल संतोष ने पश्चिम बंगाल की लड़ाई को 'भारत को जनसांख्यिक चुनौतियों से बचाने' के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। उनके अनुसार, यह केवल एक चुनावी मुकाबला नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक अखंडता को बचाने का अंतिम मोर्चा है। उन्होंने इसे एक 'सभ्यतागत युद्ध' की संज्ञा दी, जिसका सीधा अर्थ है कि भाजपा इसे राष्ट्रहित से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मुहिम मान रही है।
बीएल संताष ने RSS को बताया भाजपा का 'मायका'
संतोष ने एक नई और भावनात्मक परिभाषा गढ़ी। उन्होंने संघ को भाजपा का 'मायका' बताते हुए कहा कि यह संगठन हमारी पार्टी का सबसे बड़ा शुभचिंतक है। इस बयान ने भाजपा और संघ के गहरे वैचारिक जुड़ाव को रेखांकित किया।
क्या संघ लेता हैं भाजपा के लिए निर्णय?
बीएल संताष ने स्पष्ट किया कि भाजपा के लिए सत्ता केवल कुर्सी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रहित के विचारों और संकल्पों को धरातल पर उतारने का एक पवित्र माध्यम है। संतोष ने यह भी जोर दिया कि पार्टी संघ से वैचारिक पोषण जरूर लेती है, लेकिन संगठन के निर्णयों में उसे पूरी स्वतंत्रता हासिल है।
अपने मूल्यों पर समझौता न करने की बात को समझाते हुए, उन्होंने 'डीकॉलोनाइजेशन' (उपनिवेशवाद से मुक्ति) का उदाहरण दिया। संतोष ने स्वीकार किया कि इस तरह के निर्णयों से कुछ उदारवादी तबकों का समर्थन भले ही घटा हो, लेकिन राष्ट्रहित के लिए यह आवश्यक था। उनका मानना है कि भाजपा सत्ता को विचारों के क्रियान्वयन का एक सशक्त साधन मानती है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्णय पर क्या बोले बीएल संतोष?
भाजपा अध्यक्ष के चुनाव में हुई देरी को लेकर उठ रहे सवालों पर भी बीएल संतोष ने खुलकर जवाब दिया। उन्होंने बताया कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि यह प्रक्रिया पिछले आठ-नौ महीनों से जारी थी। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों और फिर लोकसभा चुनावों की व्यस्तताओं के कारण इसमें स्वाभाविक रूप से अधिक समय लगा।
संतोष ने स्पष्ट किया कि भाजपा में सभी निर्णय बंद कमरों में कोई 'साजिश' नहीं होते, बल्कि वे एक लंबी सांगठनिक चर्चा और विस्तृत प्रक्रिया का परिणाम होते हैं। उन्होंने विपक्ष के 'केंद्रीकृत पार्टी' होने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए, पार्टी की आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर प्रकाश डाला।
उन्होंने देश भर में फैले भाजपा के 16,000 मंडल अध्यक्षों का उदाहरण दिया, जो पार्टी की मजबूत लोकतांत्रिक जड़ों का प्रतीक है। संतोष ने यह भी बताया कि भले ही नियम संसदीय समिति द्वारा बनाए जाते हों, लेकिन भाजपा का ढांचा बेहद लचीला है। यहाँ, आंतरिक असहमति या विभिन्न विचारों को भी पूरा सम्मान और स्वतंत्रता दी जाती है।












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