B'Day से ठीक पहले सलमान खान पर हुआ सनसनीखेज खुलासा

नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। बॉलीवुड के दबंग और फैन्‍स के भाईजान सलमान खान का कल 50वां जन्‍मदिन है। इस मौके पर सलमान पर लिखी गई पहली बायोग्राफी "बीइंग सलमान" रिलीज होने जा रही है। इस किताब में कुछ ऐसी बात लिखी गईं हैं जो सलमान की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। जी हां सलमान की इस बायोग्राफी में कांकणी हिरण शिकार केस से जुड़ी बातों की जिक्र है। बड़ा खुलासा ये है कि हिरण मामले में कोर्ट में बयान दर्ज करा चुके दो गवाहों के जो बयान इस किताब में लिखे गये हैं उनमें फर्क है।

Biography of Salman Khan out on his 50th birthday
एबीपी न्‍यूज के मुताबिक किताब में जो एक गवाह ने कहा है कि उसने रात में मरे हुए हिरण को देखा था जबकि दूसरे गवाह ने कहा है कि उसने रात में मरा हुआ हिरण नहीं देखा, अहम बात ये है कि इन दोनों गवाहों में से एक गवाह ने कहा है कि दोनों उस रात साथ ही थे जिस रात शिकार की बात कही जा रही है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस किताब में कुछ ऐसी बातें भी लिखी गईं हैं जो आजतक अनसुनी रही हैं। आगे की बात करने से पहले आपको हिरण केस में बारे में बात देते हैं।

क्‍या है कांकणी हिरण शिकार केस

सलमान पर जोधपुर की अदालतों में हिरण शिकार के तीन केस चल रहे हैं जिनमें से एक केस में 1 अक्टूबर 1998 की दरमियानी रात में कांकाणी गांव में सलमान पर काले हिरणों का शिकार करने का आरोप लगा है। इस केस में शेराराम, मांगीलाल, छोगाराम और पूनमचंद विश्‍नोई नाम के चार चश्‍मदीद गवाह हैं। इनमें गवाहों में से दो गवाह शेराराम और मांगीलाल से बीइंग सलमान के लेखक जसीम खान ने बात की और केस के बारे में उनके बयान अपने किताब में लिखा।

बयानों में है विरोधाभास

किताब के पेज नंबर 160 पर लिखा है कि शेराराम विश्‍नोई ने बताया कि 1 अक्‍टूबर 1998 की रात वो घर की छत पर सो रहे थे। अचानक उन्‍हें गोली चलने की आवाज सुनाई दी। उसके बाद उन्‍होंने मांगीलाल को आवाज दी। मांगीलाल ने बताया कि हम रोड पर गये तो हमने जिप्‍सी देखी जिसे सलमान खान चला रहे थे। उसमें सैफ अली खान भी बैठे थे।

मांगीलाल और शेराराम, ढाणी से जोधपुर रोड तक जिप्सी का पीछा करने के बाद नाकाम वापस लौट आए थे। मांगीलाल बिश्नोई का कहना हैं कि जब वो कांकाणी से वापस गुड़ा की तरफ आए तो छोगाराम बिश्नोई और पूनमचंद बिश्नोई उनको मिल गए। मांगीलाल बिश्नोई आगे बताते हैं कि " आपस में सभी लोग मिलने के बाद तय किया कि यहां -यहां गोली चली है और हिरण दौड़ते हुए मैंने देखा वो भी दो ही थे। सभी लोग घटनास्थल पर गए तो हिरण मरे पड़े थे। एक तो फर्लांग पर ही पड़ा था। दूसरा पलासी के घर पे थे।

कांकाणी हिरण शिकार केस में पूनमचंद, छोगाराम, शेराराम और मांगीलाल बिश्नोई ये चार चश्मदीद गवाह है। इनमें से दो गवाहों ने जो बातें लेखक को बताई और चार्जशीट में इनके जो बयान दर्ज हैं दोनों बयानों में ज़्यादा कोई फर्क तो नहीं है सिवाए इन दो बातों के। पहली बात ये कि मांगीलाल का कहना है कि वो शोर- शराबा सुन कर उठे और फिर उन्होंने शेराराम को जगाया।

वही शेराराम का कहना है कि उन्होंने जिप्सी सड़क पर जाते देखी और गोली की आवाज़ सुनी फिर उन्होंने मांगीलाल को आवाज़ दी। दूसरी बात ये है कि मांगीलाल ने ये कहा है कि मरे हुए हिरण उन्हें रात में ही मिल गए थे और उन्होंने रात भर उनकी रखवाली भी की थी। वहीं दूसरे चश्मदीद शेराराम का कहना है कि मरे हुए हिरण अंधेरे की वजह से रात में नहीं मिले थे वो उन्हें सुबह मिले थे।

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