Bilkis Bano: 'रहम की कोई गुंजाइश नहीं...' बिलकिस के दोषियों की रिहाई रद्द करते हुए SC ने क्या-क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने 2002 के गुजरात दंगे के दौरान बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और उसके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या के मामले में सोमवार को अहम फैसला सुनाया।
कोर्ट ने उम्रकैद की सजा भुगत रहे 11 दोषियों को समय से पहले रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले रद्द कर दिया। कोर्ट ने दोषियों को दो सप्ताह के भीतर वापस जेल जाने और अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि गुजरात सरकार छूट का आदेश पारित करने में सक्षम नहीं है, यह देखते हुए कि जिस राज्य में अपराधी को सजा सुनाई गई है, वहां की सरकार सजा में छूट देने के लिए उपयुक्त सरकार है। आइए जानते हैं कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने माना कि मई 2022 का आदेश, जिसमें उसने एक दोषी की रिहाई को गुजरात सरकार की 1992 की छूट नीति के अनुसार विचार करने का निर्देश दिया था, अमान्य आदेश था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिट याचिका, जिसमें सरकार को छूट पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, भौतिक तथ्यों को छिपाकर और भ्रामक बयान देकर दायर की गई थी। इन लोगों को बिलकिस बानो, जो उस समय गर्भवती थी, के साथ गैंगरेप और 2002 में गुजरात में दंगों के दौरान उसके परिवार के 7 सदस्यों की हत्या करने का दोषी ठहराया गया था।
गुजरात से महाराष्ट्र क्यों भेजना पड़ा था मामला?
कोर्ट ने कहा कि गुजरात सरकार ने मई 2022 के फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर नहीं करके और कोर्ट पर दबाव डालकर कि महाराष्ट्र सरकार ही उपयुक्त सरकार है, महाराष्ट्र सरकार की शक्ति हथिया ली। कोर्ट ने कहा कि गुजरात सरकार आरोपियों के पक्ष में थी और इसी आशंका के कारण कोर्ट को बिलकिस बानो का मुकदमा गुजरात से महाराष्ट्र स्थानांतरित करना पड़ा। पीठ ने कहा कि जहां कानून का शासन लागू करना है, वहां करुणा और सहानुभूति की कोई भूमिका नहीं है। इस कोर्ट को कानून के शासन को बनाए रखने में मार्गदर्शन बनना चाहिए।












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