बिहार: मन में कोसी के कहर की आहट लिए श‍िविरों से घर लौटे लोग

river kosi return
पटना। कोसी को कोसने वाले अब राहत में हैं। नेपाल में भूस्खलन के बाद भोटे कोसी नदी में जमे मलबे को हटाने के लिए वहां की सरकार के विस्फोट नहीं करने और वहां से नियंत्रित रूप से जलप्रवाह किए जाने का फैसला लेकर बड़ी राहत दी है। सुपौल, मधेपुरा और सहरसा में बनाए गए राहत शिवरों में शरण लिए 1.14 लाख लोग घर वापस लौट गए हैं।

  • आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव अनिरूद्ध कुमार का कहना है कि इन जिलों में राहत शिवरों में रह रहे 1.14 लाख लोग अपने-अपने गांव लौट गए हैं, लेकिन उनसे कहा गया है कि जलप्लावन के हालात उत्पन्न होने की स्थिति वे अपने गांव तुरंत छोड़ने के लिए सचेत रहें। वे बोले कि इन जिलों में तैनात सेना को वापस बुला लिया जाएगा।
  • किसी भी खतरे की स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ की 15 टीमें और एसडीआरएफ की चार टीमें अभी कुछ और दिनों तक लोगों की देखरेख में डटी रहेंगी। कोसी नदी में भू-स्खलन के बाद 28 से 32 लाख क्यूसेक पानी के जमा हो जाने पर आबादी के लिए बढ़ते खतरे के चलते सरकार ने पूर्व में विस्फोट कर मलबे को हटाने का निर्णय लिया था।

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बाद में उसने ऐसा ना करके चट्टान में किए गए तीन छिद्र को और बढ़ाकर वहां से नियंत्रित रूप से जलप्रवाह करना शुरू किया था। आपदा प्रबंधन विभाग के विशेष सचिव अनिरूद्ध कुमार ने बताया कि भारत और नेपाल के विशेषज्ञ भू-स्खलन स्थल पर अभी भी काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि भारत-नेपाल सीमा स्थित कुसहा बांध के समीप 2008 को कोसी नदी का तटबंध टूटने से आई प्रलयंकारी बाढ़ के कारण उत्तर बिहार के पांच जिलों में आई त्रासदी में 250 लोगों की मौत हुई थी। आज भी वह दर्द लोगों की आंखों में दिखता है।

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