Lok Sabha Election 2024: बिहार में गरीब परिवारों को 2-2 लाख रुपए, नीतीश के चुनावी दांव में कितना दम?
बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार ने लोकसभा चुनावों से ठीक पहले 94 लाख से ज्यादा गरीब परिवारों को स्व-रोजगार के लिए जो 2-2 लाख रुपए देना मंजूर किया है, इसे जेडीयू सुप्रीमो का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
नीतीश सरकार के इस फैसले के दायरे में जातीय जनगणना और आर्थिक सर्वे रिपोर्ट के आधार पर चिन्हित सभी वर्गों के 94,33,312 गरीब परिवार आएंगे। अगर बिहार में एक परिवार में औसत 6 लोग भी मानें तो इससे सीधे 5.6 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित होने जा रहे हैं।

मतदाताओं की बड़ी आबादी पर टारगेट
अगर 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों के आंकड़ों को देखें तो तब राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 7,36,47,660 थी। जाहिर है कि नीतीश सरकार के फैसले का लाभ इन मतदाताओं के एक बहुत बड़े हिस्सा को मिलने जा रहा है।
सभी जातीयों के गरीबों को मिलेगा फायदा
सबसे बड़ी बात ये है बिहार लघु उद्यमी योजना के तहत दी जाने वाली यह रकम सभी जातीयों के गरीब परिवारों (जिनका मासिक आमदनी 6,000 रुपए से कम हो) को मिलेगी, जिसे राज्य सरकार ने गरीबों की श्रेणी में डाला है।
इसके लिए 62 उद्योग चिन्हित किए गए हैं, जिसके लिए तीन किश्तों में यह रकम देने का एलान किया गया है।
बिहार के लोगों की क्या है राय?
वनइंडिया ने नीतीश सरकार के इस फैसले के विश्लेषण के लिए बिहार के कुछ आम लोगों से बात की है। बिहार चुनावी नजरिए से बहुत ही चौकन्ना राज्य है और लोगों की प्रतिक्रिया भी उसी हिसाब से देखने को मिल रही है।
'फायदा भविष्य में भी होगा'
जैसे हमारे सहयोगी इंज़माम वहीदी ने मुंगेर में दिलीप पटेल नाम के एक व्यक्ति से पूछा कि उन्हें यह फैसला कैसा लगा? उन्होंने बताया, 'नीतीश कुमार जबसे महागठबंधन के साथ जुड़े हैं, विकास कार्यों की झड़ी लगा रहे हैं। सीएम नीतीश कुमार द्वारा 2 लाख वाली योजना ऐतिहासिक फैसला है। चुनावी मौसम में ही सही, लेकिन ऐसा फैसला लिया गया है जिसका फायदा भविष्य में भी होगा।'
2 लाख रुपए तीन किश्तों में दिए जाएंगे
इन्होंने तो ये तक दावा किया कि आने वाले चुनावों में इसकी वजह से जनता नीतीश कुमार के चेहरे पर वोट करेगी। अब जरा नीतीश सरकार के वादे के मुताबिक 2 लाख रुपए की रकम लोगों तक पहुंचने की शर्तों को परख लेते हैं।
बिहार में मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने जो बताया है उसके अनुसार इस स्कीम के तहत पहले साल 50,000 रुपए, दूसरे साल 1 लाख रुपए और तीसरे साल 50,000 रुपए दिए जाने हैं।
इस योजना को पांच वर्षों के लिए मंजूर किया गया है। चालू वित्त वर्ष यानी 2023-24 के लिए 250 करोड़ रुपए और अगले वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 1,000 करोड़ रुपए सांकेतिक रूप से यानी कुल 1,250 करोड़ रुपए की रकम की सरकारी मंजूरी दी गई है।
'बिहार का भविष्य खराब कर रही है नीतीश सरकार'
हमने इस फैसले के बारे में पटना में अरिमर्दन झा नाम के एक व्यक्ति से बात की। उनके मुताबिक, 'यह चमचों को खुश करने की कोशिश से ज्यादा कुछ नहीं है। नीतीश सरकार कोई काम नहीं कर रही है, सिर्फ एक शिगूफा छोड़ दिया है। राज्य सरकार प्रदेश की दुर्दशा कर रही है और इसका भविष्य खराब कर रही है। आने वाली सरकार के लिए भी इससे संकट ही खड़ा होगा।'
उद्योग में निवेश के लिए सरकार देगी सहायता
सबसे बड़ी गौर करने वाली बात ये है कि बिहार सरकार 2 लाख रुपए की वित्तीय सहायता देने के लिए जो ऑनलाइन आवेदन मांगेगी, उसमें लोगों को बताना होगा कि वे किस तरह के कुटीर या लघु उद्योग के लिए सरकार से सहायता चाहते हैं।
इसे भी पढ़ें- 'इतना जल्दी सीटों का...', बिहार में सीट शेयरिंग को लेकर आ गया लालू यादव का बड़ा बयान
मतलब, यह योजना स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए है, न कि मुफ्त में घर बैठे सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त करने की। जैसा कि अभी कुछ राज्यों में महिलाओं और युवाओं को दिया जा रहा है।
इसलिए, जिनके लिए बिहार सरकार ने यह पहल शुरू की है, वास्तव में वह इस तरह के प्रस्ताव को किस तरह से लेते हैं, इसके लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।












Click it and Unblock the Notifications