Prashant Kishor की चुनावी पारी तैयार, 2 अक्टूबर को पार्टी की लॉन्चिंग, मुस्लिम-दलित वोटरों पर क्या है प्लान?
चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब खुद चुनाव मैदान में उतरने के लिए कमर कस चुके हैं। जन सुराज के संयोजक ने घोषणा की है कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती पर उनकी नई राजनीतिक पार्टी की औपचारिक लॉन्चिंग होगी।
प्रशांत किशोर की ओर से कहा गया है कि उनका राजनीतिक दल अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा में राज्य की सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगा।

बिहार में 5,000 किलोमीटर की जन सुराज यात्रा की है
दो साल पहले यानी 2 अक्टूबर, 2022 से प्रशांत किशोर ने बिहार के पश्चिम चंपारण से अपनी जन सुराज यात्रा की शुरुआत की थी। इसी के दो साल पूरे होने पर वह अपनी नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने जा रहे हैं। किशोर का दावा है कि वह राज्य के 14 जिलों में पैदल और 10 जिलों में कार से यात्रा करते हुए 5,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर चुके हैं।
प्रशांत किशोर बनेंगे जातीय छत्रपों की टेंशन!
चंपारण से उनकी यात्रा शुरू करने का मकसद यह संदेश देना था कि उसी जमीन से महात्मा गांधी ने नील की खेती के खिलाफ भारत में अपना पहला सत्याग्रह शुरू किया था। प्रशांत किशोर का राजनीति में आना बिहार में जातीय छत्रपों पर क्या असर डालेगा, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी।
लोगों से जाति के कुचक्र से निकलने का करते रहे हैं आह्वान
बिहार की राजनीति जातिवाद के लिए कुख्यात है। प्रशांत किशोर अपनी पूरी यात्रा के दौरान बिहार के लोगों से इसी जाति के कुचक्र से उठकर अपने 'बच्चों के भविष्य' को ध्यान में रखकर फैसले लेने की अपील करते रहे हैं।
प्रशांत किशोर की राजनीति के केंद्र में रहेंगे दलित और मुसलमान
उनकी इस अपील का भी फोकस खास कर के दलित और मुस्लिम समाज रहा है, जिनसे वह अपील करते आए हैं कि जाति और धर्म के आधार पर वोट डालना बंद करें। साफ है कि बिहार में उनकी राजनीति में दलित और मुस्लिम फैक्टर बहुत मायने रखने जा रहा है।
बिहार चुनाव में 75 मुस्लिमों को टिकट देने का दावा
राज्य में मुस्लिम और दलितों की कुल आबादी 37% है, जिन्हें वह गोलबंद करने की कोशिशों में जुटे रहे हैं। हाल ही में किशनगंज में एक सभा में उन्होंने एलान किया था कि उनकी जन सुराज पार्टी बिहार विधानसभा चुनाव में 75 मुसलमानों को टिकट देगी।
उन्होंने कहा था, 'आप डर के चलते असमाजिक तत्वों को वोट देना कब बंद करेंगे और अपने बच्चों के भविष्य के लिए कब मतदान करना आरंभ करेंगे?'
प्रशांत किशोर ने जेडीयू से शुरू किया था पहला राजनीतिक करियर
वैसे दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने जो पहला राजनीतिक पद स्वीकार किया था, वह नीतीश कुमार का जेडीयू है, जिनकी पार्टी का मूल जनाधार ही कुर्मी और कोइरी वोटर रहे हैं।
बिहार की राजनीति में अभी एनडीए और महागठबंधन का दबदबा
बिहार की राजनीति इस समय सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी महागठबंधन या इंडिया ब्लॉक में बंटी हुई है। मुसलमान वोटर अभी मुख्य रूप से इंडिया ब्लॉक की अगुवा लालू यादव के आरजेडी के साथ जुड़े हुए हैं। वहीं दलित वोट के कई ठेकेदार हैं, जिनमें से अधिकतर इस समय एनडीए में शामिल हैं।
किसका खेल बिगाड़ेंगे प्रशांत किशोर?
खुद ऊंची जाति यानी ब्राह्मण समाज से आने वाले प्रशांत किशोर ने अपने लिए जो चुनावी तैयारी की है, उसे बिहार को जाति के जंजाल से निकालने के लिए सकारात्मक तौर पर लिया जा सकता है। लेकिन, यह लालू, नीतीश और बीजेपी में से किसके जनाधार को ज्यादा बिगाड़ेगी यह धीरे-धीरे स्पष्ट होने की संभावना है।












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