महाराष्ट्र की राजनीति में मुसलमान क्यों हो गए आउट? पहली बार विधान परिषद में भी कोई मुस्लिम नहीं होगा
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र विधान परिषद के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जहां एक भी मुसलमान नहीं होगा। महाराष्ट्र में 1937 से दोनों सदनों वाली विधायिका है, लेकिन अबतक कभी ऐसा नहीं हुआ कि इसमें एक भी मुस्लिम प्रतिनिधि नहीं रहा हो।
अभी कांग्रेस के वजाहत मिर्जा और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के अब्लुल्ला खान दुर्रानी दो मुस्लिम विधान पार्षद हैं। इन दोनों का कार्यकाल इसी महीने खत्म होने जा रहा है।

पहली बार महाराष्ट्र विधान परिषद में भी कोई मुस्लिम नहीं होगा
इसके बाद महाराष्ट्र विधान परिषद में एक भी मुस्लिम प्रतिनिधि नहीं रह जाएगा। क्योंकि, शुक्रवार को होने वाले काउंसिल चुनाव के लिए भी किसी मुस्लिम का नाम नहीं दिया गया है।
महाराष्ट्र से एक भी मुसलमान नहीं जीता लोकसभा का चुनाव
हाल में हुए लोकसभा चुनावों में राज्य की 48 सीटों में से कहीं भी मुस्लिम सांसद नहीं चुना गया है। कमाल तो ये हो गया कि विपक्षी इंडिया ब्लॉक या महा विकास अघाड़ी ने भी किसी मुसलमान को टिकट नहीं दिया था। इसको लेकर कांग्रेस के मुस्लिम नेताओं ने तब काफी नाराजगी भी जाहिर की थी।
महाराष्ट्र विधानसभा में सिर्फ 10 मुस्लिम एमएलए चुने गए थे
महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीटें हैं। 2019 में इसके लिए सिर्फ 10 मुस्लिम एमएलए चुने गए थे। जबकि, 2011 की जनगणना के मुताबिक महाराष्ट्र में मुस्लिम आबादी 1.30 करोड़ से अधिक या करीब 12% है। लेकिन, विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा में उनका कहीं पर्याप्त प्रतिनिधित्व नजर नहीं आता।
मुस्लिम नेताओं ने शुरू की दबाव बनाने की राजनीति
अब मुस्लिम नेताओं ने खासकर एमवीए से यह सुनिश्चित करने की मांग शुरू कर दी है कि विधान परिषद के अगले चुनाव में मुसलमानों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दें। समाजवादी पार्टी एमएलए रईस शेख ने इसके लिए शिवसेना (यूबीटी) चीफ उद्धव ठाकरे, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले और एनसीपी (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल को चिट्ठी भी लिखी है।
एआईएमआईएम की ओर झुक सकते हैं महाराष्ट्र के मुसलमान?
शेख का कहना है, 'जब से प्रदेश अस्तित्व में आया, महाराष्ट्र से 567 सांसद चुने जा चुके हैं, जिसमें से केवल 15 (2.5%) मुस्लिम समुदाय के सांसद हैं। मुसलमानों को प्रतिनिधित्व न देकर एमवीए उनके एआईएमआईएम जैसी पार्टियों की ओर भेजने का जोखिम उठा रहा है, जो मुसलमानों का ध्रुवीकरण करते हैं।'
भाजपा के डर से इंडिया ब्लॉक मुसलमानों को टिकट देने से डरता है!
राजनीति के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियां महाराष्ट्र में मुसलमानों को टिकट देने से इसलिए परहेज करने लगी हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि कहीं इसका फायदा बीजेपी को न मिल जाए। उन्हें मुसलमानों को टिकट देने पर भाजपा और सहयोगियों के पक्ष में बहुसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण का भय सताने लगा है।
इसे भी पढ़ें- BMW Crash In Mumbai: बार के अवैध हिस्से पर चला बुलडोजर, बीएमसी की बड़ी कार्रवाई
'मुसलमानों का वोट चाहिए लेकिन...'
लोकसभा चुनावों में जब इंडिया ब्लॉक ने मुसलमान उम्मीदवारों से मुंह चुरा लिया था, तब वंचित बहुजन अघाड़ी के नेता प्रकाश अंबेडकर ने एक एक्स पोस्ट में कहा था, '...अगर उन्हें बीजेपी की तरह मुसलमानों को बाहर रखना पड़ा है तो फिर दोनों में अंतर क्या है?...'महा विकास आघाड़ी को मुस्लिम वोट चाहिए, मुस्लिम उम्मीदवार नहीं'।'












Click it and Unblock the Notifications