Bihar Politics: कांग्रेस पर नरम क्यों पड़े लालू, बिहार चुनाव की चुनौती की वजह से बैकफुट पर RJD?
Bihar Politics: दिल्ली विधानसभा चुनावों के बाद इसी साल के आखिर में बिहार विधानसभा के चुनाव भी होने हैं। दिल्ली विधानसभा चुनावों से लेकर उससे पहले भी कांग्रेस और आरजेडी की दशकों पुरानी दोस्ती में दरार नजर आने लगी थी। लेकिन, जब कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शनिवार को पटना पहुंचे तो दोनों खेमा इस दरार को समय रहते पाटने की कोशिश में जुटा दिखाई पड़ा।
लोकसभा चुनावों में एक दशक में सबसे ज्यादा सीटें जीतने और कांग्रेस को लोकसभा में विपक्ष का नेता पद मिल जाने के बाद से पार्टी और इसके सर्वेसर्वा राहुल गांधी अलग ही मोड में दिखते रहे हैं। विधानसभा चुनावों में पार्टी लगातार हारती गई है। फिर भी वह विपक्षी इंडिया ब्लॉक में अपने खिलाफ उभरती बेरुखी से बेपरवाह रहते हुए अपनी डफली,अपना राग बजाते दिखे हैं। दिल्ली विधानसभा चुनाव इसका सबसे बेहतर उदाहरण है।

Bihar Politics: राहुल को लेकर लालू के पूरे परिवार ने दिखाई गर्मजोशी
लेकिन, जब आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव के बेटे और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को राहुल के पटना के उसी होटल में होने की सूचना मिली, जिसमें राजद का राष्ट्रीय सम्मेलन हो रहा था, तो वह बिना समय गंवाए उनसे मिलने पहुंच गए। शिष्टाचार का तकाजा था तो लगे हाथ बुजुर्ग माता-पिता (लालू यादव-राबड़ी देवी) से मिलने की गुजारिश भी कर दिए।
राहुल भी जैसे पहले से सोच के ही आए थे, फौरन यादव परिवार से मुलाकात के लिए पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित उनके आवास पर पहुंच गए। राहुल भी लालू के परिवार से पूरे गर्मजोशी के साथ मिले तो लालू-रबड़ी ने भी देशी अंदाज में उनकी खातिरदारी में कोई कमी नहीं छोड़ी।
कांग्रेस नेता के स्वागत के लिए तेजस्वी के अलावा उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव, लालू की बड़ी बेटी और पाटलिपुत्र की सांसद मीसा भारती, एक और बेटी रोहिणी आचार्य सभी मौजूद थे।
Bihar Politics: 'हमारे राजनीतिक विरोधी कांग्रेस और आरजेडी के बीच मतभेद की धारणा पैदा करना चाहते थे'
इस मुलाकात के बारे में राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुबोध कुमार मेहता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'हालांकि, यह एक अनौपचारिक बैठक थी, दोनों ओर से काफी गर्मजोशी थी। हमारे राजनीतिक विरोधी कांग्रेस और आरजेडी के बीच मतभेद की धारणा पैदा करना चाहते थे। राहुलजी की हमारे शीर्ष नेताओं से मुलाकात से स्थिति साफ हो गई है। राजद और कांग्रेस पुराने सहयोगी हैं और दोनों ही पार्टियों की अलग नीतियां और कार्यक्रम हैं।'
कांग्रेस प्रवक्ता ज्ञान रंजन गुप्ता ने कहा, 'राहुल जी और लालू जी पहले भी एक-दूसरे से मुलाकात करते रहे हैं। इस बैठक में भी गर्मजोशी और सौहार्द दिखा।'
Bihar Politics: इंडिया ब्लॉक और दिल्ली चुनाव को लेकर कांग्रेस-राजद में उभर आ थे मतभेद
कांग्रेस को लेकर राजद के नजरिए में यह बहुत ही बड़े बदलाव का संकेत है। पिछले 9 जनवरी को ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक की दोनों सहयोगी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के अलग-अलग चुनाव लड़ने पर तेजस्वी यादव ने जो कुछ कहा था, उससे लग रहा था कि कांग्रेस के साथ तालमेल में कुछ दिक्कत होने लगी है।
तेजस्वी ने तब कहा था, 'यह पहले से तय था कि इंडी अलायंस सिर्फ लोकसभा चुनावों के लिए है।' तब माना गया कि यह बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों के बार्गेनिंग के लिए दबाव बनाने की रणनीति है। यही नहीं, राजद इस बार दिल्ली में चुनाव भी नहीं लड़ रही है। जबकि, पिछली बार भी वह कांग्रेस के तालमेल से यहां चुनाव मैदान में उतरी थी।
इससे पहले जब महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बुरी तरह हार गई, जम्मू-कश्मीर में ही पार्टी की फजहत हुई तो इंडिया ब्लॉक की कमान टीएमसी प्रमुख को देने की मांग उठनी शुरू हो गई। तब लालू ने बिना समय गंवाए खुलकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन कर डाला।
उन्होंने पिछले दिसंबर में कहा था,'पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इंडिया ब्लॉक का प्रमुख बनाए जाने का कांग्रेस की आपत्ति का कोई मतलब नहीं है। यह कुछ नहीं कर सकती।' उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा था, 'हां, उन्हें ब्लॉक की अगुवाई की कमान दी जानी चाहिए।'
Bihar Politics: बिहार चुनाव में विपक्षी एकता की धारणा मजबूत करने लिए राजद के लिए कांग्रेस बनी जरूरी?
कांग्रेस और राहुल गांधी को लेकर राजद के शीर्ष नेतृत्व का यह रुख तब सामने आया था, जब मीडिया के एक वर्ग में जेडीयू सुप्रीमो और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक बार फिर से पलटी मारने की अटकलें खूब चर्चा में थीं। खुद लालू ने भी नीतीश के लिए अपने दरवाजे खोल दिए थे। लेकिन, लगता है कि जबसे नीतीश ने राजद की ओर वापसी को लेकर अपना शटर गिरा लिया है, लालू कुनबे को फिर से कांग्रेस में ही उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है।
क्योंकि, कांग्रेस भले ही यूपी की तरह बिहार में भी जमीन पर बहुत कमजोर है, लेकिन एनडीए के खिलाफ चुनावी नैरेटिव सेट करने में वह आरजेडी के काम जरूर आ सकती है। उदाहरण के लिए राहुल ने बिहार में जाति जनगणना की अलख जगाए रखने के लिए यह कहना भी शुरू कर दिया है कि वहां जो हाल ही में इस तरह की कवायद हो चुकी है, वह प्रक्रिया ही'फर्जी' है।












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