बिहार में असमंजस बरकरार, नीतीश ने सोचने के लिए 1 दिन का वक्त मांगा
हालांकि इससे पहले नीतीश ने बैठक में अपने सवा घंटे के भाषण में सीएम पद लेने से मना कर दिया था। नीतीश ने अपने भाषण में पार्टी की सारी गतिविधियों से पार्टी के सारे कार्यकर्ताओं को अवगत कराया था। अब सोमवार को भी जेडीयू विधान मंडल की बैठक होगी और उसके बाद ही फैसला होगा कि बिहार के सीएम की कुर्सी पर नीतीश रहते हैं या नहीं और अगर नहीं तो सीएम पद किसको दिया जायेगा या फिर जेडीयू कैसे अपनी सत्ता बिहार में बचा पायेगी?
तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने राज्यपाल से कहा कि वो एक-एक कार्यकर्ता से पूछे कि उनके मन में क्या है और बीजेपी जेडीयू के फैसले के बाद ही कोई कदम उठायेगी। मालूम हो कि जेडीयू में नीतीश कुमार को लेकर दो फाड़ मच गयी है। जहां एक दल नीतीश के इस्तीफे पर खुश है वहीं दूसरी ओर एक दल नीतीश के इस्तीफे को मंजूर नहीं कर रहा है जिसके लिए कार्यकर्ताओं ने रविवार को जे़डीयू अध्यक्ष शरद पवार का भी घेराव किया।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। आम चुनाव में जद (यू) को 40 में से मात्र दो सीटें मिली हैं। जबकि 2009 के लोकसभा चुनाव में इसे 20 सीटें मिली थी, जब राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जद(यू) का गठबंधन था। पिछले साल जद(यू) 17 सालों का गठबंधन तोड़कर भाजपा से अलग हो गई थी।













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