नीतीश कुमार के इतने खास कैसे बन गए संजय झा? क्यों बनाया JDU का पहला कार्यकारी अध्यक्ष

Bihar Political News: संजय झा जेडीयू के पहले ऐसे नेता हैं, जिन्हें पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने उन्हें यह पद दिया है तो साफ है कि उनपर जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आशीर्वाद है।

संजय झा 2017 से पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव रहे हैं। वे इस साल अप्रैल में ही राज्यसभा पहुंचे हैं और पार्टी ने हाल ही में उन्हें सदन का नेता भी नियुक्त कर दिया है।

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जदयू के और विस्तार के लिए काम करना है- संजय झा
इंडियन एक्सप्रेस से उन्होंने कहा है, 'मैं हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री का आभारी हूं कि मुझे एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर मेरी भूमिका कठिन है। मुझे पार्टी के आधार को और विस्तार के लिए काम करना है।'

नीतीश के इतने खास कैसे बन गए संजय झा?
प्रश्न है कि आखिर झा नीतीश के इतने करीब कैसे बन गए कि इस पद के लिए उन्हें ही भरोसेमंद समझा गया। पहले तो मुंगेर के मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह उनके सबसे खास माने जाते थे। नीतीश ने पिछले साल दिसंबर में उन्हें पार्टी के अध्यक्ष पद से हटा दिया था।

वैसे तो 56 वर्षीय संजय झा लंबे समय से नीतीश के करीबियों में रहे हैं। लेकिन, कहा जाता है कि अबकी बार लोकसभा चुनावों से पहले इंडिया ब्लॉक से निराश होकर नीतीश के भाजपा के साथ आने में झा ने ही मुख्य भूमिका निभाई है। जब ललन सिंह पार्टी अध्यक्ष थे, तब ऐसी कयासबाजियां लगाई जाती थीं कि वह लालू यादव के इशारे में नीतीश की पार्टी को चला रहे हैं। उनके हटने के बाद ही जेडीयू फिर से एनडीए का हिस्सा बना है।

संजय झा को क्यों बनाया JDU का पहला कार्यकारी अध्यक्ष?
अभी नीतीश कुमार के पास मुख्यमंत्री के साथ-साथ अध्यक्ष होने के नाते जदयू संगठन की भी जिम्मेदारी है। अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में नीतीश को एक ऐसा भरोसेमंद सिपाही चाहिए था, जो पार्टी को पूरा समय दे सके। जहां तक झा की बात है तो 2012 में जेडीयू से जुड़ने से पहले वे किसी न किसी रूप में बीजेपी या उसके नेताओं से जुड़े रहे थे।

संजय झा के राजनीतिक करियर की शुरुआत
संजय झा का राजनीतिक करियर एक तरह से 2001 से 2004 के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी के सहयोगी और मीडिया एडवाइजर के रूप में शुरू हुआ। 2006 में वह बीजेपी के टिकट पर बिहार विधान परिषद में भी पहुंचे। कहा जाता है कि बाद में वे दिग्गज भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के भी करीबी हो गए और उसी दौरान नीतीश के भी नजदीक आ गए।

नीतीश के साथ जुड़े तो भरोसेमंद बनते चले गए
लेकिन, जब नीतीश ने पहली बार 2013 में एनडीए से पलटी मारी और 2014 में अकेले जेडीयू को चुनाव मैदान में उतार दिया तब भी संजय झा उनके साथ बने रहे। इससे उन्होंने नीतीश का भरोसा जीत लिया।

उन्होंने उस साल दरभंगा से चुनाव भी लड़ा, लेकिन भाजपा का मुकाबला नहीं कर पाए। लेकिन, जब नीतीश 2017 में फिर से बीजेपी की ओर पलटने की सोचने लगे तो माना जाता है कि संजय झा ने तब भी इसका रास्ता बनाने में अपने सूत्रों का भरपूर इस्तेमाल किया।

इसके बाद संजय झा का कद जेडीयू में तेजी से बढ़ने लगा। 2019 में वह पार्टी के एमएलसी बने और नीतीश ने उन्हें अपने कैबिनेट में जगह दी। 2020 के विधानसभा चुनावों के बाद उनका कद और बढ़ा और उन्हें नीतीश ने जल संसाधन और सूचना और जन संपर्क जैसे विभाग सौंपे। जल संसाधन मंत्री रहते उन्होंने नीतीश सरकार के कई फ्लैगशिप योजनाओं पर अमल किया।

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