Bihar cabinet expansion:बिहार में इन युवा विधायकों को मिल सकता BJP से मंत्री बनने का मौका

नई दिल्ली- बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने मंत्रिमंडल के विस्तार के लिए बड़ी सहयोगी भाजपा से हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि, इस वक्त उनकी सरकार में उनके अलावा 13 ही मंत्री हैं, जिनके पास सारे विभागों की जिम्मेदारी है और इसके तलते सरकार का काम सफर कर रहा है। लेकिन, माना जा रहा है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व किसान आंदोलन से निपटने में लगा हुआ है, इसलिए फिलहाल नीतीश कुमार को उसके प्रस्ताव का इंतजार करना पड़ रहा है। लेकिन, जिस तरह से बीजेपी ने वहां अपने वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर सत्ता से दूर किया है, मंत्रिमंडल विस्तार में पार्टी के कुछ युवा विधायकों को मंत्री बनने का मौका मिल सकता है।

भाजपा ने कई वरिष्ठ नेताओं को किया सत्ता से दूर

भाजपा ने कई वरिष्ठ नेताओं को किया सत्ता से दूर

बहुत अधिक संभावना है कि बिहार में नीतीश कुमार मंत्रिमंडल का विस्तार 14 जनवरी या मकर संक्रांति के बाद कभी भी हो सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद ही संकेत दे दिया है कि वह सिर्फ भाजपा से लिस्ट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। क्योंकि इस बात में कोई शक नहीं कि मौजूदा सरकार में भाजपा के मंत्रियों का हिस्सा ज्यादा होगा और वह मौजूदा कैबिनेट में भी दिख रहा है, जिसमें नीतीश के अलावा जेडीयू के 4 और बीजेपी के 7 मंत्री हैं। बाकी एक-एक मंत्री दूसरे सहयोगी दलों के हैं। युवा नेताओं को रास्ता देने के लिए ही भाजपा ने वरिष्ठों को अलग-अलग पदों पर बिठा दिया है। मसलन, पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी राज्यसभा पहुंच चुके हैं। विजय कुमार सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष बन चुके हैं। पार्टी के पांच और कद्दावर चेहरे और पूर्व मंत्री नंद किशोर यादव, प्रेम कुमार, विनोद नारायण झा, राम नारायण मंडल और कृष्णा कुमार ऋषि को विधानसभा की विभिन्न समितियों का अध्यक्ष बनाया जा चुका है।

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    20 से ज्यादा मंत्रियों का पद खाली

    20 से ज्यादा मंत्रियों का पद खाली

    नीतीश कुमार की पिछली सरकार में 33 मंत्री थे, जिनमें जेडीयू की संख्या ज्यादा थी। अब समीकरण बदल चुका और भाजपा बड़ी पार्टनर है, जिसके 74 विधायक हैं और जेडीयू के पास सिर्फ 43 एमएलए हैं। अभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मिलाकर कुल 14 ही मंत्री हैं, जबकि वहां अधिकतम 36 मंत्रियों की गुंजाइश है। इस तरह से अभी वहां 21 से 22 और लोग मंत्री बनाए जा सकते हैं। विधायकों की संख्या के आधार पर संभावना है कि जेडीयू के मंत्रियों की संख्या 4 से बढ़कर 14 तक की जा सकती है। जबकि, 7 मंत्रियों वाली भाजपा के मंत्रियों की तादाद 18 से 20 तक होने की संभावना है। बाकी दोनों सहयोगियों-हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और विकासशील इंसान पार्टी को भी एक-एक अतिरिक्त मंत्री पद दिया जा सकता है।

    इन विधायकों को मंत्री बनाने की चर्चा

    इन विधायकों को मंत्री बनाने की चर्चा

    भाजपा के युवा चेहरों में जिनके मंत्री बनाए जाने की खूब चर्चा हो रही थी, उनमें नितिन नवीन को संगठन कार्य की जिम्मेदारी देकर छत्तीसगढ़ भेजा जा चुका है तो संजीव चौरसिया को भी उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्य का सह-प्रभारी बना दिया गया है। इसलिए अब इन दोनों को मंत्री पद दिए जाने की संभावना नहीं के बराबर है। जिस नाम का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है वे हैं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के बेटे नीतीश मिश्रा जो इस बार झंझारपुर सीट से बहुत भारी अंतर से जीते हैं। वैसे भी मिथिलांचल ने भाजपा और एनडीए को इस बार जितना साथ दिया है, उसके हिसाब से मैथिल ब्राह्मणों को उचित प्रतिनिधित्व देने को लेकर बीजेपी पर भारी दबाव है। बीजेपी की ओर से दूसरा सबसे चर्चित नाम सम्राट चौधरी का बताया जा रहा है। इसके अलावा गोपालगंज जिले की बरौली सीट से विधायक बने युवा नेता रामप्रवेश राय को भी मंत्री पद मिलने की संभावना है। इससे कैबिनेट में पार्टी की ओर से राजपूतों की भी भागीदारी बढ़ेगी। वहीं एक और युवा नाम चर्चा में है, वो है संजय मयूख का। हालांकि, ये विधान पार्षद हैं। लेकिन, इन्हें मंत्री बनाकर भाजपा कायस्थों को भी प्रतिनिधित्व देकर अपना सोशल इंजीनियरिंग पूरा कर सकती है।

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