बिहार चुनाव: क्षेत्र बदलते ही नेताओं ने बदली चाल

पटना( मुकुन्द सिहं)। बिहार विधानसभा चुनाव मे दो चरण हो चुके है। तिसरे चरण की तैयारी चल रही है। पार्टी भी अपने मुद्दों को नय सिरे से धौंस देने मे लग गई है। कई मुद्दों दो चरणो मे आजमायें जा चुके है। आपको बताते चले की विकास से शुरू हुआ चुनाव प्रचार गोमांस, अगड़ा-पिछड़ा, आरक्षण से लेकर नेताओं के बदजुबानियों तक जा पहुँचा। खुलेआम मंच से एक दुसरे को शैतान, नरपिशाच, ब्रहमपिशाच, आदि कहे गए।

Bihar Assembly Elections 2015
जनता मे प्रतिक्रिया भी हुई तो लाभ-हानि का गणित पता भी चल गया। चुनाव आयोग को भी दखल देनी पड़ी। और फटकार भी लगानी पड़ी। लेकिन अब निर्णायक चरण हे थोड़ी चूक उम्मीदो के धुंधली कर सकती है। लिहाजा अब ठोक बजा कर मुद्दे तय हो रहे है। मतदान केन्द्र पर महिलाओं और युवाओं की बढती तादात और उत्साह को देखते हुए थोड़ी सावधानी भी बरती जा रही है।

हलांकी इसकी बानगी दूसरे चरण के दौरान मिल गई थी, जब भ्रष्टाचार को दोनो गठबंधनों ने मुद्दा बना लिया था। जातीय जनगणना, डीएनए और आरक्षण जैसे मुद्दों को छोड़ महागठबंधन अब महंगाई के मुद्दे पर उतर आया है। तीसरे फेज मे अधिकतर क्षेत्र शहरी मूड के है। तो मतदाताओं के लिए मुद्दे भभी इसी के अनुरूप तय कर लिय गया है।

महागठबंधन दाल की बढती कीमतों पर लगातार मोदी सरकार परहमला कर रहे है तो राजग ने भी चौक-चौराहे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के पोस्टरो के साथ-साथ अब स्थानीय नेताओं के भी चेहरे चमकाने का काम कर रही है। यह अनुमान लगाया जा रहा है की भ्रष्टाचार के मुद्दे पर यह गठबंधन आक्रामक रहेगा।

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