भुवनेश्वर AIIMS: सीनियर डॉक्टर ने बेटे का Covid-19 केस छिपाया, कई डॉक्टर वायरस संदिग्ध ?

नई दिल्ली- ओडिशा के भुवनेश्वर एम्स के मेडिकल सुप्रिटेंडेंट पर जानबूझकर बेटे के कोरोना वायरस पॉजिटिव होने का केस छिपाकर, कई डॉक्टरों को संक्रमण के खतरे में डालने का आरोप लगा है। इसकी वजह से एम्स के ही कम से कम तीन डॉक्टरों के सेल्फ-कोरंटाइन में जाने की खबरें हैं, जबकि डर है कि अस्पताल में मौजूद न जाने कितने लोग उस कोरोना पॉजिटिव मरीज के संपर्क में आ चुके होंगे। हालांकि, अस्पताल प्रशासन इस मामले पर कोई ठोस जवाब नहीं दे पा रहा है, जबकि आरोपी मेडिकल सुप्रिटेंडेंट ने इसपर कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

ओडिशा का दूसरा पॉजिटव केस एम्स डॉक्टर का बेटा!

ओडिशा का दूसरा पॉजिटव केस एम्स डॉक्टर का बेटा!

जानकारी के मुताबिक जिस 19 साल के लड़के के कोरोना वायरस पॉजिटिव होने की बात सामने आ रही है, वह ओडिशा का दूसरा पॉजिटव केस है। ओडिशा सरकार के प्रवक्ता सुब्रोतो बागजी ने कहा है, 'यह युवक यूके से लौटा था। वह स्टेबल है। उसके परिवार वालों को होम क्वारंटाइन का आदेश दिया गया है।' इससे पहले इटली से ओडिशा लौटे एक रिसर्च स्कॉलर को कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया था। लेकिन इंडियन एक्प्रेस की एक खबर के मुताबिक भुवनेश्वर एम्स के रेसिडेंट्स डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) की ओर से कथित रूप से लिखे गए एक खत में कहा गया है, 'आरडीए मेडिकल सुप्रिटेंडेंट और आसोलेशन यूनिट के इंचार्ज की ओर से कोविड-19 के संदिग्धों के मामले में हुई बहुत बड़ी लापरवाही आपकी जानकारी में लाना चाहता है।' इस खत के सामने आने के बाद भुवनेश्वर एम्स में खलबली बच गई है।

जानबूझकर ट्रैवल हिस्ट्री छिपाई गई ?

जानबूझकर ट्रैवल हिस्ट्री छिपाई गई ?

आरडीए के खत में दोनों वरिष्ठ डॉक्टरों की हरकत पर गंभीर सवाल उठाते हुए आगे लिखा गया है, 'हमारी जानकारी में ये बात आई है कि 19 साल का एक मरीज आइसोलेशन यूनिट में लाया गया और उसकी ट्रैवल हिस्ट्री गुप्त रखकर उसे डॉक्टरों के कमरे में रखा गया। यही नहीं उस मरीज को 12 घंटे तक भर्ती भी नहीं किया गया था। जब आसोलेशन यूनिट के इंचार्ज से पूछा गया तो उन्होंने बताया था कि हाई-प्रोफाइल केस है और ज्यादा कुछ नहीं बताया। उन्होंने खुद से मरीज की केस शीट भरी और जरूरी ट्रैवल हिस्ट्री छिपा ली गई।' खत में दावा किया गया है कि यह मरीज 19 मार्च को पॉजिटिव पाया गया था और यह ओडिशा का दूसरा केस है। खत में स्पष्ट तौर पर दावा किया गया है कि, 'यह पाया गया था कि मरीज मेडिकल सुप्रिटेंडेंट का बेटा है।' इस खत में इस मामले को मेडिकल-एडमिस्ट्रेटिव लापरवाही बताते हुए, बाकी डॉक्टरों के साथ विश्वासघात की बात कही गई है।

एम्स प्रशासन ने आरोपों का खंडन किया

एम्स प्रशासन ने आरोपों का खंडन किया

जिस डॉक्टर ने ये खत लिखने का दावा किया है, उसने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा है कि,'पूरी दुनिया सामने आने की सलाह दे रही है। यह एक सीनियर डॉक्टर की शर्मनाक हरकत है।' हालांकि, भुवनेश्वर एम्स की डायरेक्टर डॉक्टर गीतांजलि बतमानबाने ने कहा है कि, 'मैं इस खत के बारे में पता लगाने के लिए आरडीए से मिली। मुझे बताया गया कि इसपर किसी का हस्ताक्षर नहीं है। किसी ने शरारत से इसे भेजा है। संवाद का अभाव रहा है। जानबूझकर कोई स्थिति और मरीज की पहचान नहीं छिपाई गई है। '

आरोपी डॉक्टर ने साधी चुप्पी

आरोपी डॉक्टर ने साधी चुप्पी

जो डॉक्टर मरीज के पिता यानि मेडिकल सुप्रिटेंडेंट के संपर्क में आ चुके हैं, उनमें से एक ने बताया कि 'मेरे पेरेंट्स 78 साल के हैं। मुझे हमारे व्हाट्सअप ग्रुप के मैसेज से पता चला कि सुप्रिटेंडेंट के बेटे का टेस्ट पॉजिटिव आया है। हालांकि, हम उसके पिता के संपर्क में आए, लेकिन हमें सेल्फ-क्वारंटाइन की सलाह दी गई है।' एम्स की डायरेक्ट ने कहा है कि कुछ डॉक्टरों ने छुट्टी का आवेदन जरूर दिया है, लेकिन एक्सपोजर की बात नहीं कही है। जबकि, मेडिकल सुप्रिटेंडेंट ने टिप्पणी के अनुरोध पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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