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केंद्र के कृषि अध्यादेशों के खिलाफ किसानों का 20 सितंबर को चक्का जाम का ऐलान

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन कृषि अध्यादेशों के खिलाफ किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को किसानों ने हरियाणा और पंजाब में धरना शुरू किया है। भारतीय किसान यूनियन के नेतृ्त्व में अंबाला और लुधिया में किसान जमा हुए हैं। अंबाला में जमा किसानों ने कहा है कि आज से 19 सितंबर तक वो धरना देंगे और शांतिपूर्वक तरीके से सरकार तक बात पहुंचाने की कोशिश करेंगे लेकिन सरकार उनकी बात नहीं सुनती है तो फिर 20 सितंबर को पूरे हरियाणा में चक्का जाम किया जाएगा।

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    Haryana: Pipli लाठीचार्ज से गुस्से में किसान, 20 सितंबर को Highway Jam की चेतावनी | वनइंडिया हिंदी

    इन अध्यादेशों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान लगातार सड़कों पर हैं। हाल ही में हरियाणा के कुरुक्षेत्र में किसानों पर प्रदर्शन के दौरान लाठी चार्ज भी हुआ था। केंद्र सरकार जहां अपने कदम को किसानों के हक में बता रही है, वहीं किसान इससे बहुत गुस्से हैं। किसानों से जुड़े ज्यादातर संगठन इन अध्यादेशों को किसानों के खिलाफ बता रहे हैं। किसानों का कहना है कि सरकार इन अध्यादेशों के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने की स्थापित व्यवस्था को खत्म कर रही है, जिससे किसान अपनी फसल के दाम के लिए व्यापारी के भरोसे हो जाएगा और उसका शोषण और बढ़ेगा। बीते दो महीनों में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश में किसान अलग-अलग तरीके से सड़क पर उतरकर अपना विरोध जता चुके हैं। किसानों में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है और उनके अहिंसक आंदोलन को नजरअंदाज कर रही है। किसानों को विपक्षी कांग्रेस, इनेलो, रालोद और कुछ अन्य दलों का भी साथ मिला है। इन दलों ने भी इन अध्यादेशों को वापस लेने की मांग की है।

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    क्या हैं ये अध्यादेश

    इस साल जून में केंद्रीय कैबिनेट ने किसानों को फसल का मूल्य दिलाने और मार्केटिंग व्यवस्था में बदलाव करते हुए तीन अध्यादेश पारित किए हैं। पहला- आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन किया है, जिसके जरिये खाद्य पदार्थों की जमाखोरी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया। यानी व्यापारी कितना भी अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल वगैरह जमा कर सकते हैं।

    दूसरा- कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 है, जिसमें विपणन समितियों (एपीएमसी मंडियों) के बाहर कृषि उत्पाद बेचने और खरीदने की व्यवस्था तैयार करना है।

    तीसरा- मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020 है। ये कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को कानूनी वैधता प्रदान करता है ताकि बड़े बिजनेस और कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट पर जमीन लेकर खेती कर सकें।

    ये भी पढ़िए- मोदी सरकार के तीन 'काले' अध्यादेश किसान-मजदूर पर घातक प्रहार हैं: राहुल गांधी

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    English summary
    Bharatiya Kisan Union protest in haryana and punjab against agriculture ordinances passed by Union Cabinet
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