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Bengaluru water Crisis: बेंगलुरु में पानी के भारी संकट की आशंका! सूखे बोरवेल बचाने के लिए E-Flow प्लान पर काम

Bengaluru Water Crisis: बेंगलुरु शहर की बढ़ती आबादी और रिहायशी इलाकों के विस्तार का असर पर्यावरण संतुलन पर भी नजर आ रहा है। तेजी से गिरते भूजल स्तर की वजह से कई इलाकों में पानी का संकट गहराता जा रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिए बेंगलुरु वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने ई-फ्लो (E-Flow) पहल शुरू की है। इस योजना के तहत प्रोसेस्ड सीवेज पानी का इस्तेमाल अब शहर की झीलों में किया जाएगा। इससे झीलों में पानी का स्तर बेहतर होगा और आसपास के सूखे बोरवेल में फिर से पानी सप्लाई होने लगेगी।

अधिकारियों के मुताबिक, कई वार्डों में जलापूर्ति प्रभावित है और टैंकरों पर निर्भरता बढ़ गई है। ऐसे में झीलों में सीवेज का प्रोसेस्ड पानी छोड़कर प्राकृतिक रिचार्ज की प्रक्रिया तेज की जा सकती है। सिटी प्लानर्स और भूगर्भ शास्त्रियों की भी राय है कि अगर शहर की झीलों में साल भर पानी हो, तो आसपास के इलाकों में भूजल स्तर स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

Bengaluru Water Crisis

Bengaluru Water Crisis: पानी के इस्तेमाल के लिए नई नीति लागू

- जल संकट को देखते हुए प्रशासन ने कावेरी के पानी के गैर-जरूरी उपयोग पर सख्ती भी बढ़ा दी है।

- बगीचों की सिंचाई, कार धुलाई या निर्माण कार्यों में कावेरी पानी के दुरुपयोग पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

- इसके अलावा, निजी पानी टैंकरों की मनमानी दरों को नियंत्रित करने के लिए भी नियमन लागू किया गया है, ताकि आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

BWSSB का कहना है कि यह पहल सिर्फ तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक जल प्रबंधन रणनीति का हिस्सा है। शहर में वर्षा जल संचयन, अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण और झील संरक्षण जैसे उपायों को भी समानांतर रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।

Bengaluru Water News: बेंगलुरु में बढ़ रहा पानी संकट

बढ़ती आबादी और अनियमित वर्षा के बीच बेंगलुरु के लिए जल प्रबंधन सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में 'ई-फ्लो' पहल को पानी कटौती से जूझ रहे शहर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में राहत दे सकता है। इसके अलावा, शहर के पुराने जलाशयों और झीलों को भी पुनर्जीवित करने के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। 24 झीलों के रख-रखाव के लिए 210 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

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