Bengaluru Metro Update: ₹28,405 करोड़ का मेट्रो कॉरिडोर अटका, डबल-डेकर डिजाइन पर केंद्र की आपत्ति
Bengaluru Metro Update: बेंगलुरु मेट्रो के हेब्बल-सूरजपुर (Hebbal-Sarjapur कॉरिडोर) के लिए लंबे समय से इंतजार है। इसकी अनुमानित लागत ₹28,405 करोड़ को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने में देरी हो रही है। इस मुद्दे पर बेंगलुरु सेंट्रल से भाजपा सांसद पी.सी. मोहन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बड़ा अपडेट साझा किया है। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने बताया कि कर्नाटक सरकार की ब्लैंकेट डबल-डेकर नीति के कारण केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) ने परियोजना को फिलहाल हरी झंडी नहीं दी है।
जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने प्रस्तावित कॉरिडोर में सड़क और मेट्रो को एक साथ डबल-डेकर संरचना में विकसित करने की योजना बनाई थी। हालांकि MoHUA ने चेतावनी दी है कि पूरे कॉरिडोर में इस मॉडल को लागू करना जन परिवहन के मूल उद्देश्य को कमजोर कर सकता है।

Bengaluru Metro Update: डबल-डेकर डिजाइन पर आपत्ति
- मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि डबल-डेकर ढांचा ट्रैफिक दबाव वाले चुनिंदा जंक्शनों या इंटरचेंज पॉइंट्स पर व्यावहारिक समाधान हो सकता है।
- पूरे कॉरिडोर में सड़क और मेट्रो को बराबर ही ऊपर सड़क बनाने से इस प्रोजेक्ट के मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकते हैं।
- विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि सड़क और मेट्रो दोनों एक साथ ऊपरी ढांचे में बनाए जाते हैं, तो इससे मेट्रो की अनुमानित राइडरशिप प्रभावित हो सकती है।
Bengaluru Metro को दोबारा रिपोर्ट देने का निर्देश
साथ ही, ट्रैफिक जाम और प्रदूषण कम करने जैसे सामाजिक लाभ भी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल पाएंगे। MoHUA ने बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) से डिजाइन की समीक्षा कर परियोजना कर व्यावहारिक धरातल पर ठोस आंकड़ों के साथ इसे दोबारा पेश करने के लिए कहा है।
Bengaluru Metro News: शहर के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से को जोड़ेगा
यह कॉरिडोर शहर के उत्तरी हिस्से हेब्बल को पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी आईटी हब सरजापुर से जोड़ेगा, जिससे आउटर रिंग रोड और टेक कॉरिडोर के लाखों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है। बेंगलुरु में पहले से ही नम्मा मेट्रो के फेज-2 का विस्तार जारी है और कई लाइनों पर निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है। ऐसे में हेब्बल-सूरजपुर (Hebbal-Sarjapur) लाइन को शहर की भविष्य की कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
अब निगाहें BMRCL की संशोधित रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि डिजाइन में बदलाव कर केंद्र की आपत्तियों को दूर किया जाता है, तो परियोजना को मंजूरी मिल सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि बेंगलुरु के मेट्रो विस्तार की राह में 'डबल-डेकर' मॉडल बड़ा मुद्दा बन गया है।












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