Bengaluru के होटलों और रेस्टोरेंट में जल्द लग सकता है ‘टेबल चार्ज', इन कस्टमर्स पर रखी जाएगी सख्त नजर
Bengaluru Hotels table fee: बेंगलुरु में होटल और कैफे में बैठकर लंबे समय तक समय बिताने वाले ग्राहकों को जल्द ही अतिरिक्त पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। शहर के होटल मालिक अब उन ग्राहकों पर "टेबल चार्ज" लगाने पर विचार कर रहे हैं, जो केवल चाय-कॉफी या हल्का स्नैक ऑर्डर कर घंटों तक टेबल घेरकर बैठे रहते हैं। यह प्रस्ताव फिलहाल बेंगलुरु होटल ओनर्स एसोसिएशन के भीतर चर्चा के दौर में है।
पीक ऑवर्स में हो रहा नुकसान
होटल संचालकों का कहना है कि पीक आवर्स के दौरान टेबल लंबे समय तक खाली न होने से नए ग्राहकों को इंतजार करना पड़ता है, जिससे कारोबार पर सीधा असर पड़ता है। खासतौर पर छोटे और मझोले होटल, जिनके पास सीमित बैठने की व्यवस्था होती है, उन्हें इस समस्या का ज्यादा सामना करना पड़ रहा है। मालिकों के अनुसार, कई बार ग्राहक होटल को अनौपचारिक मीटिंग स्पेस की तरह इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अतिरिक्त ऑर्डर नहीं देते।

'पार्किंग फीस' की तर्ज पर लिया जाएगा टेबल यूज़ चार्ज
एसोसिएशन के कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया है कि पार्किंग चार्ज की तरह टेबल उपयोग शुल्क लागू किया जा सकता है। होटल मालिकों का तर्क है कि इससे टेबल का बेहतर रोटेशन होगा और नियमित भोजन करने वाले ग्राहकों को परेशानी नहीं होगी। उनका कहना है कि इसका मकसद कैजुअल विज़िट को रोकना नहीं, बल्कि व्यवसाय को टिकाऊ बनाए रखना है।
एसोसिएशन को मिली शिकायतें
सूत्रों के मुताबिक, कई होटल मालिकों ने इस मुद्दे को लेकर औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। खासकर व्यावसायिक और हाई-फुटफॉल इलाकों में यह समस्या ज्यादा गंभीर बताई जा रही है, जहां हर सीट की अहमियत होती है। फिलहाल यह प्रस्ताव शुरुआती चरण में है। बेंगलुरु होटल ओनर्स एसोसिएशन इस पर कर्नाटक सरकार से कानूनी स्पष्टता लेने की तैयारी कर रहा है, ताकि यदि यह व्यवस्था लागू हो तो पूरे शहर में एकसमान नियमों के तहत हो।
क्या बोले होटल मालिक?
होटल मालिकों का कहना है कि उनका उद्देश्य ग्राहकों को हतोत्साहित करना नहीं, बल्कि ग्राहक सुविधा और व्यवसायिक स्थिरता के बीच संतुलन बनाना है - खासकर ऐसे शहर में, जहां खाने-पीने की जगहों की हमेशा मांग रहती है।












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