Same Sex Marriage: समलैंगिक विवाह के खिलाफ बार काउंसिल ऑफ इंडिया, विरोध में प्रस्ताव पारित किया
समलैंगिक विवाह को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई फिलहाल 24 अप्रैल तक के लिए टल गई है लेकिन इस बीच बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस कानूनी मान्यता देने का विरोध किया है।

Bar Council Of India: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। इस प्रस्ताव में देश में समलैंगिक विवाह के खिलाफ सभी वकीलों ने आवाज उठाई है।
जानें बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने प्रस्ताव में क्या कहा?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council Of India) ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि इस बैठक में सर्वसम्मत राय यह बनी है कि समलैंगिक विवाह के मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए, विविध सामाजिक-धार्मिक पृष्ठभूमि के हितधारकों के एक स्पेक्ट्रम को ध्यान में रखते हुए, यह सलाह दी जाती है कि यह सक्षम विधायिका द्वारा विभिन्न सामाजिक, धार्मिक समूहों को शामिल करते हुए एक विस्तृत परामर्श प्रक्रिया के बाद निपटाया जाए।
क्या है बार काउंसिल ऑफ इंडिया (Bar Council Of India)
बार काउंसिल ऑफ इंडिया अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 4 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है जो भारत में कानूनी अभ्यास और कानूनी शिक्षा को नियंत्रित करता है। इसके सदस्य भारत के वकीलों में से चुने जाते हैं और इस तरह भारतीय बार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
बार काउंसिल के अध्यक्ष बोले- यह हमारी संस्कृति के खिलाफ
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि देश के सामाजिक-धार्मिक ढांचे को देखते हुए हमने सोचा कि यह (समान-लिंग विवाह) हमारी संस्कृति के खिलाफ है। इस तरह के फैसले अदालतों द्वारा नहीं लिए जाएंगे। इस तरह के कदम कानून की प्रक्रिया से आने चाहिए।
समलैंगिक विवाह पर 24 अप्रैल को नहीं हो पाएगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में LGBTQ+ व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों को लागू करने की मांग वाली याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच सुनवाई कर रही है। बेंच ने गुरुवार को घोषणा की थी कि याचिका पर सोमवार से शुक्रवार तक सुनावाई की जाएगी। लेकिन अब सोमवार को सर्वोच्च अदालत याचिका पर सोमवार को सुनवाई शुरू नहीं कर पाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संविधान पीठ पांच जजों की बेंच का हिस्सा रहे दो जजों की अस्वस्थता के कारण सोमवार को समान-लिंग विवाह को कानूनी मान्यता देने वाली विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करेगी। शनिवार को न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की अस्वस्थता के कारण, वह 24 अप्रैल को अदालत नहीं लगा पाएगा।












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