'खूबसूरत नजारा है, महिलाएं हिजाब जला रही हैं और अपने बाल...', ईरान मामले पर बोलीं तस्लीमा
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि कुछ महिलाएं इसलिए हिजाब पहनती हैं, क्योंकि इसके लिए उनका ब्रेनवॉश कर दिया जाता है।
नई दिल्ली, 20 सितंबर: हिजाब ना पहनने पर पुलिस हिरासत में ली गईं महसा अमिनी की मौत के बाद ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज रहे हैं। 22 साल की महसा अमिनी 13 सितंबर को अपने परिवार के साथ तेहरान घूमने आईं थी, जहां हिजाब ना पहनने की वजह से पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था और बाद में उनकी मौत हो गई। महसा अमिनी की मौत को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है और महिलाएं अपने हिजाब जलाकर और बाल काटकर इस मुद्दे पर विरोध जता रही हैं। वहीं, इस मामले को लेकर बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन ने भी अपनी राय दी है और कहा है कि वो ये देखकर खुश हैं कि महिलाएं हिजाब के विरोध में उतर रही हैं।

'महिलाओं के दमन, उत्पीड़न का प्रतीक है हिजाब'
इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, तस्लीमा नसरीन ने ईरान के मामले पर कहा, 'मैं बहुत खुश हूं। ये देखना वाकई खूबसूरत है कि इस घटना के विरोध में महिलाएं अपने हिजाब जला रही हैं और बाल काट रही हैं। ये मामला पूरी दुनिया के लिए और सभी मुस्लिम महिलाओं के लिए बेहद अहम है, क्योंकि हम जानते हैं कि हिजाब महिलाओं के दमन, उत्पीड़न और अपमान का एक प्रतीक है।'

'दुनियाभर में उठे हिजाब सिस्टम के खिलाफ आवाज'
तस्लीमा नसरीन ने आगे कहा, 'मैं कहती हूं कि पूरी दुनिया में इस हिजाब सिस्टम के खिलाफ आवाज उठनी चाहिए और दुनियाभर की महिलाओं को अपने हिजाब जला देने चाहिए। मेरा मानना है कि अगर कोई महिला हिजाब पहनना चाहती है तो उसे पहनने देना चाहिए, लेकिन अगर कोई महिला हिजाब नहीं पहनना चाहती तो ये उसका अधिकार है और उसे ये अधिकार मिलना चाहिए।'

'उनका ब्रेनवॉश कर दिया जाता है'
हिजाब सिस्टम का विरोध करते हुए तस्लीमा नसरीन ने कहा, 'ज्यादातर मामलों में हिजाब कोई च्वॉइस नहीं है। परिवार का दबाव, डर और घर का माहौल महिलाओं की मानसिक स्थिति ऐसी कर देता है कि वो हिजाब पहनें। बहुत सी महिलाएं इसलिए हिजाब पहनती हैं, क्योंकि उन्हें इसके लिए मजबूर किया जाता है। वहीं, कुछ महिलाएं इसलिए भी हिजाब पहनती हैं, क्योंकि इसके लिए उनका ब्रेनवॉश कर दिया जाता है।'

'आज हिसाब राजनीतिक हो गया है'
तस्लीमा नसरीन ने आगे कहा, 'कुछ महिलाओं को डर होता है कि अगर उन्होंने हिजाब नहीं पहना तो उनके साथ मारपीट की जाएगी, उनका शोषण किया जाएगा। हिजाब अब धर्म का हिस्सा नहीं रह गया है, आज हिसाब राजनीतिक हो गया है। धार्मिक कट्टरपंथी महिलाओं को बुर्का और हिजाब पहनने के लिए मजबूर करते हैं। हजारों ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें हिजाब पहनना पसंद नहीं और ईरान की महिलाओं के विरोध-प्रदर्शन से उन्हें हिम्मत मिलेगी। मैं ईरानी महिलाओं के साहस को सलाम करती हूं।'

तेहरान घूमने आईं थी महसा अमिनी
आपको बता दें कि पश्चिमी ईरान में रहने वाली 22 वर्षीय महसा अमिनी बीते 13 सितंबर को अपने परिवार के साथ तेहरान घूमने आईं थी। यहां हिजाब ना पहनने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसके बाद शुक्रवार को महसा अमिनी की मौत की खबर आई। पुलिस ने बताया कि महसा अमिनी को हार्ट अटैक आया था। वहीं, परिवार का आरोप है कि पुलिस ने महसा के साथ मारपीट की, जिसकी वजह से उनकी जान गई।












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