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Indian Railway: बालासोर हादसे का जिम्मेदार कौन? जानिये कैसे एक पटरी से दूसरी पटरी पर चली जाती है ट्रेन

How train interchange: बालासोर हादसे में अब तक 233 लोगों की मौत हो चुकी है। इतना बड़ा मौत का आंकड़ा और इतने बड़े हादसे के पीछे की वजह जानने के लिए लोग बेचैन हैं।

Balasore train accident

Indian Railway Track: ओडिशा से उस वक्त दिल दहला देने वाली खबर आई, जब पता चला कि बालासोर में एक बड़ा हादसा हो गया। मौत का आंकड़ा 233 पर पहुंच चुका है। ऐसे में तीन ट्रेनों का यूं आपस में भिड़ जाना और पटरी से उतर जाना अपने आप में बड़ा सवाल बना हुआ है।

पटरी पर उतर गई बोगियां
शुक्रवार शाम को बहनागा बाजार स्टेशन पर सबसे पहले बेंगलुरू-हावड़ा एक्सप्रेस और फिर उससे टकराकर कोरोमंडल एक्सप्रेस की बोगियां पटरी से उतर आईं। इसके बाद एक मालगाड़ी भी उनसे जा टकराई। दिल दहला देने वाले इस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

बड़ी संख्या में लोगों ने गंवाई जान
बालासोर हादसे में अब तक 233 यात्रियों की मौत हो चुकी है और 900 से ज्यादा लोग घायल हैं। ऐसे कैसे ट्रेन एक दूसरे से टकराई और बोगियां पलट गईं। इतने लोगों का मरना क्या किसी लापरवाही की ओर इशारा करता है? आखिर इतने बड़े हादसे का जिम्मेदार कौन? तीन ट्रेन कैसे आपस में टकरा गईं? चलिये इन सभी सवालों के जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

इस हादसे का जिम्मेदार कौन?
दो ट्रेन कैसे एक ही पटरी पर आ जाती हैं। इसका एक कारण तो मानवीय भूल और दूसरा तकनीकी खराबी हो सकती है। ऐसे में ओडिशा के बालासोर में हुए इस हादसे में भी तकनीकी खराबी को ही जिम्मेदार बताया जा रहा है। खबरों के मुताबिक, बालासोह में ट्रेनों की भिड़ंत का कारण भी सिग्नल में खराबी को ही बताया जा रहा है।

कैसे पटरी से उतर जाती हैं ट्रेन?
दरअसल, लोको पायलट को ट्रैक बदलने के निर्देश दिये जाते हैं। ये निर्देश रेलवे स्टेशन के पावर रूम से दिए जाते हैं। ट्रेन कैसे और कब किस ट्रैक पर जाएगी ये सारे काम लोको पायलट की तरफ से कंट्रोल रूम से किया जाता है। कंट्रोल रूप से पटरियों पर ट्रैफिक को देखा जाता है, उसके बाद ट्रेन के ट्रैक का निर्देश मिलता है।

जानिये ट्रैक बदलने का पूरा प्रोसीजर
इसे आसान भाषा में कहा जाए, तो दो पटरियों के बीच एक स्विच होता है। इस स्विच की मदद से ही दो पटरियां एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। ट्रेन के ट्रैक बदलने के समय पर लोको पायलट कंट्रोल रूम से निर्देश देता है। इसके बाद दो पटरियों के बीच लगे स्विच ट्रेन की मूवमेंट को राइट या फिर लेफ्ट की तरफ मोड़ते हैं, जिसके बाद ट्रेन का ट्रैक बदल जाता है और पटरियां चेंज हो जाती हैं।

लोको पायलट को मिलता है निर्देश
इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि हर रेलवे कंट्रोल रूम में एक डिस्प्ले लगी होती है, जिसपर ये दिख रहा होता है कि कौन सी ट्रेन किस पटरी पर है और कौन सी पटरी खाली है। आम ट्रैफिक की तरह यहां भी लाइटें लगी होती हैं। हरी या फिर लाल लाइटों के जरिये ये देखा जाता है। अगर किसी पटरी पर ट्रेन है तो रेड लाइट नजर आती है। वहीं अगर कोई ट्रैक खाली है तो हरे रंग की लाइट दिखती है। यही सब देखकर ही कंट्रोल रूम लोकोपायलट को निर्देश देता है।

ओडिशा रेल हादसे ने डराया
अब बालासोर मामले को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि डिस्प्ले पर सिग्नल नहीं दिखा होगा और ये भयानक हादसा हो गया। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 233 लोगों की मौत हो चुकी है और 900 से भी ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस हादसे के बारे में जो कोई भी सुन रहा है, रोंगटे खड़े हो रहे हैं।

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