बालासोर ट्रेन हादसा: CRS की जांच के केंद्र में 5 रेल कर्मचारी, 3 संभावित दृष्टिकोण से छानबीन
ओडिशा के बालासोर जिले में हुई भयानक ट्रेन दुर्घटना की जांच के दायरे में रेलवे के पांच कर्मचारी आए हैं। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की जांच के दायरे में जो कर्मचारी आए हैं, उनमें बाहानागा बाजार रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर के अलावा चार और कर्मचारी हैं।
इस रेल हादसे के दौरान तीन ट्रेनें एकसाथ दुर्घटना की चपेट में आ गई थीं, जिसमें 288 यात्रियों की मौत हो गई थी और 1000 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। न्यूज एजेंसी पीटीआई ने रेलवे के पांच कर्माचरियों के जांच के दायरे में आने की बात सोमवार को आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताई है।

सीआरएस की फाइनल जांच रिपोर्ट का इंतजार
इसके मुताबिक बाकी चार कर्मचारी सिग्नल संबंधी कार्यों से जुड़े हैं और दुर्घटना के वक्त ड्यूटी पर तैनात थे। सूत्रों के मुताबिक सभी पांच कर्मचारी अभी भी अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं और कोई भी आगे की कार्रवाई कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की ओर से तैयार दुर्घटना की फाइनल जांच रिपोर्ट पर ही निर्भर करेगी।
'पांच रेलवे कर्मचारी अभी जांच के केंद्र में हैं'
एक वरिष्ठ रेल अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर होने देने की शर्त पर कहा है कि 'पांच रेलवे कर्मचारी अभी जांच के केंद्र में हैं। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की ओर से एक फाइल रिपोर्ट जल्द आने की उम्मीद है।'
सीबीआई अलग से कर रही है जांच
गौरतलब है कि 2 जून की शाम ओडिशा के बाहानागा बाजार स्टेशन पर हुए इस ट्रेन हादसे की जांच कथित आपराधिक कृत्य के दृष्टिकोण से सीबीआई भी अलग से कर रही है। रेल मंत्रालय के अधिकारियों को आशंका है कि इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ छेड़छाड़ किए जाने की संभावना हो सकती है, जिसकी वजह से कोरोमंडल एक्सप्रेस को ग्रीन सिग्नल मिला, लेकिन वह मेन लाइन की वजह से लूप में जाकर एक खड़ी हुई मालगाड़ी से टकरा गई।
तीन संभावित दृष्टिकोण से छानबीन
इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ छेड़छाड़ को हादसे की प्रमुख संभावित वजह के रूप में देखा जा रहा है, जो कि एक ऑटोमेटेड सिग्नलिंग सिस्टम है। सूत्रों के मुताबिक तीन संभावित परिदृश्यों के हिसाब से जांच की जा रही है- क्या सिस्टम के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई या गलती से हुई या इलाके में जारी मेंटेनेंस कार्य का परिणाम है।
रेल हादसे के 'राजनीतिकरण' पर रेल संगठनों ने जारी किया बयान
इस बीच रेलवे कर्मचारियों के दो संगठनों ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन ने साझा बयान जारी कर कहा है कि जिस तरह से ट्रेन हादसे का 'राजनीतिकरण' हुआ, उससे उन्हें बहुत 'पीड़ा' हुई। इनकी ओर से कहा गया है, 'हम यह देखकर बहुत दुखी हैं कि कैसे इस ट्रेन दुर्घटना का राजनीतिकरण किया गया है और सोशल मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया में रेलवे की परफॉर्मेंस पर हमले किए जा रहे हैं। ऐसा हर एक हमला हमारी ईमानदारी और ड्यूटी के प्रति हमारे समर्पण का अपमान है।'
उन्होंने कहा कि 'लोको पायलट और ट्रैक मेंटेन करने वाले फ्रंटलाइन स्टाफ के लिए सुरक्षित हालात सुनिश्चित करने पर खर्च की गई छोटी रकम को फिजूलखर्ची बताया जा रहा है।' उनका आरोप है कि रेल कर्मचारी किन हालातों में काम कर रहे हैं, इन आरोपों में उसके प्रति पूरी नजरअंदाजी दिखती है।
साझा बयान में कहा गया कि 'कैसे ट्रैकमैन दिन रात ट्रैक पर पेट्रोलिंग करते हैं, कोई भी मौसम हो मरम्मत के लिए पुल के गर्डरों से लटकते हैं, लोको पायलट 10 घंटे से ज्यादा छोटे से केबिन में लगभग खड़े रहकर ट्रैक और सिग्नलों पर आंखें जमाए रहते हैं या यार्ड संचालित करने वाले लोग....सभी अपनी ड्यूटी के दौरान खुद को जोखिम में डालते हैं।'












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