बगलिहार डैम बंद होने के बाद किशनगंगा बांध की बारी! क्यों घबराया पाकिस्तान? इन 5 प्वाइंट्स में समझे
Baglihar Dam Kishanganga dam: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारत पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा रहा है। 1960 की सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के फैसले के बाद भारत पाकिस्तान की ओर बहने वाली नदियों के पानी के प्रवाह को रोकना शुरू कर चुका है। जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बने बगलिहार और सलाल डैम के गेट बंद कर भारत ने पाकिस्तान का पानी रोक दिया है। जिसकी वजह से पाकिस्तान की ओर बह रही चिनाब नदी कई सालों बाद सूखी हुई दिख रही है।
हालात ये हैं अखनूर इलाके में चिनाब नदी का जलस्तर कई सालों में पहली बार कमर के स्तर से नीचे चला गया, जिससे देखने के लिए नदी के किनारे सोमवार (05 मई) को भीड़ लग गई थी। भारत इसके बाद उत्तरी कश्मीर में झेलम नदी पर बने किशनगंगा बांध के फाटक बंद करने की योजना लगभग तैयार कर ली है। भारत ने ऐसा करके पाकिस्तान को ये संदेश दिया है कि अगर वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो आने वाले दिनों में चिनाब, झेलम और सिंधु सभी के जल प्रवाह रोक दिए जाएंगे। ऐसे में आइए समझते हैं कि बगलिहार डैम और किशनगंगा बांध को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच क्या विवाद है और इन डैम के बंद होने से पाकिस्तान क्यों इतना घबराया हुआ है?

बगलिहार और किशनगंगा बांध को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच क्या विवाद है?
बगलिहार और किशनगंगा एक हाइड्रो इलेक्ट्रिक बांध है। यानी इन दोनों डैम से बिजली बनाई जाती है।बगलिहार हाइड्रो इलेक्ट्रिक बांध जम्मू के रामबन में चिनाब नदी पर 2008 में बनकर तैयार हुआ था। 1999 में इसपर काम शुरू हुआ था। बगलिहार डैम की 475 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी संभालने की क्षमता है। ये 900 मेगावॉट बिजली बनाने की क्षमता रखता है।
रन-ऑफ-द-रिवर परियोजनाओं के रूप में निर्मित बगलिहार और सलाल बांध भारत को नीचे की ओर पानी छोड़ने के समय को विनियमित करने में सक्षम बनाते हैं। इनके निर्माण के समय, पाकिस्तान ने आपत्ति जताई थी और विश्व बैंक से हस्तक्षेप की मांग की थी। भारत ने तब बांध की ऊंचाई 143 मीटर पर रखने पर सहमति व्यक्त की थी।
किशनगंगा हाइड्रो इलेक्ट्रिक बांध पर काम 2007 में शुरू हुआ था और 2016 में पूरा होने की उम्मीद थी। सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान के साथ विवाद के कारण इसे 2011 में रोक दिया गया था, जो मध्यस्थता न्यायालय में चला गया था। दिसंबर 2013 में न्यायालय ने फैसला सुनाया कि भारत पाकिस्तान को 9 क्यूमेक्स का न्यूनतम प्रवाह सुनिश्चित करते हुए बिजली उत्पादन के लिए पानी को मोड़ सकता है। इसकी स्थापित क्षमता 330 मेगावाट है।
भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के बीच बगलिहार बांध को लेकर विवाद होता रहा है। पाकिस्तान हमेशा से इस मामले में वर्ल्ड बैंक से दखल देने की मांग करता रहा है। किशनगंगा बांध को लेकर भी पाकिस्तान आपत्ति जता चुका है।

किशनगंगा बांध और बगलिहार डैम बंद! पाकिस्तान के चिंता की 5 वजह
🔴 1. भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि हुई थी, जिसमें सिंधु बेसिन की तीन पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज का पानी को आवंटित किया गया। वहीं तीन पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का जल पाकिस्तान को आवंटित किया गया। पाकिस्तान शुरुआत से ही इन नदियों पर बन रहे बांध को लेकर कहता रहा कि भारत इसका इस्तेमाल अपनी सुविधा के मुताबिक कर सकता है। ऐसे में पाकिस्तान को डर है कि भारत उसकी जीवनरेखा माने जाने वाली सिंधु प्रणाली की नदियों पर जल नियंत्रण बढ़ा रहा है, जिससे उसके कृषि और पेयजल संसाधनों पर असर पड़ सकता है।
🔴 2. चिनाब नदी पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांतों में खेती में सिंचाई के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। पाकिस्तान की 80 फीसदी अर्थव्यवस्था कृषि पर टिकी है। रिपोर्ट के मुताबिक इन प्रांतों में कृषि पाकिस्तान की जीडीपी में लगभग 21% का योगदान करती है। अब बगलिहार बांध के गेट बंद करने से चिनाब नदी का प्रवाह 90% तक कम हो गया है, जिससे पाकिस्तान में सिंचाई के लिए पानी की गंभीर कमी हो सकती है।
हालांकि रबी की कटाई, जो वर्तमान में चल रही है, के लिए बहुत अधिक पानी की आवश्यकता नहीं है। लेकिन किसानों को धान की खेती के मौसम के दौरान इसकी जरूरत होती है, जो एक या दो महीने में शुरू होगी। धान के अलावा मक्का, कपास की जैसी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होगी। जो पाकिस्तान के प्रमुख निर्यात उत्पाद हैं। पानी का बहाव भारत की ओर से बंद रहा तो पाकिस्तान में धान और कपास के पैदावर पर असर पड़ेगा। जिससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ ग्रामीण बेरोजगारी भी बढ़ेगी।

🔴 3. भारत जा सकता है वर्ल्ड बैंक के पास: भारत जल-बंटवारे संधि से संबंधित विवाद को लेकर वर्ल्ड बैंक से संपर्क कर सकता है। पाकिस्तान को इस बात का भी डर सता रहा। रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार वर्ल्ड बैंक से किशनगंगा-राटल जलविद्युत परियोजना विवाद पर आईडब्ल्यूटी के तहत कार्यवाही को स्थगित करने की मांग कर सकता है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद बदली परिस्थितियों का हवाला देते हुए, भारत कार्यवाही को स्थगित करने के लिए दबाव डाल सकता है।
🔴 4. भूजल का अत्यधिक दोहन: चिनाब नदी में पानी कम होने की वजह से पाकिस्तान में भूजल का अत्यधिक दोहन बढ़ सकता है। जिससे सिंचाई प्रणाली अस्थिर हो सकती है।
🔴 5. ऊर्जा संकट गहरा सकता है: पाकिस्तान चिनाब नदी के पानी का उपयोग जलविद्युत उत्पादन के भी करता है। भारत की ओर से पानी का बहाव रोके जाने की स्थिति में जलविद्युत परियोजनाओं की क्षमता प्रभावित होगी। जिससे बिजली में कमी आएगी। जिससे पाकिस्तान में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।












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