नागरिकता संशोधन बिल को लेकर त्रिपुरा में बंद, एंबुलेंस फंसने से बच्चे की जान गई

त्रिपुरा। उत्तरपूर्वी राज्यों में नागरिकता संशोधन बिल का भारी विरोध किया जा रहा है। जिसके चलते एक 2 महीने के बच्चे की भी जान चली गई है। दरअसल बीमार बच्चे को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया जा रहा था लेकिन प्रदर्शनों के कारण एंबुलेंस रास्ते में ही फंस गई और अस्पताल पहुंचने से पहले ही बच्चे की मौत हो गई। बता दें त्रिपुरा में 11 घंटे के बंद के चलते तीन अलग-अलग जगहों पर 40 लोग झड़पों में घायल हो गए हैं।

48 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बंद

48 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बंद

राज्य की भाजपा सरकार ने प्रदर्शनों को देखते हुए 48 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। भीड़ तितर-बितर करने के लिए पुलिस को सेपाहिजाला जिले में गोलियां भी चलानी पड़ीं। बिश्रामगंज में जहां एंबुलेंस फंसी थी, वहीं पर झड़प के दौरान 15 लोग घायल हो गए हैं। बच्चा काफी बीमार था और उसे गोमती जिले से धलाई जिले इलाज के लिए ले जाया जा रहा था। इस बात की जानकारी पुलिस ने दी है।

आदिवासी गांव पर हमला

आदिवासी गांव पर हमला

धलाई जिले के मनौघाट बाजार और उत्तरी त्रिपुरा जिले में भी आदिवासी और गौर आदिवासी लोगों के बीच हिंसा देखने को मिली है। तीन इलाकों में धारा 144 लागू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार उत्तरी त्रिपुरा जिले के आनंद बाजार क्षेत्र में एक आदिवासी गांव में बंद समर्थकों का एक बड़ा समूह घुस आया और वहां लोगों पर हमला करने लगा। जिससे कई ग्रामीणों को स्थानीय पुलिस स्टेशन में शरण लेनी पड़ी।

गैर-आदिवासियों की दुकानों में आग लगी

गैर-आदिवासियों की दुकानों में आग लगी

कंचनपुर के उपखंड मजिस्ट्रेट, अभेदानंद बैद्य ने कहा, 'त्रिपुरा राज्य राइफल्स के 6 जवान और कम से कम 15 लोग झड़प में घायल हो गए हैं।' धलाई जिले में बंद समर्थकों और दुकानदारों के बीच झड़प में कम से कम चार व्यक्ति घायल हो गए हैं। पुलिस ने कहा कि एक बाजार जिसमें ज्यादातर गैर-आदिवासियों की दुकानें हैं, वहां भी आग लगा दी गई। हालांकि किसी भी घटना में मौत की कोई खबर नहीं आई है।

मुख्यमंत्री क्या बोले?

मुख्यमंत्री क्या बोले?

मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों को नहीं पता कि वो बंद क्यों कर रहे हैं। जबकि राज्य के जनजातीय क्षेत्रों को बिल के दायरे से बाहर रखा गया है। नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन (एनईएसओ) और विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों ने 11 घंटे का बंद बुलाया था।

क्या है बिल?

क्या है बिल?

इस विधेयक के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार गैर मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। विपक्ष इस बिल का लगातार विरोध कर रहा है। हालांकि यह बिल असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा और मणिपुर के आदिवासी इलाकों पर लागू नहीं होगा। गृहमंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं कि संस्कृति संरक्षण के लिए मणिपुर को इनर लाइन परमिट में शामिल कर लिया गया है।

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