सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी से NDA बैकफुट पर! INDIA ब्लॉक की चालाकी ने किया हैरान, नायडू कनेक्शन आया सामने
B. Sudershan Reddy (Vice President candidate): उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए मंच तैयार हो चुका है, जिसमें सत्तारूढ़ भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) के सीपी राधाकृष्णन का मुकाबला इंडिया ब्लॉक के पूर्व सुप्रीम कोर्ट सुदर्शन रेड्डी से होगा। सरकार के विपक्ष को साथ लेकर सर्वसम्मति से उपराष्ट्रपति चुनाव कराने के प्रयास नाकाम रहे हैं। इंडिया ब्लॉक ने सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है, जिन्हें "भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रगतिशील न्यायविदों में से एक" बताया जाता है।
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार घोषित कर INDIA ब्लॉक ने उपराष्ट्रपति चुनाव में ऐसी रणनीतिक चाल चली है, जिसे राजनीतिक जानकार NDA के लिए असहज करने वाली और उसके सहयोगी दलों को मुश्किल स्थिति में लाने वाली मान रहे हैं।

सुदर्शन रेड्डी कैसे हैं विपक्ष के 'मास्टरस्ट्रोक'
इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले लिखा है कि सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाना विपक्ष का सोचा-समझा दांव है। उन्हें एक ऐसे शख्स के तौर पर पेश किया जा रहा है जिनकी राजनीति से बाहर बेहद विश्वसनीय पहचान है। यही कारण है कि अब टीडीपी जैसी पार्टियों को कठिन राजनीतिक स्थिति से गुजरना पड़ रहा है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पहले ही बीआरएस, वाईएसआरसीपी और टीडीपी जैसी पार्टियों से संपर्क करना शुरू कर दिया है ताकि सुदर्शन रेड्डी के पक्ष में समर्थन जुटाया जा सके।
सुदर्शन रेड्डी चंद्रबाबू नायडू के हैं करीबी
सुदर्शन रेड्डी का नाम इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि उनका टीडीपी से पुराना नाता रहा है। 1980 और 1990 के दशक में वकालत के दौरान सुदर्शन रेड्डी चंद्रबाबू नायडू के काफी करीब रहे, जो उस समय टीडीपी सरकार में दूसरे नंबर के नेता माने जाते थे।
सुदर्शन रेड्डी ने कई विश्वविद्यालयों की पैरवी की और टीडीपी सरकार के विभागीय कानूनी मामलों को भी संभाला। इससे उनका आंध्र प्रदेश की राजनीति से गहरा जुड़ाव बना।
आज की स्थिति में टीडीपी, जो परंपरागत रूप से NDA का सहयोगी रही है, मुश्किल में फंस गई है। हालांकि पार्टी प्रवक्ता ने बताया है कि वे अभी भी NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन का समर्थन कर रहे हैं।
वहीं बीजेडी ने अभी तक उपराष्ट्रपति चुनाव पर कोई आधिकारिक रुख नहीं अपनाया है और सूत्रों के मुताबिक INDIA ब्लॉक ने अब तक नवीन पटनायक की पार्टी से समर्थन नहीं मांगा है। हालांकि भाजपा की ओर से राजनाथ सिंह ने नवीन पटनायक से संपर्क किया था। हालांकि उन्होंने उनको समर्थन देने की बात कही है या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
रेड्डी की उम्मीदवारी विपक्ष की तमाम शर्तों को करती है पूरा
विपक्ष का तर्क है कि जहां एनडीए ने संघ परिवार से जुड़े उम्मीदवार को मैदान में उतारा है, वहीं वे सुप्रीम कोर्ट से आए चेहरे को जनता के सामने रख रहे हैं।
रेड्डी की उम्मीदवारी विपक्ष की सभी मांगों के अनुरूप है। डीएमके की शर्त थी कि उम्मीदवार दक्षिण भारत से चाहिए, जो उनकी शर्त पूरी हुई। वहीं टीएमसी की मांग थी कि गैर-राजनीतिक उम्मीदवार होना चाहिए, वो भी शर्त पूरी हुई। आम आदमी पार्टी ने भी रेड्डी को समर्थन दिया है। कुल मिलाकर रेड्डी विपक्ष का 'कम्प्लीट कैंडिडेट' बन गए हैं।
वैचारिक लड़ाई का ऐलान
सुदर्शन रेड्डी का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा NDA उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के समर्थन की अपील के कुछ ही समय बाद सामने आया। उम्मीदवार की घोषणा करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे एक "वैचारिक लड़ाई" बताया और कहा कि विपक्षी दल इसलिए एकजुट हैं क्योंकि "लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला हो रहा है"।
खड़गे ने लिखा, ''उपराष्ट्रपति पद का यह चुनाव एक वैचारिक संघर्ष है। सुदर्शन रेड्डी भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रगतिशील न्यायविदों में से एक हैं। वे सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के एक निरंतर और साहसी समर्थक रहे हैं। वे उन मूल्यों को पूरी तरह से प्रतिबिंबित करते हैं जिन्होंने हमारे देश के स्वतंत्रता आंदोलन को इतनी गहराई से आकार दिया, और वे मूल्य जिन पर हमारे देश का संविधान और लोकतंत्र टिका हुआ है। ये सभी मूल्य हमले के अधीन हैं और इसलिए, इस चुनाव को लड़ने का हमारा सामूहिक और दृढ़ संकल्प है।''
सुदर्शन रेड्डी, जिन्होंने 2011 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायरमेंट लिया था और इससे पहले गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के जज रह चुके हैं, विपक्ष की नजर में ऐसे कानूनी विशेषज्ञ हैं जो पार्टी लाइनों से परे अपील रखते हैं।
सुदर्शन रेड्डी ने कहा -"मैं सभी दलों से, यहां तक कि NDA से भी अपील करता हूं कि वे मेरा समर्थन करें। मैं विपक्ष का उम्मीदवार जरूर हूं, लेकिन 60% भारत का प्रतिनिधित्व करता हूं।"
यह मुकाबला अब सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि विचारधारा बनाम न्यायपालिका और दक्षिण भारत बनाम दिल्ली सत्ता केंद्र के बीच की सीधी लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 : संसद में NDA को बहुमत में बढ़त
संसद की मौजूदा स्थिति
🔹 लोकसभा
542 सांसद (1 सीट खाली)
कुल सीट: 543
🔹 राज्यसभा
240 सांसद (5 सीट खाली)
कुल सीट: 245
कुल वोट (लोकसभा+राज्यसभा) - 782 सांसद
बहुमत का आंकड़ा - 391 वोट
🔹 राजनीतिक गठबंधनों की मौजूदा स्थिति
👉 NDA - 422 सांसद (बहुमत से 31 सांसद ज्यादा)
👉 I.N.D.I.A. - 312 सांसद (बहुमत से 79 सांसद कम)
🔹 नोट: 48 सांसद किसी गठबंधन में नहीं हैं।
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