Ayodhya verdict: निर्मोही अखाड़ा ने SC में दाखिल की पुनर्विचार याचिका

लखनऊ। अयोध्या के रामजन्मभूमि केस में मुस्लिम पक्ष के बाद अब निर्मोही अखाड़े ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। निर्मोही अखाड़े ने रिव्यू पिटिशन जमीन के फैसले को लेकर नहीं डाली है बल्कि राम मंदिर निर्माण को लेकर जो ट्रस्ट बनाना उसमें निर्मोही अखाड़े को भी प्रतिनिधित्व मिले के बारे में याचिका डाला है। निर्मोही अखाड़े के प्रवक्ता कार्तिक चोपड़ा ने यह जानकारी दी है। जानकारी के मुताबिक निर्मोही अखाड़ा का कहना है कि फैसले के एक महीने बाद भी ट्रस्ट में उनकी भूमिका तय नहीं हुई है। कोर्ट इस मामलें में स्पष्ट आदेश करे।

Ayodhya verdict: निर्मोही अखाड़ा ने SC में दाखिल की पुनर्विचार याचिका

उल्‍लेखनीय है कि बीते नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि को हिन्दू पक्ष को देने का आदेश दिया। जहां पर राम मंदिर का निर्माण होना है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए पांच एकड़ अलग से जमीन देने का आदेश दिया। इसके आलाव सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा के जमीन पर दावे को खारिज कर दिया था। लेकिन कोर्ट ने कहा था कि निर्मोही अखाड़े को राम मंदिर के ट्रस्ट में जगह दी जाएगी।

क्‍या था निर्मोही अखाड़ा का दावा

निर्मोही अखाड़ा ने दावा किया था कि वे राम जन्मभूमि मंदिर में स्थापित भगवान राम की प्रतिमा के शेबैती/उपासक हैं और मंदिर की मरम्मत और पुर्ननिर्माण का अधिकार उसी के पास है। निर्मोही अखाड़ा ने 17 दिसंबर, 1959 को अपने महंत के माध्यम से फैजाबाद की दीवानी अदालत में मुकदमा दायर कर यह दावा किया था कि जब्ती संबंधी मजिस्ट्रेट के आदेश और धारा 145 के तहत रिसीवर की नियुक्ति से उसका जन्मस्थान और मंदिर के प्रबंधन के उसके ''पूर्ण अधिकार'' पर प्रभाव पड़ा है।

इसपर तत्कालीन चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि हालांकि, मौखिक गवाही से यह स्थापित होता है कि निर्मोही अखाड़ा विवादित जमीन के आसपास मौजूद था। पीठ ने कहा था, ''लेकिन, विवादित जमीन के आसपास निर्मोहियों की मौजूदगी का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें प्रबंधन का अधिकार है और कानून के तहत उन्हें उपासक/शेबैत की पदवी मिल जाएगी।''

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