अयोध्या पर फैसले के बाद असम के दो मुस्लिम संगठनों का ऐलान, राम मंदिर निर्माण के लिए देंगे 6 लाख

गुवाहाटी। अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से प्रतिक्षित अयोध्या केस में फैसला सुनाते सुप्रीम कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज करने के साथ-साथ विवादित जमीन का मालिकाना हक रामलला विराजमान को देने फैसला सुनाया। साथ ही सर्वोच्च अदालत ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन देने का फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सुन्नी वक्फ बोर्ड संतुष्ट नहीं है। हालांकि, कई अन्य मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और राम मंदिर निर्माण में सहयोग देने के लिए आगे आए हैं।

जेएसपीए जुटाएगा 5 लाख रुपए

जेएसपीए जुटाएगा 5 लाख रुपए

अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद असम के मुस्लिम संगठन जेएसपीए ने राम मंदिर निर्माण में सहयोग देने का ऐलान किया है। असम में मुस्लिमों के इस संगठन ने घोषणा की है कि वे 5 लाख रुपये जुटाएंगे, जिसे बाद में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए दान किया जाएगा। मुस्लिम समुदायों के 21 संगठनों के मंच जेएसपीए ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।

मोरिया युवा छात्र परिषद भी एक लाख का सहयोग देगा

मोरिया युवा छात्र परिषद भी एक लाख का सहयोग देगा

मोमिनुल अवाल ने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। उन्होंने अयोध्या मामले पर कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वे भी इसका हिस्सा बनना चाहते हैं। वहीं, राम मंदिर निर्माण के लिए छात्र संगठन ऑल असम मोरिया युवा छात्र परिषद ने एक लाख रु देने का ऐलान किया है। मोरिया युवा छात्र परिषद की तरफ से कहा गया, 'हम सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हैं। हम सभी से फैसले को स्वीकार करने, शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील करते हैं। हमारा संगठन राम मंदिर के निर्माण के लिए 1 लाख रुपए का सहयोग देगा।'

शनिवार को आया था सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

शनिवार को आया था सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

बता दें कि शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन को रामलला विराजमान को देने का फैसला सुनाया। रामलला ना तो कोई संस्था हैं और ना ही कोई ट्रस्ट, यहां बात स्वयं भगवान राम के बाल स्वरुप की हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने रामलला को लीगल इन्टिटी मानते हुए जमीन का मालिकाना हक उनको दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट को खारिज नहीं किया जा सकता है। मस्जिद को खाली जमीन पर नहीं बनाया गया था, खुदाई में जो ढांचा पाया गया वह गैर-इस्लामिक था।

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